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ब्लॉकचेन रोकेगी चाय में मिलावट, रखेगी नजर

अभिषेक रक्षित / कोलकाता November 17, 2019

देश में चाय की खपत बढ़ाने के लिए भारतीय चाय बोर्ड ने ब्लॉकचेन तकनीक के जरिये चाय की खेती से लेकर खरीदार को चाय बेचने तक हर चरण पर पुख्ता नजर रखने का फैसला किया है। इससे न केवल भारतीय चाय में मिलावट खत्म करने में मदद मिलेगी जिससे उपभोक्ताओं को चाय का बेहतर स्वाद मिलेगा, बल्कि इससे भारतीय चाय की पहचान बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी। चाय के संबंध में बेहतर अनुभव से इसकी खपत को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है। चाय बोर्ड ने चाय व्यापार की पूरी मूल्य शृंखला की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए संपूर्ण तकनीक की रूपरेखा, विकास और शुरुआत के लिए रुचि पत्र मंगाया है। एक तरफ जहां निविदा के माध्यम से चयनित की जाने वाली सलाहकार कंपनी उद्योग में मौजूद उपलब्ध तकनीकों का अध्ययन करेगी, वहीं वह मोबाइल ऐप तथा ब्लॉकचेन जैसी नवीनतम और उभरती हुई तकनीकों के मेल पर भी सुझाव देगी ताकि उसे मौजूदा प्रणाली के साथ जोड़ा जा सके। ऐसा करने से अलग-थलग पड़ी ऐप्लिकेशन इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली की घेराबंदी का रूप अख्तियार कर लेगी।
 
इसके परिणामस्वरूप निर्माताओं द्वारा कच्चे माल की खरीद से लेकर नीलामी के जरिये प्राथमिक खरीदारों के लिए निर्मित चाय का निपटान करने तक पूरी आपूर्ति शृंखला को जद में लिया जा सकेगा। इस एकीकरण से चाय उद्योग को डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा में लाने और विपणन क्षेत्र के डिजिटलीकरण की खुबियों द्वारा भारतीय मूल की चाय पर निगाह रखने में अंतिम उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल ऐप के माध्यम से कमियां उजागर करने पर चाय की गुणवत्ता और अन्य विषयों से संबंधित शीघ्र समाधान में भी मदद मिलेगी। चाय पर निगाह रखने की जरूरत मुख्य रूप से खराब गुणवत्ता वाली चाय बढऩे के कारण पैदा हुई है जिस वजह से उपभोक्ता अपनी खरीद बढ़ाने से बच रहे हैं।
 
भारतीय चाय बोर्ड के चेयरमैन विवेक गोयनका ने कहा कि अगर वास्तव में निगाह रखी जा सकती है तो ऐसा करना उद्योग के लिए अच्छा है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को यह पता चल सकेगा कि चाय की उत्पत्ति किस बागान और किस इलाके में हुई है, बल्कि अगर चाय में कोई मिलावट होती है तो उसकी भी निगरानी की जा सकती है। चूंकि ब्लॉकचेन तकनीक उत्पादन के प्रत्येक चरण के आंकड़े रखेगी इसलिए यह पता लगाना आसान होगा कि उत्पादन प्रक्रिया के किस चरण में चाय में मिलावट की गई या गुणवत्ता में गिरावट आई। कुछ बागान मालिक खराब चाय को सस्ती चाय कहते हैं, जबकि चाय बोर्ड ऐसी चाय को बुरा मानता है जो मानव उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं होती।
 
बोर्ड ने उद्योग को चाय में किसी भी रंग का मिश्रण नहीं करने की सलाह दी है। कई बार नीलामी में पेश की जाने वाली या निजी रूप से बेची जाने वाली चाय में ऊपर से रंग मिला दिया जाता है ताकि उसकी कमियों को छिपाया और उसकी रंगत को बढ़ाया जा सके। काली चाय में आमतौर पर पलंबैगो मिलाया जाता है जिसका इस्तेमाल लेड पैंसिलों में किया जाता है। इसी तरह कुछ मामलों में चाय को रंग प्रदान करने के लिए प्रशियन ब्लू का भी इस्तेमाल किया जाता है जो एक जहरीला तत्व होता है।
 
बोर्ड के अनुसार प्रशियन ब्लू, हल्दी, नील या किसी अन्य रंग वाले मिश्रण के साथ प्रसंस्कृत पत्ति की चाय में मिलावट की जाती है। बागान मालिकों ने कहा कि नेपाल से करीब 15 लाख किलोग्राम चाय भारत में आती है और इसे दार्जिलिंग चाय के रूप में उपभोक्ताओं को दिया जाता है। हालांकि उपभोक्ताओं को दार्जिलिंग चाय खरीदने के लिए बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ता है लेकिन असलियत यह है कि कुछ मामलों में उपभोक्ताओं को नेपाल की चाय पिलाकर मूर्ख बनाया जाता है।
Keyword: blockchain, tea, bagan,,
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