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'ब्रांड गांगुली' का छिपा राज

सोहिनी दास /  November 22, 2019

बेपरवाह अंदाज के लिए जाने जाने वाले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौरभ गांगुली की बेपरवाही एक बार फिर उस समय चरम पर थी जब उन्होंने हाल में भारत और बांग्लादेश के एक मैच के दौरान ट्वीट किया, 'क्या टीम इंडिया जीत का सिलसिला जारी रखेगी या बांग्लादेश वापसी करेगा? बीट माई टीम ऑन ञ्चमाई11सर्कल ऐंड विन बिग। अभी अपनी टीम बनाइए।'

इस ट्वीट के साथ गांगुली ने अपनी टाइमलाइन में चिंगारी जला दी। बीसीसीआई प्रमुख एक ऐसे ब्रांड का प्रचार कैसे कर सकते हैं जो बोर्ड के आधिकारिक पार्टनर ड्रीम 11 का प्रतिद्वंद्वी हो? कई लोगों ने इसे हितों का टकराव बताया जबकि कुछ का कहना था कि उन्हें अपने पसंद के ब्रांड चुनने का अधिकार है।

गांगुली बेपरवाह थे। उन्होंने टेलीविजन संवाददाताओं से कहा कि लीग के लिए उनका समर्थन व्यक्तिगत मामला था और इसका बीसीसीआई प्रमुख पद से कोई लेनादेना नहीं है। गांगुली के लिए विवादों में पडऩा कोई नई बात नहीं है क्योंकि अपने लंबे क्रिकेट करियर के दौरान उनका विवादों से चोली दामन का साथ रहा। कोचों और कप्तानी के बारे में बेबाक राय से उन्होंने जितने लोगों को अपना मुरीद बनाया, उतने ही आलोचक भी बनाए।

खेल के दौरान उन्हें अपने व्यवहार के कारण सराहना और आलोचना दोनों मिली। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी वह अपनी बेबाकी के कारण लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उनका यह अंदाज और विवादों के साथ नाता उन्हें एक अनोखा ब्रांड बनाता है। यह ऐसा ब्रांड है जो महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली द्वारा बनाए गए खांचे में फिट नहीं बैठता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गांगुली ब्रांडों को अपने हिसाब से चलाते हैं।

उदाहरण के लिए उन्होंने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद लोकप्रिय बांग्ला गेम शो दादागीरी के मेजबान के रूप में अपनी स्वतंत्र छवि बनाई। इससे वह उन ब्रांडों के लिए आकर्षक बन गए जिनकी नजर पश्चिम बंगाल और राज्य के बाहर बांग्ला समुदाय के उपभोक्ताओं पर थी। यही वजह है कि वह सेंको गोल्ड ऐंड डायमंड्स का चेहरा हैं। पहले यह एक शहर और एक समुदाय तक ही सीमित था लेकिन गांगुली ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद की। गांगुली एसिलर (लेंस) और प्यूमा सहित कई ब्रांडों का प्रचार करते हैं। 

सलेब्रिटी मैनेजमेंट एजेंसी क्वान एंटरटेनमेंट ऐंड मार्केटिंग सॉल्यूशंस के संस्थापक पार्टनर और सह-मुख्य कार्याकारी इंद्रनील दास ब्ला कहते हैं कि ब्रांड ऐसे हर व्यक्ति को पंसद नहीं करते हैं जो विवादास्पद हो। लेकिन विवादास्पद और मुखर होने में फर्क है। उन्होंने कहा, 'गांगुली वास्तव में कभी भी विवादास्पद नहीं रहे हैं। वह मुखर हैं और बेबाकी से अपनी राय रखते हैं। ब्रांड ऐसा चेहरा पसंद करते हैं जो प्रासंगिक हो। बीसीसीआई अध्यक्ष के नाते वह फिर सुर्खियों में हैं और बहुत प्रासंगिक हैं।'

गांगुली ने क्रिकेट के प्रति अपने भावनात्मक लगाव का हमेशा खुलकर इजहार किया है। उदाहरण के लिए जिस दिन उन्होंने आधिकारिक रूप से बीसीसीआई अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, उस दिन उन्होंने वहीं ब्लेजर पहना हुआ था जो उन्हें 19 साल पहले वर्ष 2000 में टीम इंडिया के कप्तान के रूप में दिया गया था। विज्ञापनदाताओं को ऐसे लोग पसंद आते हैं, खासकर अगर वे युवाओं को अपने ब्रांड की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

विज्ञापन जगत के दिग्गज और मोगी मीडिया संदीप गोयल कहते हैं कि गांगुली अपने लिए एक अलग पहचान बनाने में सफल रहे हैं। ब्रांड उन जैसे लोगों की तलाश में रहते हैं क्योंकि वे कहानी में अपनी संवेदनाएं लाते हैं। गोयल ने कहा कि बीसीसीआई प्रशासक के रूप में गांगुली और ज्यादा उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'कल के दिन वह मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं। मुझे लगता है कि उनका ब्रांड उत्पादों के प्रचार से बाहर निकल रहा है। वह किसी अन्य भारतीय क्रिकेटर की तुलना में ज्यादा बड़े ब्रांड हैं।' ब्ला भी मानते हैं कि गांगुली की प्रशासनिक भूमिका उन्हें ब्रांडों के लिए एक आकर्षक प्रचारक बनाती है। उन्होंने कहा, 'बीसीसीआई के संविधान में कहीं नहीं लिखा गया है कि बोर्ड अध्यक्ष ब्रांडों का प्रचार नहीं कर सकता है। यह एक मानद पद है और इस पर बैठे व्यक्ति को वेतन नहीं मिलता है। अगर बीसीसीआई के मौजूदा ब्रांडों के साथ हितों का टकराव मामला नहीं है तो मुझे ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता है कि वह ब्रांडों का प्रचार नहीं कर सकते हैं।'

हालांकि गांगुली ने पहले भी हितों के टकराव के विवादों पर ध्यान नहीं दिया है। चाहे वह प्रतिद्वंद्वी लीग के प्रचार का मामला हो या एक साथ तीन पद संभालने का। वह क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी)  के अध्यक्ष, टीवी कमेंटेटर और आईपीएल की टीम दिल्ली कैपिटल्स के मेंटर थे। जब बीसीसीआई की नैतिक समिति ने उन्हें किसी एक पद चयन करने को कहा तो उन्होंने सीएबी का अध्यक्ष पद चुना।  उनका यह पसंद काम कर गई और उन्होंने देश की सबसे अमीर खेल संस्था और भारतीय क्रिकेट की सबसे शक्तिशाली प्रशासनिक संस्था बीसीसीआई का अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गांगुली और ब्रांडों को इस सवाल पर विचार करना चाहिए कि जिस व्यक्ति पर क्रिकेट में अनुशासन बनाने की जिम्मेदारी हो, क्या वह विवादों को लेकर बेपरवाह हो सकता है? उनका कहना है कि ब्रांड के रूप में उनका भविष्य इस बात पर निर्भर होगा कि वह अपनी विभिन्न भूमिकाओं में संतुलन कायम रखने में सफल होते हैं या नहीं।

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