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पंजाब में धान कि सान हुए बदहाल

बीएस संवाददाता / जालंधर November 19, 2019

इस साल पंजाब में धान एवं बासमती की पैदावार कमजोर रहने से यहां के किसानों की हालत खस्ता हो गई है। इस वर्ष धान की पैदावार ज्यादातर क्षेत्रों में घटकर प्रति एकड़ 6 से 8 क्विंटल रह गई है। इससे किसानों को प्रति एकड़ 11,000 से 14,000 रुपये नुकसान हो रहा है। लंबी अवधि की किस्मों जैसे पूसा 44, डोगर पूसा और कुछ अन्य किस्मों की पैदावार में खासी गिरावट दिखी है। अधिक पैदावार के कारण लंबी अवधि की धान की ये किस्में किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इन किस्मों का उत्पाद प्रति एकड़ 35 क्विंटल तक उत्पाद होता है, जबकि छोटी अवधि की औसत पैदावार प्रति एकड़ 27 से 30 क्विंटल होती है। 
 
पैदावार कम रहने से कई किसानों को झटका लगा है और खासकर ऐसे किसान अधिक प्रभावित हुए हैं, जो बड़े किसानों से जमीन लेकर अनुबंध पर खेती करते हैं। मुक्तसर जिले में इस सत्र में धान की आवक में करीब 1,80,000 टन की कमी आई है। जिला मंडी अधिकारी कुलबीर सिंह मट्टा कहते हैं, 'मुक्तसर में पिछले वर्ष करीब 8,74,000 टन धान की आवक हुई थी, जबकि इस सत्र में महज 6,93,000 टन धान खाद्यान्न बाजार में पहुंचा है। इस तरह, यह मात्रा पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 1,80,000 टन कम है।' उन्होंने कहा कि धान की पैदावार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। धान एवं बासमती के रकबे में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन पैदावार में कमी लगभग तय है। 
 
मुक्तसर के एक किसान जसविंदर सिंह कहते हैं, 'मैंने एक किसान से सालाना अनुबंध पर 20 एकड़ जमीन ली थी और मेरे पास करीब 11 एकड़ जमीन पहले से थी। पिछले वर्षों के दौरान लंबी अवधि की किस्मों से करीब 36 क्विंटल पैदावार मिल रही थी, लेकिन इस साल महज यह 28 क्विंटल रही है। पैदावार कम होने से मुझे प्रति एकड़ 15,000 रुपये का नुकसान हुआ है।' मुक्तसर के मुख्य कृषि अधिकारी बलजिंदर सिंह बराड़ ने कहा कि परागण के समय गर्म एवं प्रतिकूल मौसम से धान एवं बासमती की पैदावार प्रभावित हुई है।
Keyword: punjab, farmer, paddy,,
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