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गेल का गैस व्यवसाय सुस्त, क्या जल्द खत्म होगा बुरा वक्त!

उज्ज्वल जौहरी /  November 17, 2019

सितंबर तिमाही के प्रदर्शन को लेकर निराशा का सामना करने वाली भारत की सबसे बड़ी गैस पारेषण एवं व्यापार कंपनी गेल के शेयर को पहले से ही कमजोर बाजार रुझान का सामना करना पड़ा है। यह शेयर जून के 180 रुपये के स्तर से नीचे आया है और बुधवार को 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 123.80 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि बिक्री के मोर्चे पर गेल का प्रदर्शन दूसरी तिमाही में मजबूत बना रहा, लेकिन उसके कमजोर परिचालन प्रदर्शन ने निवेशकों को निराश किया है। एलपीजी एवं लिक्विड हाइड्रोजन सेगमेंट के कमजोर मुनाफे की वजह से परिचालन प्रदर्शन अनुमान की तुलना में कमजोर रहा। 

 
दूसरी तिमाही में परिचालन मुनाफा तिमाही आधार पर 30.8 प्रतिशत और सालाना आधार पर 47 प्रतिशत घटकर 1,563 करोड़ रुपये रह गया। ये आंकड़े मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों के अनुमानों की तुलना में काफी कम हैं। इस ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी का परिचालन लाभ 2,329 करोड़ रुपये पर रहने का अनुमान जताया था। हालांकि परिदृश्य उतना खराब नहीं है जितना कि इस शेयर पर प्रभाव दिख रहा है। देश के कुछ उर्वरक संयंत्रों के बंद होने और कुछ अन्य के शुरू होने में विलंब से कंपनी को कुछ बिक्री हाजिर बाजार में करने के लिए बाध्य होना पड़ा, जिससे गैस व्यापार/विपणन व्यवसाय का मुनाफा प्रभावित हुआ। सितंबर तिमाही में इसका मुनाफा या एबिटा सालाना आधार पर लगभग 74 प्रतिशत नीचे आया।
 
गेल के गैस पारेषण सेगमेंट के मुनाफे में भी 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, क्योंकि कंपनी ने हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (एचवीजे) और दारी पानीपत (डीवीपीएल) जैसी कुछ पाइपलाइनों की दरों में पूर्वप्रभावी समायोजन के एकमुश्त नुकसान का सामना करना पड़ा। जहां प्राकृतिक गैस कीमतों में गिरावट बरकरार है, वहीं अधिक आपूर्ति की वजह से प्राप्तियां प्रभावित हो रही हैं और पेट्रोकेमिकल व्यवसाय में मार्जिन पर भी दबाव बना हुआ है। पेट्रोकेमिकल और लिक्विड हाइड्रोकार्बन की बाजार कीमत में 8 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की गिरावट के अलावा अंतरराष्टï्रीय बाजार में गैस कीमतों में नरमी से वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में गेल का मुनाफा प्रभावित हुआ। 
 
जहां प्राप्तियों में दबाव के साथ पेट्रोकेमिकल, एलपीजी और लिक्विड हाइड्रोकार्बन सेगमेंट्स को लेकर चिंताएं बरकरार हैं, वहीं बाजार सबसे बड़े गैस व्यापार एवं पारेषण सेगमेंट में सुधार पर नजर लगाए रहेगा। इन सेगमेंट का गेल के वित्तीय प्रदर्शन में 80 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान है। साथ ही कुछ सकारात्मक बदलाव भी आए हैं। दूसरी तिमाही के कमजोर प्रदर्शन के बाद जहां विश्लेषकों ने गेल के लिए अपने वित्त वर्ष 2020 के अनुमानों में कमी की है, वहीं उन्हें गेल के गैस पारेषण एवं व्यापार खंडों में मजबूत बिक्री एवं मुनाफे की भी संभावना दिख रही है। उनका मानना है कि इससे वित्त वर्ष 2021 के आंकड़ों को मजबूती मिलेगी।
 
मांग के संदर्भ में, कमजोर गैस कीमतों, देश में बेहतर गैस उपलब्धता, गैस वितरकों द्वारा नए क्षेत्रों में विस्तार किए जाने, और औद्योगिक इकाइयों पर प्रदूषण को लेकर सख्ती से गेल के लिए मांग और बिक्री में सुधार आने की संभावना है। वाहनों द्वारा सीएनजी मांग भी बढ़ेगी, क्योंकि यह काफी सस्ती है और गैसोलिन तथा डीजल के मुकाबले स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल है। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का मानना है कि गैस उपलब्धता में सुधार आने से गेल की गैस पारेषण बिक्री वित्त वर्ष 2023 तक 30 प्रतिशत बढ़ जाएगी।  
 
पारेषण बिक्री को पेट्रोनेट एलएनजी द्वारा हाल में जोड़ी गईं क्षमताओं से भी मदद मिलेगी, क्योंकि कोच्चि-मंगलूरु पाइपलाइन दिसंबर 2019 में चालू होने और वित्त वर्ष 2022 तक पूर्वी भारत में पाइपलाइनों के पूरा होने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि इसके अलावा मैटिक्स/रामागुंडम उर्वरक संयंत्रों के योगदान के साथ पूर्वी भारत में पाइपलाइनों के साथ तीन उर्वरक संयंत्रों के पूरा होने और गैस इस्तेमाल के लिए मंगलूरु केमिकल्स ऐंड फर्टिलाइजर्स संयंत्र से 60 प्रतिशत अनुबंधों का जोखिम दूर हो सकता है। 
 
कुल मिलाकर, विश्लेषक गेल पर सकारात्मक नजरिया अपनाए हुए हैं। जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के लिए नकारात्मक बातों का ज्यादातर असर शेयर पर दिख चुका है। यह शेयर पिछले एक साल के दौरान लगभग 30 प्रतिशत गिरा है। इन ब्रोकरों के कीमत लक्ष्य इस शेयर में 53 प्रतिशत तक की तेजी का संकेत देते हैं। 
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