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ऊर्जा से जुड़े सभी मंत्रालयों के लिए होगी राष्ट्रीय ऊर्जा नीति

श्रेया जय और संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली November 19, 2019

नीति आयोग द्वारा तैयार की गई राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (एनईपी) सभी ऊर्जा मंत्रालयों के लिए मार्गदर्शक नीति बनेगी। कोयला एवं खदानों, अक्षय ऊर्जा, तेल और गैस और पर्यावरण को शामिल कर नीति का मसौदा तैयार किया गया है। एनईपी को जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यह पहला मौका हो सकता है, जब ऐसी एकीकृत नीति आएगी, जिसमें करीब आधे दर्जन मंत्रालय शामिल होंगे। इस नीति का मसौदा तैयार करने से जुड़े लोगों ने कहा कि सभी ऊर्जा मंत्रालयोंं और साथ ही ऊर्जा की खपत करने वाले विभागों को  अपनी खुद की नीतियां व नियमन तैयार करते समय एनईपी का पालन करना होगा।  सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हर विभाग जिस तरीके से अपनी नीति की डिजाइन तैयार करते हैं, उसमें अन्य के साथ तालमेल होना चाहिए।'
 
इसके पहले एफएएमई (फास्टर एडॉप्शन आफ मैन्युफैक्चरिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) योजना आई थी, जिसे अंतर मंत्रालयी कार्ययोजना कहा गया था। एनईपी की वैधता की अवधि 2030 तक रखने का सुझाव दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि इसे पहले ही प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा जा चुका है। भारत का शीर्ष थिंक टैंक 2017 से एनईपी का मसौदा बना रहा है। अधिकारियों ने कहा कि इसमें बिजली क्षेत्र से जुड़े कुछ ताजा मसलों का समाधान होगा। ऊर्जा के सम्मिश्रण में बदलाव व अक्षय ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी बढऩे, जलवायु परिवर्तन की चिंता, प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर्याप्त होने, और तेल बाजार में उतार चढ़ाव को दीर्घावधि परिदृश्य में शामिल किया गया है। 
 
अधिकारी ने कहा कि वैश्विक निवेशक चाहते हैं कि भारत का एक स्थिर और दीर्घावधि ऊर्जा परिदृश्य हो और इस तरह की नीति में हाल की स्थिति को ध्यान में रखा जाए और ऐसा मसौदा इस देश में कभी तैयार नहीं किया गया। इस परामर्श का हिस्सा रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जलवायु परिवर्तन संबंधी परामर्श के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर एनईपी में कोयला को छोड़कर जीवाश्म ईंधन की खपत घटाने पर विचार किया गया है।' जलवायु परिवर्तन की वार्ता के दौरान भारत ने कहा था कि वजह 40 प्रतिशत ऊर्जा गैर जीवाश्म ईंधन के स्रोतों से लेगा, लेकिन कोयले का इस्तेमाल कम करने को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। 
 
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि पिछले 7 महीने से लंबित शुल्क नीति भी एनईपी पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की स्थिति में भी सुधार आएगा।  एक अधिकारी ने कहा, 'केंद्र सरकार फिर से वित्तीय पुनर्गठन के लिए उन पर दबाव नहीं बना सकती। यह समाधान नहीं है। डिस्कॉम का काम करने का तरीका बदलने की जरूरत है और यह प्रभावी होगा।' एनईपी में प्रस्ताव किया गया है कि केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को कोई भी वित्तपोषण उनकी बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता से जुड़ा होना चाहिए। इसमें इस बात पर भी जोर दिया गया है कि बिजली सब्सिडी के नकद लाभ अंतरण (डीबीटी) की जरूरत है। 
 
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'शुल्क बाजार से तय होना चाहिए और उपभोक्ताओं की यह मानसिकता बदलने की जरूरत है कि बिजली मुफफ्त होनी चाहिए या उस पर सब्सिडी मिलनी चाहिए। यह एक आर्थिक उत्पाद है और इसे ऐसा ही देखा जाना चाहिए। हमने सुझाव दिया है कि शुल्क बाजार से जुड़ा हुआ होना चाहिए।' इस सिलसिले में नीति आयोग ने मसौदा एनईपी में सब्सिडी ऐंड टैक्सेशन रिफॉर्म और रिस्ट्रक्चरिंग आफ एनर्जी सेक्टर गवर्नेंस नाम से दो अध्याय डाले हैं। घरेलू ईंधन का इस्तेमाल भी एनईपी में अहम है, जिसमें घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने व अक्षय ऊर्जा से जुड़े विनिर्माण का पक्ष लिया गया है। 
 
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