बिजनेस स्टैंडर्ड - शुल्क वृद्धि के संकेत से चमके दूरसंचार शेयर
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शुल्क वृद्धि के संकेत से चमके दूरसंचार शेयर

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली 11 19, 2019

दूरसंचार क्षेत्र

आरआईएल का बाजार पूंजीकरण 9.5 लाख करोड़ रुपये के पार
जियो ने भी अगले कुछ हफ्तों में शुल्क दरें बढ़ाने की दी जानकारी
वोडा-आइडिया और एयरटेल ने दिसंबर से शुल्क दरें बढ़ाने की घोषणा की

बिजनेस स्टैंडर्ड शुल्क वृद्धि के संकेत से चमके दूरसंचार शेयरदूरसंचार क्षेत्र में शुल्क दरों को लेकर जंग छिड़ने के तीन साल बाद रिलायंस जियो ने अगले कुछ हफ्तों में शुल्क दरों में समुचित बढ़ोतरी करने की आज घोषणा की। इससे दूरसंचार ऑपरेटरों के बीच गलाकाट प्रतिस्‍पर्द्धा पर भी लगाम लगेगी। इससे पहले सोमवार को भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने दिसंबर के पहले हफ्ते में शुल्क दरें बढ़ाने की घोषणा की थी। दूरसंचार कंपनियों के इस कदम का शेयर बाजार पर भी अच्छा असर हुआ और दूरसंचार कंपनियों के शेयर में शानदार तेजी देखी गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के शेयर में तेजी आने से कंपनी का बाजार पूंजीकरण आज बढ़कर 9.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। इतना बाजार पूंजीकरण हासिल करने वाली यह देश की पहली कंपनी है। आरआईएल का शेयर 3.59 फीसदी चढ़कर 1,511.55 रुपये पर बंद हुआ। भारती एयरटेल के शेयर में 8.66 फीसदी की उछाल दर्ज की गई, वहीं वोडाफोन आइडिया का शेयर 38.20 फीसदी चढ़कर 6.15 रुपये पर पहुंच गया।

सूत्रों ने कहा कि सरकार की ओर से शुल्क दरों को लेकर गलाकाट प्रतिस्‍पर्द्धा कम करने के लिए कहने के बाद दूरसंचार कंपनियां इस दिशा में आगे बढ़ी हैं, क्योंकि इससे उद्योग पर गंभीर और प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। दूरसंचार उद्योग पर 5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इससे सरकार को उद्योग के लिए राहत पैकेज लाने की तार्किक वजह मिल सकती है, खास तौर पर ऐसे समय में जब उच्चतम न्यायालय के आदेश से कंपनियों पर 1,33,000 करोड़ रुपये का एजीआर बकाये का बोझ है। दूरसंचार कंपनियां स्पेक्ट्रम शुल्क भुगतान को टालने और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क में कटौती करने की मांग कर रहे हैं। कंपनियों द्वारा शुल्क वृद्घि का निर्णय ऐसे समय में किया जा रहा है जब दूरसंचार नियामक ट्राई गलाकाट प्रतिस्‍पर्द्धा को कम करने के लिए शुल्क की आधार कीमत को लेकर परामर्श शुरू करने पर विचार कर रहा है।

आरआईएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने पहले संकेत दिए थे कि उनकी कंपनी की प्रभावी शुल्क दर हमेशा प्रतिस्पर्द्धी कंपनियों की तुलना में 20 फीसदी सस्ती रहेंगी। अब प्रतिस्पर्द्धी कंपनियां शुल्क दरें बढ़ानी जा रही है, ऐसे में जानकारों का कहना है कि जियो भी उस अंतर को भरने के अपनी शुल्क दरों में थोड़ा इजाफा कर सकती है। एसबीआई कैप्स के विश्लेषण के अनुसार जियो के टैरिफ प्लान में अब आईयूसी मिनट्स शुल्क भी शामिल कर दिया गया है। लेकिन बाकी ऑपरेटरों की तुलना में उसकी दरें अब भी 4 से 11 फीसदी कम हैं।

हालांकि जियो नेे कहा है कि दूरसंचार नियामक ट्राई द्वारा आईयूसी व्यवस्था खत्म किए जाने के बाद वह अतिरिक्त शुल्क वापस ले लेगी। वैसे जियो और प्रतिस्पद्र्घी के नेटवर्क पर इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल की हिस्सेदारी 50-50 फीसदी हो गई है। इससे जियो को आईयूसी शुल्क के तौर पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है। जियो ने कहा था कि उसका लक्ष्य 50 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचना है। हालांकि शुल्क दरों में बढ़ोतरी से ग्राहकों की जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा क्योंकि वे जियो के आने से पहले की तुलना में काफी कम रकम चुका रहे हैं। वोडा आइडिया का प्रति यूजर औसत राजस्व प्रति माह घटकर 107 रुपये, एयरटेल के लिए 128 रुपये और जियो के लिए 120 रुपये रह गया है।

पिछले साल वित्त मंत्रालय ने दूरसंचार कंपनियों से कहा था कि वह राहत पैकेज मांगने के बजाय, वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए शुल्क दरों में वाजिब बढ़ोतरी करें। तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट किया था कि अत्यधिक प्रतिस्‍पर्द्धा से कंपनियों को गंभीर दबाव पड़ेगा।
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