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निप्पॉन इंडिया में कर्मियों का 6 फीसदी से ज्यादा स्वामित्व

जश कृपलानी /  November 18, 2019

हाल में रिलायंस निप्पॉन लाइफ एमएफ का ब्रांडिंग निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड (एनआईएमएफ) के तौर पर हुई है। इस कंपनी में कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए एम्पलॉयी स्टॉक ऑप्शंस के जरिए खासा स्वामित्व दिया गया है क्योंकि कंपनी बाजार हिस्सेदारी दोबारा वापस पाना चाहती है। जश कृपलानी को दिए साक्षात्कार में कंपनी के कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी संदीप सिक्का ने कहा कि ब्रांड में बदलाव से भविष्य में बढ़त में मदद मिल सकती है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

 
डेट के क्षेत्र में बाजार हिस्सेदारी के नुकसान की क्या वजह रही?
 
डेट के क्षेत्र में हमने काफी ज्यादा रकम गंवाई और कुल नुकसान करीब 50,000 करोड़ रुपये रहा। इसकी दो वजहें रही। पहला, हमारे भूतपूर्व समूह की गतिविधियों से कॉरपोरेट ट्रेजरी ने हमारी ऋण योजनाओं में निवेश रोक दिया। साथ ही कर्ज संकट ने पूरे म्युचुअल फंड उद्योग को जकड़ लिया। संस्थागत निवेशक या तो म्युचुअल फंड उद्योग से बाहर निकल रहे हैं या कुछ निश्चित फंड हाउस की ओर उनका झुकाव हो गया है। हालांकि हमें भरोसा है कि नाम बदलने, ब्रांड बदलने आदि से डेट पोर्टफोलियो में काफी जुड़ाव होगा। हमें भरोसा है कि हम गंवाई गई ज्यादातर परिसंपत्ति आधार वापस हासिल कर लेंगे। पिछले महीने के मुकाबले हमने कुछ सकारात्मक रफ्तार देखी है। साथ ही हम सिर्फ उच्च संपत्ति आधार पर ही नजर नहीं डालना चाहते बल्कि कारोबारी लिहाज से सही चीजों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
 
दोबारा ब्रांडिंग और नाम में से रिलायंस हटाने के बाद आपको बाजार हिस्सेदारी दोबारा हासिल करने का कितना भरोसा है?
 
कंपनी ने रिलायंस नाम होने से ही बढ़त हासिल की, खास तौर से खुदरा क्षेत्र में। इसके साथ छोटे शहरों में काम करने की हमारी क्षमता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ब्रांड में बदलाव के बाद हम संस्थागत निवेशकों की वापसी देख रहे हैं। साथ ही खुदरा निवेशकों और वितरकों से मिला फीडबैक सकारात्मक है। हालांकि हम बाजार हिस्सेदारी के बजाय लाभकारी बढ़त पर ध्यान देना चाहते हैं। ज्यादा संपत्ति आधार के लिए विभिन्न तरह के निवेशकों का होना महत्वपूर्ण होगा, न कि सिर्फ संस्थागत रकम पर ध्यान केंद्रित करना ही पर्याप्त होगा। उद्योग की परिसंपत्ति में आधी हिस्सेदारी संस्थागत निवेशकों की है और वे निप्पॉन के नाम के प्रति पहले से ही जागरूक हैं। धनाढ्य निवेशक भी इससे वाकिफ हैं। खुदरा निवेशकों को सेवा देने वाले स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों ने भी नई ब्रांडिंग पर नजर डाली है। खुदरा निवेशकों वाले कुछ हिस्सों में इसमें कुछ वक्त लगेगा, लेकिन हमें दोबारा ब्रांडिंग के बाद बाजार हिस्सेदारी पाने का भरोसा है।
 
निप्पॉन लाइफ के अधिग्रहण के बाद कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए क्या कोई कार्यक्रम बनाया गया है?
 
जब सौदा हुआ तो कंपनी की 6.2 फीसदी हिस्सेदारी हर स्तर के कर्मचारियों को एम्पलॉयी स्टॉक ऑप्शंस के रूप मेंं दी गई। यह लंबी अवधि की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने और सभी हितधारकों के हितों को जोडऩे के लिए किया गया।
 
आपके और उद्योग के लिहाज से संकट वाले कर्ज के समाधान के लिए आगे क्या होगा?
 
हम अपने नियंत्रण के दायरे में काम करना चाहते हैं, न कि नियामक या सरकार के हस्तक्षेप की प्रतीक्षा करेंगे। यही वजह है कि हमें महसूस हुआ कि एस्सेल समूह को दिए गए कर्ज के मामले में इक्विटी कोलेटरल को बेचना सही है। साथ ही हम फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट के मामले में कोलेटरल की शेयर कीमतों पर नजर नहीं डालना चाहते। यह कोलेटरल पूंजी संरक्षित रखने के लिए था और इस लिहाज से हमने कोलेटरल पर अपने अधिकार का इस्तेमाल किया।  इसी तरह हमने मॉर्गन क्रेडिट को दिए कर्ज पर किया, जहां येस बैंक के शेयर कोलेटरल के तौर पर रखे गए थे। डीएचएफएल के मामले में हमने अदालत का रुख किया। अनिल धीरूभाई अंबानी समूह को दिए कर्ज का एक हिस्सा रिलायंस जनरल इंश्योरेंस के शेयरों से सुरक्षित है।
 
वितरकों के बीच कुछ इक्विटी योजनाओं के प्रदर्शन को लेकर चिंता है। इसमें सुधार के लिए आगे की राह क्या होगी?
 
पिछले कुछ वर्षों से बाजार में चढऩे व गिरने वाले शेयरों का अनुपात संकरा हो रहा है। ज्यादातर समय में चार से पांच शेयरों ने निफ्टी जैसे मुख्य सूचकांकों की बढ़त में योगदान किया है। इसलिए कुछ इक्विटी योजनाओं ने बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है। हालांकि एसआईपी के जरिए आने वाले ज्यादातर खुदरा निवेशक एक या दो साल के प्रदर्शन पर नजर नहीं डाल रहे हैं बल्कि वे लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर रखते हैं जहां हमारी ज्यादातर योजनाओंं का प्रदर्शन बेहतर है। 
Keyword: Reliance, nippon, life mutual fund,,
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