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संवाद का रास्ता चुनें सदस्य: मोदी

एजेंसियां /  November 18, 2019

भारत के संसदीय इतिहास में राज्यसभा की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि सभी दलों के सदस्यों को रुकावट के बजाय संवाद का रास्ता चुनना चाहिए। मोदी ने उच्च सदन के 250 वें सत्र के अवसर पर भारतीय राजनीति में राज्यसभा की भूमिका : आगे का मार्ग विषय पर हुई विशेष चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि इस सदन ने कई ऐतिहासिक पल देखे हैं और कई बार इतिहास को मोडऩे का भी काम किया है। उन्होंने स्थायित्व एवं विविधता को राज्यसभा की दो विशेषताएं बताया। उन्होंने कहा कि भारत की एकता की जो ताकत है, वह सबसे अधिक इसी सदन में प्रतिबिंबित होती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए चुनावी अखाड़ा पार कर पाना संभव नहीं होता है। किंतु इस व्यवस्था के कारण हमें ऐसे महानुभावों के अनुभवों का लाभ मिलता है। मोदी ने कहा कि इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्वयं बाबा साहेब आंबेडकर हैं। उन्हें किन्हीं कारण से लोकसभा में जाने का अवसर नहीं मिल सका और उन्होंने राज्यसभा में आकर अपना मूल्यवान योगदान दिया।
 
उन्होंने कहा कि यह सदन चैक एवं बैलेंस (नियंत्रण एवं संतुलन) का काम करता है। किंतु बैलेंस और ब्लॉक (रुकावट) में अंतर रखा जाना चाहिए। उन्होंने राज्यसभा सदस्यों को सुझाव दिया कि हमें रुकावट के बजाय संवाद का रास्ता चुनना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने योगदान दिया है, वे अभिनंदन के अधिकारी हैं। इस सदन ने कई ऐतिहासिक पल देखे हैं। इतिहास बनाया भी है और ऐतिहासिक पल देखे भी हैं। इसने कई बार इतिहास को मोडऩे का भी काम किया है। मोदी ने कहा कि इस सदन में कई ऐसे लोग थे जिन्होंने कभी शासन व्यवस्था में निरंकुशता नहीं आने दी। 
 
उन्होंने अनुच्छेद 370 और 35 ए के हटाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्च सदन ने इस मामले में भी विधेयक पारित कर देश को दिशा दिखाई। मोदी ने कहा कि हमें राष्ट्रीय दृष्टिकोण को सदा केंद्र में रखना चाहिए, किंतु क्षेत्रीय हितों का संतुलन भी बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संतुलन बनाए रखने का काम सबसे अच्छी तरह से राज्यसभा में हो हो सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राकांपा और बीजद से हमें सीख लेना चाहिए क्योंकि उनके सदस्य कभी आसन के समक्ष नहीं आते। 
 
भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था : ठाकुर 
 
सरकार ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि दुनियाभर में मंदी के बावजूद इस समय भी देश की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है और सरकार ने इसे मजबूती प्रदान करने के लिए बैंकों का विलय और उद्योगों को कर में छूट सहित कई कदम उठाए हैं। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह भी कहा कि 2025 तक भारत पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल के पूरक प्रश्न के उत्तर में ठाकुर ने कहा कि पिछले चार महीने और इससे पहले के पांच साल में देश सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना है।
 
उन्होंने कहा कि 2014 से 2019 तक औसत विकास दर 7.5 प्रतिशत रही, जो जी-20 देशों में सर्वाधिक है। ठाकुर ने कहा कि जब दुनिया की जीडीपी दर 3.8 प्रतिशत से कम होकर पिछले वर्ष 3.6 प्रतिशत रह गई और इस वर्ष इसके 3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, तब भी विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) ने 2019-20 में जी-20 समूह के देशों में भारत की विकास दर के सबसे तेजी से बढऩे का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। आम आदमी पार्टी के सदस्य भगवंत मान ने पूछा कि देश की अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जमीन पर स्थिति कुछ और है तथा क्या सरकार मानने को तैयार है कि देश में आर्थिक मंदी है? उनके पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री ने कहा, 'पांच फीसदी गिरावट नहीं है जैसा कि सदस्य कह रहे हैं।' वित्त राज्य मंत्री ने अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कुछ कदम गिनाते हुए कहा कि बैंकों का विलय किया गया है, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश लाने के लिए प्रावधान किए गए और एफडीआई आया भी है। 
 
सीमा बदलने में हो अहम भूमिका 
 
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्यों की परिषद होने के नाते प्रांतों की सीमाओं में फेरबदल से संबंधित विधेयकों में राज्यसभा की अधिक भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने हालांकि इस संदर्भ में जम्मू-कश्मीर का नाम नहीं लिया, जिसका हाल में पुनर्गठन हुआ है। सिंह राज्यसभा के 250वें सत्र पर उच्च सदन में भारतीय शासन व्यवस्था में राज्यसभा की भूमिका और आवश्यकता पर हुई विशेष चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका को इस सदन के प्रति अधिक सम्मान दिखाना चाहिए। लेकिन आज ऐसा नहीं हो रहा है। सिंह ने कहा, 'उदाहरण के लिए, किसी राज्य की सीमाओं का पुनर्निर्धारण... उन्हें केंद्रशासित प्रदेशों में परिवर्तित करना, ये दूरगामी परिणामों वाले प्रस्ताव अथवा विधेयक हैं। इन मुद्दों से निपटने के लिए राज्यसभा को अधिक अधिकार होने चाहिए। सरकार द्वारा राज्यसभा की अनदेखी कर जल्दबाजी में महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित कराने के प्रति सत्ता पक्ष को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि इससे सदन सहित हमारे संस्थानों का कद एवं महत्त्व कम होता है। 
Keyword: Parliament, session, Narendra Modi, Anurag Thakur, Manmohan singh,,
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