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वित्तीय सेवा प्रदाताओं के लिए ऋण समाधान के नए नियम

सुदीप्त दे /  November 24, 2019

सरकार वित्तीय सेवा प्रदाताओं (एफएसपी) में व्याप्त वित्तीय तनाव को एक सुगठित ऋणशोधन एवं तरलता प्रक्रिया के जरिये दूर करने के लिए एक अंतरिम प्रारूप लेकर आई है। विशेषज्ञ कर्ज के बोझ से दबी वित्तीय इकाइयों के लिए तय दिवालिया नियमों के निहितार्थ समझाने की कोशिश कर रहे हैं। इस लेख में हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि एफएसपी के लिए दिवालिया प्रक्रिया विनिर्माण या सेवा कंपनियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया से कितनी अलग होगी?

 
एफएसपी के लिए अलग दिवालिया प्रावधान तय करने की जरूरत क्यों महसूस हुई?
 
वित्तीय सेवा इकाइयों, अमूमन बैंकों, के ऋणदाताओं का प्रोफाइल विनिर्माण या सेवा इकाइयों के कर्जदाताओं से अलग होता है। उनका वित्तीय ऋणदाता होना जरूरी नहीं होता है और वे पूंजी के खुदरा प्रदाताओं या सरकार की प्रत्ययी जमा से कर्ज लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय सेवा प्रदाताओं के लिए एक अलग दिवालिया प्रारूप खुदरा निवेशकों के हितों को संरक्षित रखने और व्यवस्थागत कारणों की वजह से जरूरी है। साइरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर एल विश्वनाथन कहते हैं, 'वित्तीय फर्मों के ऋण समाधान के लिए वित्तीय क्षेत्र के नियामकों की करीबी संलिप्तता जरूरी है ताकि जमाकर्ता के हितों को सुरक्षित रखने के साथ ही वित्तीय फर्मों की अंतर्संबद्धता से जुड़े मसलों का भी निपटारा किया जा सके।' ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) को एफएसपी नियमों के जरिये समुचित ढंग से संशोधित किया गया है। विश्वनाथन के मुताबिक, संशोधन का मकसद यह है कि नियामक-चालित एवं ऋणदाताओं की संलिप्तता वाले समाधानों को अधिकरण की अनुमति की शुद्धता के साथ मंजूरी दी जा सके। वित्तीय सेवा फर्म ईवाई के पार्टनर एवं राष्ट्रीय प्रमुख अबिजर दीवानजी कहते हैं, 'वित्तीय संस्थान आम तौर पर प्रत्ययी कारोबार से जुड़े होते हैं लिहाजा अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।'
 
बैंकों को अंतरिम व्यवस्था की परिधि से बाहर क्यों रखा गया है?
 
यह प्रारूप बैंकों पर लागू नहीं किया गया है। बैंकों का नियमन बैंकिंग नियमन अधिनियम 1949 के तहत होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों में तनाव दूर करने के लिए एक सक्षमकारी व्यवस्था का प्रावधान करता है। सरकार भी संसद में एक बार फिर वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक (एफआरडीआई) लाने के बारे में सोच रही है जिसमें बैंक जमा को सुरक्षित रखने के समुचित सुरक्षा प्रावधान होंगे। आम तौर पर मान्य नजरिया यही है कि भारतीय रिजर्व बैंक को बैंकिंग प्रणाली में वित्तीय तनाव से सीधे निपटना चाहिए।
 
एफएसपी के लिए ऋण समाधान प्रक्रिया शुरू करना कॉर्पोरेट जगत के लोगों, सीमित दायित्व वाली भागीदारी और साझेदारी फर्मों के लिए तय प्रक्रिया से किस तरह अलग है?
 
एफएसपी नियमों के तहत केवल समुचित नियामक ही समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसके पहले नियामक ऐसी फर्मों के समाधान के व्यवस्थागत प्रभावों और व्यापक वित्तीय प्रणाली पर इसके असर को ध्यान में रखेगा। यह विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र की फर्मों के लिए निर्धारित आईबीसी प्रावधानों से काफी बड़ा फर्क है। उन फर्मों के खिलाफ ऋण समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति वित्तीय एवं परिचालक कर्जदाताओं को मिली हुई है।
 
एफएसपी के लिए घोषित ऋण समाधान एवं तरलता प्रारूप में नियामक, कर्जदाता और निर्णायक प्राधिकरण की क्या भूमिका है?
 
एफएसपी नियम नियामक, ऋणदाताओं एवं निर्णायक प्राधिकरण (एनसीएलटी) के लिए अलग मगर पूरक भूमिकाएं तय करते हैं। यह नियम समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए समुचित नियामक की जरूरत बताता है जो व्यक्तिगत ऋणदाताओं के समाधान पहल से जुदा है। विश्वनाथन कहते हैं, 'दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की चाबी नियामकों के पास रहने से एफएसपी की अड़चनें भी कम हो जाएंगी।' जानकारों का कहना है कि एफएसपी नियमों के तहत नियामक का समाधान प्रक्रिया से अधिक जुड़ाव हो गया है। नियामक समाधान प्रक्रिया के दौरान एफएसपी के परिचालन पर नजर रखने के लिए एक प्रशासक नियुक्त करता है। एफएसपी के संचालन में मदद के लिए प्रशासक की सलाहकार समिति के गठन का भी प्रावधान रखा गया है। ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) को केंद्रीय भूमिका दिए जाने के बाद समाधान योजना लागू होने के लिए उनकी अनुमति  मिलनी जरूरी है। हालांकि इस मंजूरी के साथ नियामक का अनापत्ति पत्र भी होना चाहिए। दीवानजी कहते हैं कि एफएसपी नियमों के तहत सीओसी से कहीं बेहतर नियंत्रण नियामक का है। वित्तीय फर्मों के समाधान की प्रक्रिया जल्द पूरी होने की अनिवार्यता को देखते हुए 'डीम्ड' अनापत्ति पत्र की संकल्पना पेश की गई है। विश्वनाथन के मुताबिक, समुचित नियामक के समक्ष आवेदन करने के 45 दिनों के भीतर 'डीम्ड' अनापत्ति बनानी होगी। 
 
इस प्रक्रिया से मुकदमेबाजी रोकने में कैसे मदद मिलेगी?
 
विशेषज्ञ कहते हैं कि एफएसपी नियमों में एक अंतरिम ऋण-स्थगन का उल्लेख किया गया है जो समाधान की अर्जी लगाने के समय की तमाम प्रक्रियाओं से बचाने के लिए अहम है। एलऐंडएल पार्टनर्स के पार्टनर करण मिटरू कहते हैं, 'खुद नियामक समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकता है या प्रक्रिया की शुरुआत के लिए उसकी रजामंदी जरूरी है, लिहाजा अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचा जाना चाहिए।'
 
अधिक स्पष्टता की जरूरत वाले कमजोर बिंदु कौन से हैं?
 
सलाहकार समिति की भूमिका से संबंधित एफएसपी नियम नियामकों द्वारा जारी किए जाने हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऋणदाता  समिति के संयोजन और एफएसपी के वित्तीय ऋणदाताओं एवं विभिन्न परिचालकों की शक्तियों को लेकर कई अनुत्तरित सवाल हैं। सरकार ने अभी तक इस नियम के दायरे में आने वाले एफएसपी की श्रेणी को लेकर अधिसूचना नहीं जारी की है। 
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