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'आर्थिक मंदी से बेअसर छत्तीसगढ़'

अर्चिस मोहन /  November 18, 2019

कांग्रेस पार्टी आर्थिक मंदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है। इस बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अर्चिस मोहन को बताया कि उनका राज्य मंदी के प्रभाव से बच गया क्योंकि उनकी सरकार ने नीतियों को जमीन पर उतारा जिससे श्रमिकों, किसानों, गृहिणियों तथा आदिवासियों की जेब में पैसा आया और इससे मांग बढ़ाने में मदद मिली। संपादित अंश:

 
आपकी सरकार को सत्ता में आए करीब एक वर्ष होने वाला है। इस दौरान आपकी क्या उपलब्धियां रहीं?
 
चुनाव में हमने दो मुख्य वादे किए थे, कृषि कर्ज माफी और किसानों से 25 रुपये प्रति किलोग्राम (2,500 रुपये क्विंटल) की दर पर धान खरीदना। हमने कुल 68 सीटें जीती हैं जो कुल बहुमत का तीन-चौथाई है। हमने अपने दोनों वादों पर काम किया है। सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सली हिंसा में 40 फीसदी की गिरावट है। हमने कहा था कि हम नक्सलियों के साथ नहीं बल्कि अपने लोगों जैसे आदिवासी, कारोबारी, व्यापारी, पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे। नतीजतन, अब हमें उनकी जरूरतों के बारे में बेहतर समझ है। हमारा नारा है 'विश्वास, विकास और सुरक्षा।' विश्वास जीतने के लिए हमने बस्तर में 1,700 किसानों की 4,200 एकड़ जमीन वापस की, तेंदू पत्ते 2,500 रुपये के बजाय 4,000 रुपये प्रति बोरी कीमत पर खरीदे और पोषण स्तर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सुपोषित योजना शुरू की। मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना की मदद से बस्तर में ओपीडी में 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। हमने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 105 स्कूल खोले, जो पिछले 13 वर्षों से बंद थे। हमें नक्सलियों की भर्ती करने वाले एक व्यक्ति द्वारा अपने कमांडर को भेजा गया पत्र मिला जो बताता है कि अब नक्सलियों में लोगों की भर्ती करना मुश्किल हो गया है और यह इस बात का सबूत है कि हमारी नीतियों ने काम किया है। किसान आत्महत्याओं में भी कमी आई है। 
 
आपकी पार्टी (कांग्रेस) आर्थिक मंदी पर आंदोलन करने की योजना बना रही है। आपके राज्य में क्या स्थिति है? 
 
छत्तीसगढ़ मंदी के दुष्प्रभाव से बच गया है। राज्य में क्रय शक्ति बढ़ी है। हमने 25 रुपये किलो पर धान खरीदने के लिए 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस राशि के साथ साथ कर्जमाफी, 400 यूनिट तक के बिजली बिलों को माफ करना, हर महीने प्रत्येक परिवार को 35 रुपये किलो चावल, तेंदू के पत्तों की बोरी के लिए 4,000 रुपये जैसे फैसलों ने श्रमिकों, आदिवासियों, गृहिणियों, किसानों आदि समाज के सभी वर्गों का आर्थिक सशक्तीकरण किया है। अगर मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाया होता तो पूरा देश आर्थिक मंदी से बच सकता था। राज्य में लोगों के हाथों में पैसा है, जिससे कपड़े, जूते, मोटरसाइकिल, पंखे, कूलर और एयर-कंडीशनर की बिक्री बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ में सबमर्सिबल पंपों की बिक्री में दो गुना वृद्धि हुई है। सोने और आभूषणों की बिक्री 84 गुना बढ़ी है। नीति निर्माताओं को इस बात की ओर ध्यान देना होगा कि किसान और श्रमिक अपने पास पैसा नहीं रखते हैं। वे खर्च करते हैं। कॉर्पोरेट सेक्टर को दिए गए धन का उपयोग उनके द्वारा पहले अपने ऋण को चुकाने के लिए किया जाता है और उसके बाद ही वे नई परियोजनाएं स्थापित करने के बारे में सोचते हैं। मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट कर की दर में कटौती करके कारोबारियों को 1.74 लाख करोड़ रुपये की सहायता की लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी बाजार में कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं दिखा। हमने दिसंबर में अपनी नीतियों को लागू किया और छत्तीसगढ़ में मार्च तक ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री में 36.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। पिछली तिमाही में छत्तीसगढ़ में भूमि रजिस्ट्री से प्राप्त राजस्व 92 करोड़ रुपये से बढ़कर 152 करोड़ रुपये हो गया।
 
छत्तीसगढ़ सरकार ने नई औद्योगिक नीति लागू की है?
 
हमने कई प्रमुख कदम उठाने की घोषणा की है जिसमें लीज पर ली गई जमीन को मुक्त घोषित करना, रत्न तथा आभूषण पार्क स्थापित करना शामिल हैं। हमारा मुख्य ध्यान काफी समय से गौण पड़े क्षेत्रों पर है, जैसे खाद्य प्रसंस्करण, लघु वनोपज से जुड़े लोग आदि। 
 
आपने केंद्र सरकार से कड़े लहजे में कहा है कि अगर वह 2,500 रुपये क्विंटल पर धान नहीं खरीदती तो आप विरोध प्रदर्शन करेंगे। अगर सरकार नहीं मानती तो आपका कदम? 
 
खरीद नीति की घोषणा राज्य नहीं बल्कि केंद्र सरकार करती है। हम विपणन संघों के समर्थन से खरीद करते हैं। अगर हमें चावल की जरूरत है, तो केंद्र इसे हमें आवंटित करता है। अब, केंद्र सरकार कह रही है कि अगर छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को बोनस देती है तो वह राज्य से चावल नहीं खरीदेगी। यह संसद में पारित किसी भी कानून पर आधारित नहीं है। वर्ष 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद एक परिपत्र के जरिये यह आदेश जारी किया गया है। मोदी सरकार ने वर्ष 2017 तथा 2018 में इस आदेश (छत्तीसगढ़ के लिए) को शिथिल कर दिया, तो अब ऐसा क्यों नहीं हो सकता? क्या केवल इसलिए कि चुनाव महत्त्वपूर्ण थे? उन्होंने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट स्थिति को देखते हुए इसमें ढील दी तो अब स्थिति कैसे बदल गई है? हालांकि, मैं आशावादी हूं। मैंने केंद्रीय खाद्य मंत्री से मुलाकात की और प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है। मैंने नीति आयोग की बैठक के दौरान इस मुद्दे को उठाया। छत्तीसगढ़ में धान ही एकमात्र फसल है। हमारा सिंचित क्षेत्र मात्र 31 प्रतिशत है, और 44 प्रतिशत इलाका जंगल है। हमारे किसानों की तुलना पंजाब और हरियाणा के किसानों से नहीं की जा सकती। वहां प्रति एकड़ पैदावार 20 क्विंटल है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह मात्र 8 क्विंटल है। हमारे द्वारा दिए गए इस बोनस की सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सल हिंसा में 40 फीसदी की गिरावट आना है। या तो युवाओं के हाथ में हल दो, या उन्हें बंदूक दो। यदि हम उन्हें हल चलाने के लिए लिए प्रेरित नहीं करेंगे तो नक्सली उन्हें बंदूक दे देंगे।
 
न्यूनतम आय गारंटी योजना अथवा न्याय कांग्रेस के चुनावी वादे में शामिल थी। हमने सुना है कि राहुल गांधी इसे छत्तीसगढ़ में लागू करना चाहते हैं। अभी स्थिति क्या है? 
 
हम फिलहाल इंतजार कर रहे हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से आदेश आते ही हम इसे लागू करेंगे। 
 
सरकार बनने से पहले आपने खदान अनुबंधों में पारदर्शिता की मांग की थी। अब कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं...
 
मुझे ऐसी किसी एक खदान के बारे में बताओ जहां पिछले 11 महीनों में काम शुरू हुआ हो। आरोप लगाने से क्या होता है। 
Keyword: Chattishgarh, Bhupesh Baghel, Congress, Farmer, Adivasi,,
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