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वैश्विक कीमतों में नरमी से सीआईएल पर दबाव

उज्ज्वल जौहरी /  November 24, 2019

प्रमुख सूचकांकों की तुलना में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का शेयर अपने जून के ऊंचे स्तर से 24 प्रतिशत तक कमजोर हुआ है। बिक्री वृद्घि से जुड़ी चिंताओं, अंतरराष्ट्रीय कोयला कीमतों में गिरावट, ई-नीलामी प्राप्तियों में कमी से निवेशक धारणा प्रभावित हुई है और इसकी वजह से शेयर के प्रदर्शन पर भी नकारात्मक असर दिखा है। कॉरपोरेट कर दर में ताजा कटौती से मिली मदद भी सीआईएल के शेयर के लिए मजबूती प्रदान करने में नाकाम रही है, क्योंकि कंपनी का संशोधित मुनाफा अनुमान अभी भी वित्त वर्ष 2019-21 की अवधि के लिए मजबूत आय वृद्घि का संकेत नहीं दे रहा है। बाजार इसे लेकर भी आशंकित है कि कम कॉरपोरेट कर राजस्व की पूर्ति के प्रयास में सरकार सीआईएल जैसी कई सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया में तेजी ला सकती है। हालांकि यदि हिस्सेदारी बिक्री नहीं भी होती है तो बुनियादी आधार को लेकर कई चिंताएं हैं जिनसे शेयर पर दबाव पड़ सकता है।

 
कोल इंडिया के लिए बिक्री से संबंधित चिंताएं पूरे वित्त वर्ष के दौरान बनी रहीं। पहले सात महीनों में बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 7 प्रतिशत तक की कमी आई जिसके लिए विश्लेषक कंपनी की प्रमुख सहायक कंपनियों साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (एसईसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स (एमसीएल) में उत्पादन से जुड़ी ताजा समस्या को जिम्मेदार मान रहे हैं।  एक साल पहले की समान तिमाही के साथ तुलना के आधार पर सितंबर तिमाही के दौरान सालाना आधार पर बिक्री में 11 प्रतिशत की गिरावट से राजस्व में 7 प्रतिशत की कमी को बढ़ावा मिला। 
 
जहां विश्लेषकों को बिक्री में तेजी आने का अनुमान है, क्योंकि मॉनसून से पैदा हुई समस्या अब दूर हो रही है, लेकिन कई विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2020 के लिए अपने बिक्री अनुमानों में कटौती की है। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों को जहां वित्त वर्ष 2020 के शेष पांच महीनों में बिक्री वृद्घि में सुधार की उम्मीद है, वहीं उन्हें वित्त वर्ष 2020 के लिए बिक्री 61 करोड़ टन पर सपाट बने रहने की आशंका है। वित्त वर्ष 2020 के लिए अपने अनुमानों को घटाकर 60 करोड़ टन कर चुकी आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने वित्त वर्ष 2021 के बिक्री अनुमानों को 65 करोड़ टन से घटाकर 62.5 करोड़ टन कर दिया है। सीआईएल ने वित्त वर्ष 2019 के दौरान बिक्री में 60.9 करोड़ टन का उठाव दर्ज किया, जिसे देखते हुए चालू वित्त वर्ष में उसका प्रदर्शन सुस्त रहने का अनुमान है।
 
ताप विद्युत संयंत्रों से कम जरूरतों के साथ यदि आप देश की कमजोर विद्युत मांग की वजह से कुल कोयला मांग में नरमी देखते हैं तो ये चिंताएं बरकरार रह सकती हैं।  इससे चिंताएं बढ़ी हैं, क्योंकि पिछले साल की दूसरी छमाही में विद्युत क्षेत्र की मांग बढ़ी थी, जिससे सीआईएल की बिक्री और साथ ही ई-नीलामी कीमतों को ताकत मिली थी। हालांकि गैर-विद्युत क्षेत्र के खरीदारों को ज्यादा बिक्री लाभदायक है, लेकिन मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आ रही नरमी से ई-नीलामी कीमतें घट रही हैं। सितंबर तिमाही के दौरान, जहां ईंधन आपूर्ति समझौतों (एफएसए) पर आधारित विद्युत संयंत्रों के लिए कोयला बिक्री सालाना आधार पर 12 प्रतिशत घटकर 10.4 करोड़ टन रह गई, वहीं ई-नीलामी में बिक्री 30 प्रतिशत बढ़कर 1.55 करोड़ टन पर दर्ज की गई। 
 
लेकिन बाजार-आधारित ई-नीलामी प्राप्तियां सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत (तिमाही आधार पर 6 प्रतिशत कम) तक घटकर 2,019 रुपये प्रति टन रह गईं, जिससे ऊंची बिक्री से मिलने वाला लाभ सीमित हो गया। इस बीच, सरकार खनन के लिए त्वरित कोयला खदान नीलामियों की भी कोशिश कर रही है। इससे इसे लेकर चिंता बढ़ी है कि कोल इंडिया को निती क्षेत्र के खनिकों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत का सीमित प्रभाव होगा, क्योंकि नई खदानों से विकास गतिविधि में सुधार लाने में समय लगता है। एकमात्र सकारात्मक बात यह है कि गिरावट ने इस शेयर का मूल्यांकन आकर्षक बना दिया है। इलारा कैपिटल के रूपेश सांखे का कहना है कि 5 प्रतिशत का लाभांश प्रतिफल शेयर के लिए गिरावट सीमित कर सकता है।
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