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भारत आने के लिए चुकाई बड़ी कीमत

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता 11 17, 2019

पिछले साल अक्टूबर में लगाई थी 42 हजार करोड़ रुपये की संशोधित बोली
उसके बाद से स्टील की कीमतों में आ चुकी है 25 फीसदी गिरावट
उत्तम गैल्वा और केएसएस के लिए भी चुकाए 7,469 करोड़ रु.
आर्सेलरमित्तल ने जताया स्टील की मांग में कमी आने का अंदेशा

आर्सेलरमित्तल ने जब अक्टूबर 2018 में एस्सार स्टील के लिए अपनी बोली बढ़ाकर 42,000 करोड़ रुपये की थी तो उस समय घरेलू बाजार में स्टील की कीमतें चरम पर थीं और बेंचमार्क हॉट रोल्ड कॉइल का भाव 46,000 रुपये प्रति टन के आसपास था। तेरह महीने बाद जब इस सौदे पर से बादल छंट रहे हैं तो कीमतों में करीब 25 फीसदी गिरावट आ चुकी है। फरवरी 2018 में जब दुनिया की सबसे स्टील निर्माता आर्सेलरमित्तल ने संकट में फंसी एस्सार स्टील के लिए 35,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई तो स्टील की कीमत 43,000 रुपये प्रति टन थी जो आज 34,000 से 35,000 रुपये प्रति टन रह गई है। लेकिन यह बोली अदालती लड़ाई फंस गई और अक्टूबर में कंपनी ने बोली बढ़ाकर 42,000 करोड़ रुपये कर दी। इसके अलावा कंपनी को भारत के दिवालिया कानून के तहत बोली लगाने की पात्रता हासिल करने के लिए 7,469 करोड़ रुपये भी चुकाने पड़े। इस तरह उसकी कुल लागत करीब 49,670 करोड़ रुपये रही। आर्सेलरमित्तल ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। 

कानून के मुताबिक आर्सेलर को एस्सार स्टील के लिए बोली लगाने की पात्रता हासिल करने के लिए उत्तम गैल्वा स्टील्स और केएसएस पेट्रोन के वित्तीय लेनदारों को 7,469 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा। ये दोनों चूककर्ता कंपनियां हैं। उत्तम गैल्वा के कर्ज का भुगतान करते समय आर्सेलरमित्तल ने कहा था कि वह कंपनी का मालिकाना हक लेने पर विचार कर रही है। ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत किसी दिवालिया कंपनी का प्रवर्तक दूसरी दिवालिया कंपनी पर बोली नहीं लगा सकता है। उत्तम गैल्वा स्टील्स के प्रवर्तक अंकित मिगलानी ने कहा, 'यह एक महंगा सौदा है लेकिन एस्सार जैसी परिसंपत्ति को हासिल करना लगभग नामुमकिन है। यह बेहतरीन परिसंपत्ति है।'

उन्होंने कहा कि उत्तम गैल्वा और केएसएस के बकाये के लिए अतिरिक्त भुगतान भारत में प्रवेश करने के लिए एक पीड़ादायक शुल्क है। उन्होंने कहा, 'मैं उनका शुक्रगुजार हूं लेकिन यह आर्सेलरमित्तल के लिए उचित नहीं है।' इक्रा के सहायक उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग्स) ऋतव्रत घोष ने कहा कि एस्सार के पास सालाना 96 लाख टन स्टील निर्माण की क्षमता है। उन्होंने कहा, 'अगर उत्तम गैल्वा और केएसएस के भुगतान को भी मिला दिया जाए तो लागत करीब 50 हजार करोड़ रुपये बैठती है। प्रति टन अधिग्रहण की लागत 730 डॉलर होगी जो भूषण स्टील के लिए 886 डॉलर प्रति टन थी और भूषण पावर के लिए 925 डॉलर प्रति टन होगी।' देश में संकटग्रस्त स्टील परिसंपत्तियों की ऊंची कीमत से नई परियोजनाओं की अनिश्चितता को दर्शाती है।

इसके अलावा देश में दस लाख टन क्षमता के लिए लागत एक अरब डॉलर है। हालांकि यह अधिग्रहण ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया का पांच फीसदी स्टील बनाने वाली आर्सेलरमित्तल ने स्टील का मांग में कमी का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। आर्सेलर को तीसरी तिमाही में 53.9 करोड़ डॉलर का शुद्घ घाटा हुआ। कंपनी को लगातार दूसरी तिमाही में घाटा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी ने यूरोप में अपने कई संयंत्रों में कामकाज बंद कर रखा है। कंपनी ने हाल में कहा कि वह करीब 1,000 कामगारों की छंटनी करेगी और दक्षिण अफ्रीका में सल्डान्हा संयंत्र बंद करेगी। हालांकि उद्योग के सूत्रों का कहना है कि भारत बाजार अलग है।

 

भारतीय बाजार बढ़ रहा है। देश में स्टील की प्रति व्यक्ति खपत 70.9 किलो है जबकि वैश्विक औसत 224.5 किलो है। आर्सेलरमित्तल जब देश में नए संयंत्रों को जोरशोर से आगे बढ़ा रही थी तो उस समय कंपनी की भारतीय परियोजनाओं के मुख्य कार्याधिकारी सनक मिश्रा ने कहा कि 2018 तक पिछले 50 वर्षों में भारतीय स्टील बाजार 17 गुना बढ़ा जबकि चीन सहित दुनिया में यह बढ़ोतरी चार गुना रही।घोष ने कहा कि बुरे दौर में भी स्टील की मांग 5-6 फीसदी की दर से बढ़ रही है। मिश्रा ने कहा कि एस्सार का हजीरा संयंत्र विश्वस्तरीय परिसंपत्ति है। मिश्रा ने करीब एक साल तक एस्सार स्टील को सलाह दी थी। पिछले दो साल एस्सार स्टील के लिए अच्छे रहे हैं। 2018-19 में कंपनी का एबिटा 4,400 करोड़ रुपये रहा। इस साल की पहली तिमाही में यह 1,100 करोड़ रुपये और दूसरी तिमाही में 750 करोड़ रुपये था। 
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