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वित्तीय सेवाओं पर सचिन बंसल का दांव कितना कारगर

युवराज मलिक और विभु रंजन मिश्रा / बेंगलूरु November 17, 2019

पिछले साल मई में सचिन बंसल के फ्लिपकार्ट से बाहर होने के बाद सब की नजरें उनके अगले कदम की ओर टिक गई थीं। उन्होंने कई छोटे-मोटे निवेश किए लेकिन बंसल को करीबी से जानने वाले लोगों का मानना था कि वह लंबे समय के लिए कोई दमदार रणनीति बना रहे होंगे। बंसल ने 2007 में ई-कॉमर्स कंपनी की स्थापना की थी और उससे बाहर होने के बाद अगले कुछ महीनों तक उन्होंने खुद को काफी सीमित कर लिया। इस दौरान उन्होंने यह देखने की कोशिश की कि आगे किन प्रमुख क्षेत्रों में उन्हें तकनीक का फायदा उठाते हुए कारोबार के विस्तार और चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त अवसर मिलेंगे। लेकिन इसका जवाब बंसल को इसी साल सितंबर में उस समय मिल गया जब उन्होंने करीब 740 करोड़ रुपये के निवेश से माइक्रोफाइनैंस कंपनी चैतन्य रूरल इंटरमीडिएशन डेवलपमेंट सर्विसेज (सीआरआईडीएस) में 94 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की।
 
बंसल ने इसी सप्ताह बेंगलूरु में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, 'फ्लिपकार्ट के बाद मैंने एक ब्रेक लिया और उसके बाद उन तमाम अवसरों का आकलन किया जहां मैं अपना कौशल दिखा सकता हूं। मैंने स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा और इन क्षेत्रों में मौजूद खाइयों पर गौर किया।' उन्होंने कहा, 'करीब पिछले साल के आखिर में मैंने अंतत: वित्तीय सेवाओं के बारे में निर्णय लिया।' उसके बाद बंसल ने सीआरआईडीएस के सीईओ पद की जिम्मेदारी संभाली और अब उस मोर्चे पर वह सबकुछ संचालित कर रहे हैं। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, उनकी तात्कालिक योजना फिजिकल बुनियादी ढांचे में अधिक निवेश किए बिना और तकनीकी का फायदा उठाते हुए कंपनी के परिचालन का विस्तार तेजी से करना है। वह जितना जल्द हो सके सीआरआईडीएस की मौजूदगी को मौजूदा 5 राज्यों से बढ़ाकर 10 राज्यों तक करना चाहते हैं।
 
बंसल की योजना से अवगत एक सूत्र ने कहा, 'बुनियादी तौर पर सचिन यह करने की कोशिश कर रहे हैं कि आप लागत में उल्लेखनीय कमी लाने और सेवाओं की डिलिवरी में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का किस तरह इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि  उधारी लागत में भी गिरावट आए और बेहतर रिटर्न भी मिल सके।' उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि माइक्रोफाइनैंस के अलावा वह थोड़े समय बाद व्यापक वित्तीय सेवा क्षेत्र पर भी गौर करेंगे। बंसल ने कहा, 'इस क्षेत्र में मौजूद अवसरों के आकार ने मुझे आकर्षित किया। मैं समझता हूं कि वित्तीय सेवा के किसी भी श्रेणी में पहुंच का स्तर इतना सीमित है कि अगले 1 से 15 वर्षों के दौरान इस समस्या से निपटने के लिए भारत को काफी अधिक डॉलर और काफी अधिक स्टार्टअप की जरूरत होगी।' उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के विकास के साथ ही मध्य वर्ग श्रेणी के लोगों की संख्या बढ़ेगी। उनमें से तमाम लोग शहरों की ओर पलायन करेंगे अथवा कारोबार शुरू करेंगे जिससे न केवल ऋण बाजार के लिए अपार संभावनाएं पैदा होंगी बल्कि अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए भी। उन्होंने कहा, 'आज, समस्या यह है कि यहां (वित्तीय उत्पादों) तक उनकी (मध्य वर्ग) पहुंच नहीं है।'
 
पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत वित्तीय क्रांति की दौर से गुजरा है। अब करीब एक दर्जन भुगतान ऐप मौजूद हैं, यूपीआई की पहुंच क्रेडिट व डेबिट कार्ड से भी अधिक हो गई है और फोनपे एवं पेटीएम जैसी शीर्ष फिनटेक कंपनियों का आकार अरबों डॉलर का हो गया है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल वर्षों के दौरान भारत में करीब 1,000 फिनटेक कंपनियों का उदय हुआ है। बड़ी फिनटेक कंपनियों के विपरीत बंसल द्वारा परिचालित सीआरआईडीएस पहली बार अपने वित्तीय उत्पादों के लिए गैर-शहरी उपयोगकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। चैतन्य की स्थापना 2009 में हुई थी और वह पांच राज्यों में कम आय वर्ग के ग्राहकों को वाहन ऋण, शिक्षा ऋण और छोटेमोटे कारोबार के लिए ऋण उपलब्ध कराती है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019 में उसने करीब 800 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया और उसकी कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 567 करोड़ रुपये की थीं।
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