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ब्रोकरों पर कसेगा शिकंजा!

ग्राहकों के पैसे के दुरुपयोग के मामले में सेबी के निशाने पर ब्रोकर
श्रीमी चौधरी और समी मोडक / नई दिल्ली 11 24, 2019

ग्राहकों का अटका पैसा
►  ब्रोकरों को ग्राहकों की प्रतिभूतियों पर मिलती है पावर ऑफ अटॉर्नी
►  ब्रोकरों ने इसका इस्तेमाल अपनी ट्रेडिंग करने या अन्य ग्राहकों का मार्जिन चुकाने में किया
►  कुछ ने इसका एनबीएफसी से पैसा उधार लेने में भी इस्तेमाल किया, पैसा अन्य कारोबार में लगा दिया
►  सेबी ने जून में ग्राहकों के फंड के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था
►  ग्राहकों का पैसा लौटाने के लिए 31 अगस्त तय की गई थी अंतिम तिथि
►  कुछ ब्रोकरों ने अब भी ब्रोकरों के शेयर नहीं लौटाए

बिजनेस स्टैंडर्ड ब्रोकरों पर कसेगा शिकंजा!कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के बाद अब ऐसे कई और ब्रोकर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निशाने पर आ गए हैं, जो ग्राहकों के शेयरों का इस्तेमाल करने की गतिविधि में लिप्त हैं। सूत्रों ने बताया कि यह मुद्दा केवल कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग तक ही सीमित नहीं है। ग्राहकों के 10,000 करोड़ रुपये के फंड का दुरुपयोग करने को लेकर तीन दर्जन से अधिक और ब्रोकर सेबी के निशाने पर हैं। इस मामले का तब खुलासा हुआ, जब बहुत से ब्रोकर ग्राहकों का पैसा लौटाने के लिए सेबी द्वारा तय अंतिम तिथि 31 अगस्त तक पैसा नहीं लौटा पाए। 

बाजार से जुड़े लोगों ने कहा कि अगर ये ब्रोकर अपने ग्राहकों का पैसा नहीं लौटा पाए या उन्हें खुद के कारोबार में घाटा हुआ है तो यह मुद्दा बड़ी समस्या बन सकता है। सेबी ने शुक्रवार को ग्राहकों की प्रतिभूतियों का कथित दुरुपयोग करने के कारण कार्वी पर प्रतिबंध लगा दिया था। सूत्रों ने कहा कि सेबी फिलहाल ऐसे कई ब्रोकरों के खातों की जांच-पड़ताल कर रहा है, जिन्होंने अन्य ग्राहक की देनदारी पूरी करने के लिए ग्राहक के पैसे का इस्तेमाल किया या अन्य ग्राहकों की मार्जिन जरूरत पूरी करने या खुद की देनदारी पूरी करने के लिए ग्राहकों के पैसे को बैंकों के पास गिरवी रख दिया। कुछ ब्रोकरों की रियल एस्टेट जैसे इतर कारोबार में पैसा स्थानांतरित करने के संदेह की भी जांच की गई है। 

कुछ मामलों में ग्राहकों ने अपने कारोबारी खाते में लंबे समय से कोई लेनदेन न होने के बावजूद प्रतिभूतियां वापस नहीं लीं। यह इस बात का संकेत है कि इन्हें ऊंची ब्याज दर की उम्मीद में ब्रोकरों को ऋण के रूप में दिया गया।  सूत्रों ने कहा, 'इस मुद्दे को संभलकर सुलझाने की जरूरत है क्योंकि हंगामे से बचने और शांत रहने वाले निवेशकों की संपत्ति दांंव पर लगी हुई है।' हाल तक ब्रोकरों का अपने ग्राहकों की प्रतिभूतियों का इस्तेमाल दूसरे ग्राहक के कारोबार के लिए गिरवी रखने या खुद कारोबार करने में इस्तेमाल करना आम था। कुछ ब्रोकर ग्राहकों के पड़े हुए शेयरों को पूंजी जुटाने के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पास गिरवी रख देते थे। ब्रोकरों ने ऐसे लेनदेन के लिए तथाकथित 'स्टॉक ब्रोकर-क्लाइंट अकाउंट' बना लिए थे। सेबी ने जून में ऐसी गतिविधियों पर चाबुक चलाया था। नियामक ने सभी ब्रोकरों को ऐसे खाते बंद करने का निर्देश दिया। 

सेबी ने सभी ब्रोकरों से कहा था कि वे ग्राहकों के धन को गिरवी मुफ्त कर लौटाएं। उद्योग से जुड़े लोगों  ने कहा कि यह कदम बहुत से ब्रोकरों के लिए तगड़ा झटका था, जो ऐसी गतिविधियों में गले तक धंसे हुए थे और तीन महीने की समयसीमा में अपने पोजिशनों को समेट नहीं सकते थे। यह गतिविधि धडल्ले से चल रही थी क्योंकि ब्रोकरों को अपने ग्राहकों के डीमैट खातों की पावर ऑफ अटॉर्नी मिली हुई थी और वे ग्राहकों की प्रतिभूतियों को कॉलेटरल खाते में हस्तांतरित करने के लिए अधिकृत थे। 

चुरीवाला सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक आलोक चुरीवाला ने कहा, 'जून में नया नियम लागू होने तक ब्रोकिंग उद्योग में ग्राहकों के फंड का इस्तेमाल आम था। यह समझा जाना चाहिए कि किसी भी लेनदेन में समय लगता है और इसमें जल्दबाजी के लिए बाध्य किए जाने से व्यवधान पैदा हो सकता है। इसके बावजूद यह समस्या बहुत गहरी है। इसके नतीजतन हम देख चुके हैं कि बहुत से ब्रोकर डिफॉल्ट कर रहे हैं या समय पर अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं कर पा रहे हैं। संभवतया इस मुद्दे को हल करने के लिए गंभीरता से पुनर्विचार करने की जरूरत है।'

नए नियमों में कहा गया है कि प्रतिभूति से मिलने वाली रकम को सीधे पूल अकाउंट से कॉलेटरल डीमैट अकाउंट में हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है। इसके बजाय इसे सबसे पहले संबंधित ग्राहक के डीमैट खाते में हस्तांतरित करना होगा ताकि ऐसे कॉलेटरल सृजन को ग्राहक की मंजूरी हो। पिछले सप्ताह इस मुद्दे पर सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा, 'हमने नियमों में बदलाव किया है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ब्रोकर ग्राहकों के फंड का उचित इस्तेमाल करें। इस दिशा में काफी काम किया जा चुका है और कुछ और कदम उठाए जाएंगे।' 

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ब्रोकरों के लिए नियमों में हाल में किए गए बदलावों से कुछ के लिए मुश्किलें पैदा हुई हैं। उद्योग से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, 'सेबी की पहल जरूरी थी। लेकिन अप्रत्याशित नतीजों को लेकर उचित विचार नहीं किया गया। पिछले पांच वर्षों से ब्रोकिंग कारोबार ढलान पर है। ऐसे में ज्यादातर ब्रोकर ग्राहकों के फंड का इस्तेमाल करके कमाई कर रहे थे। इस गतिविधि पर प्रतिबंध से कई ब्रोकर बुरी तरह प्रभावित होंगे। कुछ के ग्राहकों की देनदारी पूरी करने में नाकाम रहने के आसार हैं।'उनके मुताबिक नियामक ने जून के परिपत्र के असर का ठीक से आकलन नहीं किया। ऐसे कॉलेटरल की पहचान का तरीका ढूंढने के बाद भी ब्रोकर बैंकों से पैसा नहीं मिलने के कारण ग्राहकों के कॉलेटरल की जगह अपना पैसा नहीं डाल सकते थे।
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