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महाराष्ट्र मामले में सबकी नजर अदालत पर

अर्चिस मोहन और एजेंसियां /  November 24, 2019

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने वाला पत्र सोमवार को सुबह साढ़े दस बजे अदालत में पेश करे। इसके अलावा भाजपा नेता द्वारा राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत का दावा करने वाले पत्र और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार के समर्थन पत्र को भी तलब किया गया है। न्यायालय ने राकांपा और कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की उस दलील से सहमति जताई कि सदन में बहुमत साबित करने का एकमात्र तरीका विश्वास मत की प्रक्रिया को तत्काल शुरू करना है। सिंघवी ने कहा कि इसमें गुप्त मत पत्रों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इस पर सर्वोच्च न्यायालय के पीठ ने कहा, 'इसमें कोई विवाद नहीं है। यह एक स्थापित सिद्धांत है कि विश्वास मत ही अंतिम परीक्षा है।' शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस ने शनिवार को अचानक फडणवीस के शपथ ग्रहण के बाद सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। तीनों दलों ने न्यायालय से गुहार लगाई थी कि फडणवीस सरकार को चौबीस घंटे के भीतर सदन में विश्वास मत साबित करने का निर्देश दिया जाए। तीनों दलों ने राज्यपाल द्वारा विश्वास मत के लिए 30 नवंबर की तिथि निर्धारित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसके लिए राज्यपाल द्वारा आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

 
चुनाव के बाद हुए तीनों दलों के गठबंधन 'महा विकास अघाड़ी' ने अपनी याचिका में राज्यपाल द्वारा 23 नवंबर को जारी उस आदेश को निरस्त करने की मांग की है जिसके तहत सरकार बनाने के लिए फडणवीस को आमंत्रित किया गया था। याचिका में गुहार लगाया गया है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के लिए राज्यपाल को निर्देश दिया जाए। लेकिन न्यायमूर्ति एनवी रमण की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि गठबंधन की इस दलील पर तत्काल विचार नहीं किया जा सकता है।
 
सर्वोच्च न्यायालय में शिवसेना का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य में सुबह 5:17 बजे जिस तरीके से राष्ट्रपति शासन को हटा दिया गया वह बिल्कुल बेतुका है क्योंकि इसके लिए कैबिनेट की कोई बैठक नहीं बुलाई गई। उन्होंने कहा कि यह भी स्पष्ट नहीं है कि राज्यपाल ने किस आधार पर इसकी सिफारिश की थी। सिंघवी ने कहा राकांपा के निर्वाचित 54 विधायकों में से 41 विधायक अजित पवार के साथ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को सौंपे गए इन विधायकों के हस्ताक्षर वाले पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अजित पवार अब पार्टी में नहीं हैं और उनके द्वारा पडणवीस को दिया गया समर्थन पत्र अवैध है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि राकांपा ने अजित पवार को पार्टी से निलंबित किया है अथवा नहीं।
 
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी इस मामले में भाजपा के विधायकों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्यपाल अपने विवेक से निर्णय ले सकते हैं कि किस पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए और अनुच्छेद 361 के तहत उनके इस फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती है। इस पर न्यायमूर्ति रमण ने कहा, 'लेकिन राज्यपाल किसी को भी आमंत्रित नहीं कर सकते।'
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