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नरम इस्पात से पाइप क्षेत्र को मदद

दिलीप कुमार झा / मुंबई November 24, 2019

इस्पात कीमतों में आई भारी गिरावट और सरकार द्वारा जल, तेल एवं गैस की ढुलाई के लिए बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर जोर दिए जाने के बाद ऑर्डरों में आई तेजी से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में इस्पात पाइप निर्माताओं का मुनाफा मार्जिन बढऩे की संभावना है। इस्पात और अन्य तरह के पाइप तथा सहायक उत्पादों का निर्माण करने वाली कंपनियों ने पिछली चार तिमाहियों के दौरान अपने मुनाफा मार्जिन में मजबूत सुधार दर्ज किया है। लगभग आधा दर्जन उत्पादकों ने वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में 4.6 प्रतिशत का कुल मुनाफा मार्जिन दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान दो प्रतिशत था। विश्लेषकों को दूसरी तिमाही में भी मार्जिन में सुधार का अनुमान है।
 
एडलवाइस रिसर्च की एक रिपोर्ट में हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) और इस्पात के कच्चे माल की कीमतों में 20-25 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया गया है। चूंकि इस्पात पाइप निर्माता अपने उत्पाद मुख्य रूप से 9-12 महीनों की डिलिवरी के लिए दीर्घावधि अनुबंध के तहत बेचते हैं, इसलिए उनके लिए इस्पात कीमतों में गिरावट का लाभ मिलेगा। मैन इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक आर सी मनसुखानी ने कहा, 'तेल एवं गैस के उत्पादन में सुधार आने से बढ़ती उपभोक्ता मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी जिससे पाइप निर्माण क्षेत्र के लिए परिदृश्य मजबूत दिख रहा है। सरकार ने जल क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया है जिससे विकास के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा हुआ है। जरूरी दक्षता और क्षमता के साथ हम इस अवसर का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।'
 
मैन इंडस्ट्रीज, जिंदल सॉ, सूर्या रोशनी जैसी कंपनियों ने पिछले तीन महीनों में जल, तेल एवं गैस क्षेत्र के अपने ग्राहकों से ऑर्डरों में 30 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की है। 50,000 करोड़ रुपये के इस्पात पाइप उद्योग का भारत के 10 करोड़ टन इस्पात उत्पादन में लगभग आठ प्रतिशत का योगदान है। क्रिसिल की रिपोर्ट में जल आपूर्ति, सिंचाई और स्वच्छता परियोजनाओं में सरकार के बढ़ते निवेश की वजह से वर्ष 2024 तक इस्पात पाइप मांग में 7-8 प्रतिशत की वृद्घि का अनुमान जताया गया है। साथ ही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पाइप का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। उद्योग के सूत्रों के अनुसार सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत जल, सिंचाई, स्वच्छता तेल एवं गैस क्षेत्रों पर वर्ष 2024 तक 130,000 करोड़ रुपये का खर्च करने की योजना बनाई है। 'नल से जल' और 'नदी जोड़ परियोजनाओं' पर सरकार द्वारा ध्यान केंद्रित किए जाने से तेल एवं गैस के अलावा तल क्षेत्र में भी संभावना बढ़ी है। अगले 15 वर्षों के दौरान जल ढांचे पर 270 अरब डॉलर का कुल निवेश होने का अनुमान है।
 
जिंदल सॉ के सहायक उपाध्यक्ष राजीव गोयल का मानना है कि तेल एवं गैस क्षेत्र से मांग मजबूत है और सरकार के जलशक्ति मिशन से जल आपूर्ति तथा स्वच्छता परियोजनाओं को वृद्घि का नया वाहक समझा जा रहा है। अच्छी मांग से पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र के क्षमता इस्तेमाल में सुधार आया है। 
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