बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंक में 5 लाख तक जमा का बीमा!
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बैंक में 5 लाख तक जमा का बीमा!

रघु मोहन / मुंबई 11 17, 2019

प्रस्तावों पर बोर्ड बैठक में चर्चा संभव

बिजनेस स्टैंडर्ड बैंक में 5 लाख तक जमा का बीमा!देश में बैंक जमा बीमा को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है। खुदरा बीमा कवर को मौजूदा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि यदि बैंक डूबता है तो आपके खाते में जमा कम से कम 5 लाख रुपये आपको वापस मिल सकते हैं। साथ ही थोक जमाकर्ताओं के लिए 25 लाख रुपये पर एक नई योजना शुरू की जा सकती है। अगर यह योजना अमल में आती है तो 1993 के बाद यह पहला मौका होगा जब जमा बीमा की सीमा बढ़ाई जाएगी। इससे पहले 1992 में शेयर घोटाले के कारण बैंक ऑफ कराड के डूबने के बाद 1 मई, 1993 को इसमें आखिरी बदलाव किया गया था। उससे पहले यह सीमा 30,000 रुपये थे जो 1 जुलाई, 1980 को बढ़ाई गई थी। 

एक नियामकीय अधिकारी ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय जमा बीमा की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे देगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से इसकी जरूरत महसूस की जा रही है। लेकिन वह इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं है कि थोक जमाकर्ताओं के लिए योजना की घोषणा जमा बीमा के साथ की जाएगी या नहीं। लेकिन इतना स्पष्ट है कि बैंकों को दिए जाने वाले प्रीमियम में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। बैंक जमा बीमा के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस ऐंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) को 100 रुपये (100 रुपये पर 10 पैसे के हिसाब से) प्रीमियम का भुगतान करते हैं। जमा बीमा बढ़ाए जाने से बैंकों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय बोर्ड की 13 दिसंबर को भुवनेश्वर में होने वाली बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। ओडिशा आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास का गृह राज्य है। इसके अलावा वित्त मंत्रालय दो अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा कर सकता है। इनमें एक बैंकों को प्रस्तावित सीमा के इतर अतिरिक्त जमा बीमा प्राप्त करने की अनुमति देने से जुड़ा है। एक अतिरिक्त प्रीमियम के साथ व्यक्तिगत या संस्थागत ग्राहकों को यह सुविधा दी जा सकती है। दूसरा प्रस्ताव यह है कि आरबीआई के पूर्ण स्वामित्व वाली सहयोगी कंपनी डीआईसीजीसी उन बैंकों के जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए एक अलग रिजर्व का गठन करेगी जो धोखाधड़ी के कारण नाकाम हो जाते हैं। पंजाब ऐंड महाराष्ट्र अर्बन कोऑपरेटिव बैंक या पैन अर्बन कोऑपरेटिव बैंक जैसे बैंक हाल में धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं। यह साफ नहीं हो सका कि वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक जमा बीमा के लिए जोखिम आधारित प्रीमियम (आरबीपी)पर विचार करेंगे या नहीं। जगदीश कपूर की वर्ष 1999 की रिपोर्ट में पहली बार आरबीपी का जिक्र किया गया था।
Keyword: insurance, company, bank, RBI,,
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