बिजनेस स्टैंडर्ड - क्षमता से ज्यादा एथनॉल की दरकार
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क्षमता से ज्यादा एथनॉल की दरकार

संजीव मुखर्जी और शाइन जैकब /  November 22, 2019

उत्पादन में कमी और अन्य स्रोतों से बेहतर दाम मिलने की वजह से विपणन सत्र 2019-20 के दौरान चीनी मिलों ने पहली निविदा में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को कम मात्रा में एथनॉल की पेशकश की है। लेकिन तेल विपणन कंपनियों ने पहली बार गन्ने पर आधारित एथनॉल कंपनियों की स्थापित क्षमता की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक एथनॉल मांगा है क्योंकि उन्हें गन्ने से इतर स्रोतों से एथनॉल की आपूर्ति में उछाल की उम्मीद है। इसलिए तेल विपणन कंपनियों ने चीनी कंपनियों की सभी स्रोतों से उत्पादित कुल 3.55 अरब लीटर एथनॉल की स्थापित क्षमता के मुकाबले वर्ष 2019-20 में 5.11 अरब लीटर एथनॉल की निविदा जारी की थी।

वर्ष 2019-20 के लिए पहली निविदा में चीनी कंपनियों ने 1.63 अरब लीटर एथनॉल की पेशकश की है जो 2018-19 के सत्र में आपूर्ति किए गए एथनॉल की तुलना में 13.29 प्रतिशत कम है। गन्ने के कम उत्पादन और एल्कोहॉल विनिर्माताओं की ओर से बेहतर दाम दिए जाने के कारण ऐसा हुआ है। एथनॉल डिलिवरी का सत्र दिसंबर से शुरू होकर नवंबर में समाप्त होता है।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले सत्र के दौरान तेल विपणन कंपनियों को गन्ने से इतर स्रोतों से उत्पादित एथनॉल में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। इसी वजह से उनकी एथनॉल की जरूरत चीनी मिलों की स्थापित क्षमता से भी ज्यादा हो गई है। उन्हें इस बात पर भी भरोसा है कि गन्ने पर आधारित एथनॉल की कम उपलब्धता की वजह से एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य में बहुत ज्यादा कमी नहीं करनी पड़ेगी।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के जैव ईंधन पर कार्य करने वाले समूह के अध्यक्ष वाईबी रामकृष्ण ने कहा कि शीरे के अलावा गन्ने का रस, सड़े-गले और अतिरिक्त अनाज से भी एथनॉल तैयार करने की अनुमति है। अधिक क्षमता उपयोग और पहले से लाइसेंस प्राप्त नए केंद्रों के निर्माण पर अतिरिक्त जोर दिया जा रहा है। इससे एथनॉल की पर्याप्त मात्रा मिलेगी।

राज्य द्वारा संचालित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) 45 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ सभी स्रोतों से एथनॉल खरीदने वाली देश की शीर्ष खरीदार है। इसके बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) आती हैं।

अब तक 90 प्रतिशत से अधिक एथनॉल का थोक उत्पादन गन्ने पर आधारित शीरे से किया जा रहा है। हालांकि सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में गेहूं और मक्के जैसे गन्ने से इतर स्रोतों से एथनॉल की अच्छी-खासी मात्रा प्राप्त होगी। देश में गन्ने पर आधारित एथनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक का योगदान सबसे ज्यादा रहता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि शीरे पर आधारित एथनॉल से गैर-शीरे पर आधारित एथनॉल की ओर जाना कहने में भले ही आसान हो, लेकिन ऐसा करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि विपणन सत्र 2018-19 के दौरान 2.45 अरब लीटर एथनॉल के अनुबंधों में से 10 प्रतिशत से भी कम या केवल तकरीबन 0.17 अरब लीटर एथनॉल ही गन्ने से इतर स्रोतों से प्राप्त हुआ है, जबकि शेष पूरी मात्रा की आपूर्ति गन्ने पर आधारित शीरे से हुई है।

वर्ष 2019-20 में हालात कुछ बेहतर हैं क्योंकि अधिकारियों का कहना है कि 5.11 अरब लीटर एथनॉल की कुल जरूरत में से तेल विपणन कंपनियां 1.63 अरब लीटर की पहली निविदा जारी कर चुकी हैं जिसमें से 0.40 अरब लीटर (लगभग 26 प्रतिशत) की आपूर्ति गेहूं और मक्का जैसे गन्ने से इतर स्रोतों से हो रही है और शेष शीरे से। उद्योग के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि तेल विपणन कंपनियां अपनी एथनॉल क्षमता मजबूत करते हुए इसे 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर सकती हैं। कंपनियां वर्ष 2022 से पहले ही 10 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य की योजना बना सकती हैं।

गन्ने से इतर स्रोतों से एथनॉल उत्पादन की अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए तेल विपणन कंपनियां पहले ही 11 राज्यों में दूसरी पीढ़ी की 12 एथनॉल जैव-रिफाइनरी स्थापित करने की योजना तैयार कर चुकी हैं। इसमें से पांच - दहेज (गुजरात), पानीपत (हरियाणा), बरगढ़ (ओडिशा), बीना (मध्य प्रदेश) और बठिंडा (पंजाब) में शुरुआत पहले होने की उम्मीद है।
   (साथ में वीरेंद्र सिंह रावत)
Keyword: Sugarcane, Ethenol, Production, दहेज, गुजरात, पानीपत, हरियाणा, बरगढ़, ओडिशा, बीना, मध्य प्रदेश,
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