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ध्यान से अपनाइए ये उपाय ताकि आपकी पहचान कोई नहीं चुरा पाए

विदिशा सारंग /  November 24, 2019

छत्तीसगढ़ के 69 वर्षीय अमिताभ कुमार उस वक्त स्तब्ध रह गए जब उन्हें आयकर विभाग से नोटिस मिला था जिसमें कहा गया था कि उन्होंने वित्त वर्ष 2011-12 की टैक्स फाइलिंग में 70 लाख रुपये के एक ट्रांजेक्शन को छिपाया। इससे हैरत में पड़े कुमार (अनुरोध पर नाम बदला हुआ) कहते हैं, 'मैंने यह लेनदेन नहीं किया था, और मेरे डीमैट खाते से जुड़े बैंक खाते में भी मुश्किल से ही कोई राशि बची हुई थी। मेरे ब्रोकर ने बताया कि यह लेनदेन मेरे खाते के जरिये हुआ और मुनाफा किसी अन्य खाते में स्थानांतरित कर दिया गया था। इस मामले की जांच हो रही है।' उन्हें बताया गया कि शेयरों की खरीद-बिक्री करने और अच्छा मुनाफा कमाने के लिए किसी ने उनका पैन और डीमैट खाता इस्तेमाल किया।

 
आईडेंटिटी थेफ्ट यानी पहचान चोरी सामान्य हो गई है। सुरक्षा समाधान मुहैया करने वाली कंपनी 'सिक्योरिटीज' के अनुसार, भारत में हर मिनट लगभग 19 लोग पहचान चोरी के शिकार होते हैं। साइबर विश्लेषक रितेश भाटिया कहते हैं, 'पहचान चोरी वित्तीय लाभ हासिल करने या धोखाधड़ी करने के लिए किसी की व्यक्तिगत जानकारी का जान-बूझकर या अनधिकृत इस्तेमाल है। ऑनलाइन पहचान चोरी में सोशल मीडिया अकाउंट बनाना, क्रेडिट और डेबिट कार्ड की क्लोनिंग करना, और दूसरों के नाम पर सिम कार्ड प्राप्त करना शामिल हैं।' संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि कोई आपकी पहचान धोखे से चुराता है, आपका डेटा या दस्तावेज चुराता है, और आपको मिलने वाला वित्तीय लाभ स्वयं हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल करता है।
 
ऑनलाइन पहचान चोरी के कुछ सामान्य तरीके हैं फिशिंग, हैकिंग, स्किमिंग, डिवाइस में मालवेयर फैलाना आदि। जब बात वित्तीय चोरी की हो तो धोखेबाज आपके बचत खाते में पड़ी रकम चुरा सकता है। रकम चुराने का अन्य तरीका क्रेडिट कार्ड या ऋण जैसे आपके खातों के जरिये रकम उड़ाना है।
 
कैसे जानें कि आप शिकार बन गए हैं
 
एक्सपेरियन इंडिया में कंट्री हेड एवं प्रबंध निदेशक सत्या कल्याणसुंदरम कहते हैं, 'कई तरीके हैं जिनके जरिये धोखेबाज पहचान चुराते हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।' जब बात बचत खातों में रकम की हो तो यह आवश्यक है कि अपने बैंक एसएमएस अलर्ट और ईमेल अलर्ट की अनदेखी न करें। इससे आप सही समय पर बचत खाते में हुई गतिविधि का पता लगाने में सक्षम होंगे। बैंक स्टेटमेंट में सिर्फ बड़ी राशि के लेनदेन पर ही ध्यान न दें बल्कि छोटी मात्रा की किसी निकासी पर भी ध्यान दें। यदि आप कोई अज्ञात शुल्क (बड़ा या छोटा) कटा हुआ देखते हैं तो बैंक को तुरंत इसकी जानकारी दें। वहीं क्रेडिट कार्ड के संदर्भ में अपने कार्ड स्टेटमेंट में किसी तरह की संदिग्ध खरीदारी पर नजर रखें। यदि स्टेटमेंट में कुछ गलत दिखे तो बैंक को इसकी जानकारी दें और कार्ड को तुरंत ब्लॉक कराएं।
 
जहां तक क्रेडिट कार्ड और ऋणों जैसे खातों का सवाल है तो सभी जानकारी और लेनदेन क्रेडिट रिपोर्ट में शामिल होता है। ट्रांसयूनियन सिबिल में डायरेक्ट टु कंज्यूमर (डीटीसी) इंटरेक्टिव डिवीजन के उपाध्यक्ष एवं प्रमुख सुजाता अहलावत का कहना है, 'अपनी क्रेडिट रिपोर्ट अच्छी तरह से देखें। यह देख लें कि इसमें कहीं कोई गलत एंट्री तो नहीं है।' संक्षेप में, आंकड़ों में किसी तरह की गडबड़ी की जांच करें। उदाहरण के लिए, एड्रेस चेंज का कोई अनुरोध तो नहीं किया गया? या क्र्रेडिट कार्ड आपके नाम जारी किया गया, जिसके बारे में आपको पता नहीं? या कंज्यूमर लोन लेने की कोई कोशिश की गई?
 
उन बिलों को गंभीरता से लें जो आपको उन सेवाओं के लिए भेजे गए हों तो आपने नहीं ली हों। यदि आपको बैंक या सेवा प्रदाता से कोई वेरिफिकेशन कॉल आता है तो सतर्क रहें। धोखेबाज बैंकर या सेवा प्रदाता होने का बहाना कर आपसे बात कर सकता है, इसलिए स्वयं बैंक के कॉल सेंटर पर कॉल करें या आई हुई फोन कॉल पर संवेदनशील जानकारी देने के बजाय बैंक का दौरा करें। संवेदनशील जानकारी का मतलब है आपका कस्टमर आईडी, आईपिन, क्रेडिट/डेबिट कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट, ओटीपी, आधार, पैन, सीवीवी नंबर आदि।
 
क्या करें 
 
यदि आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में ऐसी गतिविधि का पता चलता है तो आपने नहीं की हो तो शिकायत करें। अहलावत का कहना है, 'आप हमारे पोर्टल पर भी शिकायत कर सकते हैं। हम आपकी समस्या को उपभोक्ता की ओर से स्वयं बैंक के साथ उठाएंगे। बैंक को भी जानकारी दें।' एक्सपेरियन के साथ भी यह समस्या उठा सकते हैं। बैंक या तो इसकी पुष्टिï करेगा कि क्रेडिट ब्यूरो को दी गई जानकारी सही है और ऐसे मामले में ब्यूरो इसके बारे में उपभोक्ता को सूचित करता है। या बैंक डेटा को सुधारता है और ब्यूरो को इसकी जानकारी देता है। इसके बाद ब्यूरो ग्राहक को इसके बारे में सूचित करता है। विवादित मामले के बारे में सभी पक्षों से संपर्क बनाए रखें। इसके अलावा साइबर पुलिस को भी जानकारी दें।
 
इलाज से बेहतर रोकथाम
 
ऐसे कई उपाय हैं जो आप स्वयं को सुरक्षित बनाने के लिए कर सकते हैं। भाटिया का कहना है, 'पीओएस डिवाइस और एटीएम पर पिन डालते वक्त इसे दूसरों से छिपाएं। इस्तेमाल के बाद सभी खातों को लॉग आउट करें। यदि आप लैपटॉप या पीसी का भी इस्तेमाल करते हैं तो इस्तेमाल नहीं होने पर उन्हें लॉक स्क्रीन रखें। पहचान के प्रूफ की डिजिटल कॉपी ज्यादा जगह स्टोर करके न रखें। मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के साथ मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें।' निजी जानकारी साझा नहीं करने की नीति बना लें। फोन या ईमेल पर अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कभी न करें। यदि आपका मोबाइल नंबर लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है तो अपने मोबाइल ऑपरेटर को फोन कर इसका कारण जानें। लंबे समय तक आपके मोबाइल पर सेवा उपलब्ध नहीं होने से संभावित सिम स्वैप का खतरा बढ़ सकता है। कई बैंक संपूरक कार्ड सुरक्षा सेवाएं प्रदान करते हैं। यह सेवा फ्रॉड प्रोटेक्ट फीचर के साथ पेश की जाती है जिसमें कार्ड को खो जाने की स्थिति में गलत इस्तेमाल से सुरक्षित रखा जाता है। इस फीचर के तहत आपकी सुरक्षा नुकसान की रिपोर्ट आने से सात दिन पहले ही शुरू हो जाती है। आप ऐसी साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी भी खरीद सकते हैं जो ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ सुरक्षा मुहैया कराती हो। साइबर सुरक्षा को गंभीरता से लें, क्योंकि लापरवाही बरतने से आप आसानी से शिकार बन सकते हैं। 
Keyword: data, fraud, income tax,,
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