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छत्तीसगढ़ सरकार ने बढ़ाई एनएमडीसी के पट्टे की अवधि

आर कृष्णा दास / रायपुर November 18, 2019

सार्वजनिक क्षेत्र की एनएमडीसी को कर्नाटक के घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ में राहत के संकेत मिले हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने कंपनी की चार खदानों का पट्टा नवीनीकृत करने का निर्णय किया है। खनिज क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनएमडीसी छह दशक से भी लंबे समय से लौह अयस्क खनन के कारोबार से जुड़ी है और देश में तीन लौह अयस्क कॉम्प्लेक्स का परिचालन कर रही है। एक खदान कर्नाटक के दोणिमलै में है जबकि दो छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में है। देश में कुल लौह अयस्क उत्पादन में एनएमडीसी का योगदान सबसे अधिक है। 

 
कंपनी सालाना 3.3 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन करती है और इनमें से 2.32 करोड़ टन का उत्पादन छत्तीसगढ़ के बचेली और किरंदुल कॉम्प्लेक्स से किया जाता है। दोणिमलै खदान की क्षमता 70 लाख टन लौह अयस्क उत्पादन की है लेकिन इस खदान के पट्टे के नवीनीकरण को लेकर विवाद होने से पिछले साल इसका पट्टा रद्द कर दिया गया था, जिसकी वजह से कंपनी को यहां से उत्पादन बंद करना पड़ा था। केंद्र और खदान पंचाट के हस्तक्षेप के बावजूद कंपनी को अब तक इस खदान का पट्टा नहीं मिल पाया है। 
 
कर्नाटक की घटना से चिंतित एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में खदान के पट्टे के नवीनीकरण में किसी तरह की दिक्कत नहीं आए, उससे बचने के लिए पहले ही कवायद शुरू कर दी थी। बैलाडीला परियोजना के अंतर्गत पांच खदानों में से चार को पट्टे पर दिया गया है जिसकी कुल क्षमता 2.9 करोड़ टन सालाना है और इसके पट्टे की अवधि मार्च 2020 में खत्म हो रही है। एमएनडीसी के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक एन बैजेंद्र कुमार ने खुद कमान संभाली और पिछले छह महीने की मेहनत अब रंग लाती दिख रही है। कुमार ने कहा, 'हम छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और शीर्ष अधिकारियों के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने एनएमडीसी को मदद की और खदान के पट्टे को 20 साल के लिए और आगे बढ़ा दिया।'
 
कुमार की अफसरशाही की पृष्ठभूमि इसमें मददगार साबित हुई। 1986 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार छत्तीसगढ़ कैडर के हैं और यहां के कामकाज के तरीकों से वाकिफ हैं। इससे उन्हें राज्य के प्राधिकरणों को समझाने में मदद मिली। एनएमडीसी के प्रमुख बनने वाले कुमार पहले आईएएस अधिकारी हैं।
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