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बुढ़ापे में नियमित आय के लिए कौन सी योजना आजमाएं

संजय कुमार सिंह /  November 17, 2019

मौजूदा नियमों के तहत राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) कोष की 40 प्रतिशत रकम का निवेश सेवानिवृत्ति के समय अनिवार्य रूप से एन्युटी में होना चाहिए। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने सरकार से कानून में बदलाव का आग्रह किया है ताकि निवेशक अपनी रकम वैकल्पिक सिस्टैमिक विदड्रॉल प्लान्स (एसडब्ल्यूपी) में डाल सकें। आइए, इसके मद्देनजर एन्युटी और ऐसी दूसरी योजनाओं के अच्छे और बुरे पहलुओं पर विचार करें जिनका इस्तेमाल सेवानिवृत्त लोग नियमित आय के लिए कर सकते हैं। 

 
एन्युइटी दीर्घ अवधि के जोखिम से निपटने में मदद करती है। जिन लोगों ने एक पर्याप्त कोष तैयार नहीं किया है उनको अपनी सारी बचत खर्च होने का जोखिम रहता है। एन्युटी योजना लेकर वह जीवन की शेष अवधि में नियमित आय सुनिश्चित कर सकते हैं। हालांकि महंगाई जरूर इस पर असर डालेगी। अगर किसी ने बेहतर ब्याज दर वाली कोई योजना ले रखी है तो एन्युटी की मदद से वह दोबारा निवेश के जोखिम से बच सकता है। पर्सनल फाइनैंसप्लान के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'मान लीजिए कि कोई व्यक्ति 60 साल की उम्र में 6 प्रतिशत ब्याज देने वाली एन्युटी योजना खरीदता है। 20 साल के बाद अगर ब्याज कम होकर 2-3 प्रतिशत भी रह जाता है तब भी उसे ब्याज की वही दर मिलती रहेगी।' 
 
ऐसी योजनाओं में कुछ खामियां भी होती हैं। पहली बात तो यह कि प्रतिफल दर काफी कम हो सकती है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी विशाल धवन कहते हैं, 'चूंकि एन्युटी प्रदाता इकाइयों को उम्र लंबी होने के जोखिम का ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए उनमें ब्याज दरें कम होती हैं।' अगर खरीदी गई एन्युटी वापस लौटाने का विकल्प हो तो उसमें रिटर्न और भी कम हो जाता है। हालांकि यह विकल्प ज्यादा लोकप्रिय है। इस विकल्प में खरीदार को जिंदगी भर आय मिलती है और उसकी मृत्यु होने पर मूलधन उसके द्वारा नामित (नॉमिनी) व्यक्ति को लौटा दिया जाता है। इस विकल्प में निवेशक की पूंजी तक पहुंच नहीं होती है। एन्युटी से प्राप्त आय पर कर लगता है। 
 
वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि सेवानिवृत्त व्यक्ति एन्युटी खरीद सकते हैं और इसमें कुछ शर्तें जोड़ सकते हैं। धवन कहते हैं, 'जिनके पास एक बड़ा कोष होता है और जो अपनी पूंजी को छेडऩा नहीं चाहते, वे भी कुछ हिस्सा एन्युटी में डाल सकते हैं।' राघव के अनुसार एन्युटी जरूर खरीदें लेकिन सही उम्र में इसमें सही विकल्प का चयन करें। वह कहते हैं, 'मूल पूंजी वापस चाहने का विकल्प न लिया जाए तो उसमें ज्यादा बेहतर प्रतिफल मिलता है। एन्युटी की दर 70 वर्ष की उम्र के बाद खासी आकर्षक हो जाती है।'
 
सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय पाने के लिए सेवानिवृत्त लोग कुछ दूसरी योजनाओं पर भी विचार कर सकते हैं। इनमें एक वरिष्ठ नागरिक बचत योजना है, जो 8.6 प्रतिशत की दर से पक्का प्रतिफल देती है। इसमें आप पांच वर्ष तक एक निश्चित ब्याज दर के साथ बने रह सकते हैं। हालांकि इस योजना में प्राप्त ब्याज आमदनी कर योग्य होती है। कोई व्यक्ति अधिकतम 15 लाख रुपये निवेश कर सकता है, जबकि एक दंपति 30 लाख रुपये निवेश कर सकता है। मगर यह पर्याप्त नहीं भी हो सकती है। 
 
वरिष्ठ नागरिक प्रधानमंत्री वय वंदन योजना का विकल्प भी चुन सकते हैं। यह योजना 8.3 प्रतिशत मासिक और 8 प्रतिशत सालाना प्रतिफल देती है। यह निवेशकों को दस वर्ष के लिए एक नियत ब्याज दर का लाभ उठाने की सुविधा भी देती है। सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) से भी कर मुक्त आय सृजित की जा सकती है बशर्ते आपने इसमें बने रहने की न्यूनतम 15 वर्ष की अवधि पूरी कर ली हो। इसके बाद आप साल में एक बार रकम निकाल सकते हैं। अगर आपने अपने योगदान के साथ इसकी अवधि बढ़ा ली है तो आप विस्तार की तारीख से उसमें मौजूद राशि का 60 फीसदी तक अगले पांच साल के दौरान निकाल सकते हैं। अगर बिना अंशदान के साथ पीपीएफ खाते की अवधि बढ़ाई गई है तो आप साल में एक बार कितनी भी रकम निकाल सकते हैं।
 
वरिष्ठ नागरिक डेट फंडों के एसडब्ल्यूपी में भी निवेश कर सकते हैं। एक्विरस वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य कार्याधिकारी अंकुर माहेश्वरी कहते हैं,'रकम कितनी निकाली जाए , इस संबंध में छूट होती है। अगर निकासी तीन वर्ष बाद शुरू होती है तो निवेशक दीर्घ अवधि के पूंजीगत कर लाभ की छूट का भी फायदा उठा सकते हैं। ऊंचे कर दायरे में आने वाले लोगों के लिए यह यह आकर्षक विकल्प होता है।' भारत सरकार के बॉन्ड और कर-मुक्त बॉन्ड कुछ ऐसे दूसरे विकल्प हैं, जिन पर वरिष्ठ नागरिक विचार कर सकते हैं। 
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