बिजनेस स्टैंडर्ड - शीर्ष अदालत पहुंचा डीएचएफएल मामला
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शीर्ष अदालत पहुंचा डीएचएफएल मामला

देव चटर्जी / मुंबई 11 19, 2019

दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉर्पोरेशन का मामला

डीएचएफएल से रकम वापस चाह रहे सावधि जमाधारक
कंपनी के अनुसार वह उच्च न्यायालय के आदेश से पहले तक समय पर कर रही थी भुगतान
उच्च न्यायालय और डीआरटी ने कर्जदाताओं/सावधि जमाधारकों को भुगतान पर लगा दी थी रोक

बिजनेस स्टैंडर्ड शीर्ष अदालत पहुंचा डीएचएफएल मामलाकाफी शोर-शराबा मचने के बाद अब दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉर्पोरेशन (डीएचएफएल) का मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच गया है। डीएचएफएल जिन निवेशकों को भुगतान करने में असफल रही थी, उनमें से एक सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) धारक ने अपनी रकम हासिल करने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पूरे मामले पर नजर रखने वाले एक सूत्र ने आज बताया कि न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दाखिल हुई है और अगले कुछ हफ्तों में इस पर सुनवाई होनी है।

डीएचएफएल को सावधि जमाधारकों को 15,000 करोड़ रुपये और बैंकों को 38,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। कंपनी पर कुल 88,000 करोड़ रुपये कर्ज होने का अनुमान है और इसे रकम देने वालों में म्युचुअल फंड एवं बॉन्ड धारक भी शामिल हैं। कंपनी के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय में भी मुकदमा चल रहा है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), केनरा बैंक, यूनियन बैंक और एचडीएफसी बैंक ने अपनी रकम पाने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। एक दूसरा मामला ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी), पुणे में भी दायर किया गया है, जिसने फिलहाल कर्जदाताओं को किसी तरह के भुगतान पर रोक लगा दी है। 

शीर्ष न्यायालय के पंजीयक (रजिस्ट्रार) के अनुसार गाजियाबाद में रहने वाले एक सावधि जमाधारक ने अपनी बकाया रकम वसूलने के लिए डीएचएफएल के खिलाफ याचिका सौंपी है। इस याचिका में बंबई उच्च न्यायालय और डीआरटी के उन आदेशों को चुनौती दी गई है, जिनमें सावधि जमाधारकों को भुगतान पर रोक लगा दी थी। देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों ने भी डीएचएफएल में रकम जमा की थी, लेकिन उनकी पहचान सामने नहीं आई है और ये लोग कंपनी के खिलाफ कानूनी कदम नहीं उठा पा रहे हैं। एक सूत्र ने कहा कि शीर्ष न्यायालय में याचिका आने के बाद छोटे सावधि जमाधारकों को उनकी बकाया रकम वापस पाने में मदद मिलेगी।

बंबई उच्च न्यायालय ने रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस की याचिका पर सुनवाई के बाद 30 सितंबर और 10 अक्टूबर को आदेश जारी कर सावधि जमाधारकों सहित डीएचएफएल के किसी भी कर्जदाता को रकम लौटाने पर रोक लगा दी थी। 13 नवंबर को बंबई उच्च न्यायालय ने पाबंदी हटा ली और भारतीय बैंकों को सुरक्षित परिसंपत्तियों के एवज में डीएचएफएल से भुगतान लेने की अनुमति दे दी। इस बीच, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) सहित अन्य पक्षों ने भी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। बंबई उच्च न्यायालय इन मामलों पर बुधवार को सुनवाई कर सकता है।
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