बिजनेस स्टैंडर्ड - अब सबको एक ही फिकर कुनबा न जाए कहीं बिखर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, January 22, 2020 04:03 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

अब सबको एक ही फिकर कुनबा न जाए कहीं बिखर

अर्चिस मोहन /  11 24, 2019

महाराष्ट्र सरकार गठन

बिजनेस स्टैंडर्ड अब सबको एक ही फिकर कुनबा न जाए कहीं बिखरमहाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक हंगामा दोनों राजनीतिक धड़ों के बीच समर्थन जुटाने के अभियान को लेकर रविवार को भी बदस्तूर जारी रहा। अब इस विवाद का फैसला विधानसभा के ही पटल पर होने की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए दोनों गुटों ने अपने राजनीतिक दांवपेच तेज कर दिए हैं। उच्चतम न्यायालय की रविवार को छुट्टी के दिन हुई विशेष सुनवाई में फौरन कोई नतीजा नहीं निकलता देख दोनों ही सियासी धड़े अपने खेमों की मोर्चाबंदी में जुट गए। उच्चतम न्यायालय सोमवार सुबर 10.30 बजे फिर से इस मामले की सुनवाई करेगा जिसमें कोई ठोस निर्देश आने की संभावना जताई जा रही है।

शनिवार सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले देवेंद्र फडणवीस ने अपनी पार्टी एवं समर्थक दलों के विधायकों से चर्चा में लगे रहे। वह अपने पाले में अधिक से अधिक विधायकों को लाने की कोशिश कर रहे हैं। मौजूदा हालात पर चर्चा के लिए शाम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निर्वाचित विधायकों की बैठक भी हुई। इस बैठक में फडणवीस के अलावा राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटील और केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे भी मौजूद रहे।

बहुमत का आंकड़ा जुटाने के सवाल पर भाजपा के नेताओं ने दावा कि फडणवीस विधानसभा में आसानी से बहुमत साबित कर देंगे। विधानसभा चुनाव के गत अक्टूबर में आए नतीजों में भाजपा 105 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन बहुमत के लिए 145 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। फडणवीस ने एक दिन पहले अचानक ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सबको अचरज में डाल दिया था। फडणवीस ने शुक्रवार रात को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अजित पवार की अगुआई वाले 54 विधायकों के समर्थन का दावा राज्यपाल के समक्ष किया और रातोरात महाराष्ट्र में लागू राष्ट्रपति शासन को हटाकर सुबह होते-होते शपथ ग्रहण भी करा दिया गया। इस समर्थन के एवज में अजित पवार को उप मुख्यमंत्री पद दिया गया है।

हालांकि राकांपा के अध्यक्ष शरद पवार ने अजित पवार के इस कदम को अपना समर्थन नहीं होने की बात कर पूरे मामले को नाटकीय मोड़ दे दिया है। कल शाम की तरह आज भी राकांपा के विधायकों के साथ उन्होंने होटल में जाकर बैठक की। इस बैठक में अपने 54 में से 50 विधायकों के मौजूद रहने का राकांपा ने दावा किया है। इस तरह अजित पवार काफी अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं। राकांपा ने अपने गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान किया हुआ है।

शिवसेना का भाजपा के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन था लेकिन मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी को लेकर यह गठबंधन टूट गया। उसके बाद ही शिवसेना और राकांपा-कांग्रेस के नए गठजोड़ की सरकार बनने की चर्चाएं तेज हुईं। इन दलों का कहना है कि भाजपा ने किसी भी कीमत पर सरकार बनाने के लिए रात के अंधेरे में सरकार बनाई है। 

इस बीच तीनों ही दल अपने-अपने विधायकों के विरोधी खेमे में जाने से रोकने की कोशिश में लगे हुए हैं। उन्होंने अपने विधायकों को अलग-अलग होटलों में रखा हुआ है और वहां पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि विरोधी खेमे का कोई व्यक्ति उनसे संपर्क न कर सके। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और राकांपा प्रमुख शरद पवार ने अपने-अपने विधायकों से आज भी चर्चा की। विधायकों के होटल पर निगरानी रखने के काम में शिवसेना काफी सक्रिय दिख रही है। वह अपने विधायकों के अलावा नए सहयोगियों के विधायकों की आवाजाही पर भी नजर रखे हुए है।

शिवसेना के 56 विधायकों को होटल ललित, राकांपा के विधायकों को होटल रेनेसां और कांग्रेस के 44 विधायकों ने जे डब्ल्यू मैरियट होटल में ठहराया गया है। दरअसल बहुमत परीक्षण में अभी दो-तीन दिन का समय रहने से इन दलों में अपने विधायकों की टूट-फूट का डर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय अगर फडणवीस को 24 घंटे में बहुमत साबित करने का आदेश दे देता है, तब भी यह प्रक्रिया पूरी होने में दो-तीन दिन तो लग ही जाएंगे। 

असल में, नवनिर्वाचित विधायकों ने अभी तक शपथ भी नहीं ली हुई है। लिहाजा पहले प्रोटेम स्पीकर उन्हें शपथ दिलाएंगे और उसके बाद विधानसभा स्पीकर का निर्वाचन किया जाएगा। स्पीकर ही बहुमत परीक्षण की कार्यवाही का संचालन करेंगे। बहुमत परीक्षण के दौरान काफी कुछ इस पर भी निर्भर करेगा कि विधानसभा स्पीकर राकांपा विधायक दल के नेता के रूप में अजित पवार को मान्यता देते हैं या नहीं।

यूं तो राकांपा विधायकों की शनिवार शाम हुई बैठक में अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाकर उनके स्थान पर जयंत पाटील को अंतरिम नेता बनाया गया है। लेकिन अगर स्पीकर ने सरकार बनाने के समय विधायक दल के नेता रहे अजित पवार को ही पार्टी नेता के रूप में मान्यता दी तो वह अपने विधायकों को अपने निर्देश के मुताबिक मत देने का व्हिप जारी कर सकेंगे। इस लिहाज से स्पीकर पद का चुनाव दोनों सियासी धड़ों के लिए पहली बड़ी चुनौती होगी। 

इस बीच अजित पवार ने रविवार को एक के बाद एक कई ट्वीट कर खुद को अब भी राकांपा का सदस्य बताया। उन्होंने अपने चाचा शरद पवार को अपना नेता बताते हुए कहा, 'मैं हमेशा ही राकांपा का हिस्सा रहूंगा। हमारा भाजपा-राकांपा गठबंधन महाराष्ट्र में अगले पांच वर्षों तक स्थिर सरकार देगा। घबराने की कोई बात नहीं है, सब ठीक है। बस हमें थोड़ा सब्र रखने की जरूरत है। आप सबके सहयोग के लिए शुक्रिया।' हालांकि शरद पवार ने फौरन ही इसका कड़ा जवाब देते हुए कहा कि भाजपा के साथ राकांपा के गठबंधन का कोई सवाल ही नहीं है। पवार ने अपने ट्वीट में कहा, 'राकांपा ने सर्वसम्मति से तय किया है कि हम शिवसेना एवं कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे। अजित पवार का बयान गलत होने के साथ ही लोगों के बीच भ्रम एवं गलत धारणा फैलाने वाला है।'
Keyword: maharashtra, BJP, shivsena, congress, NCP, court,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दूरसंचार कंपनियों को मिलनी चाहिए भुगतान से राहत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.