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वित्तीय उपहार की राह में बाधाएं भी आती हैं दो-चार

तिनेश भसीन /  November 17, 2019

किसी व्यक्ति का वित्तीय भविष्य सुरक्षित करना संभवत: एक  श्रेष्ठ उपहार माना जा सकता है। अपने निकट संबंधियां को नकद रकम देने के बजाय उन्हें प्रीपेड कार्ड, सोना या कोई ऐसा उपहार दिया जा सकता है, जो भविष्य में उनके लिए वित्तीय रूप में मददगार हो सकता है। मिसाल के तौर पर किसी को उपहार में दिए गए शेयर या इक्विटी का मूल्य कई साल में अच्छा-खासा बढ़ सकता है। एक छोटी सी रकम नाबालिग के भविष्य में वयस्क होने के समय बड़ा कोष बन सकती है। उदाहरण के लिए आप अपने किसी निकट संबंधी को 2 लाख रुपये मूल्य की इक्विटी योजना उपहार स्वरूप देते हैं। 15 वर्षों के दौरान अगर हरेक साल 12 प्रतिशत की दर से प्रतिफल मिले तो यह रकम 10.95 लाख रुपये हो सकती है। इसी दर पर 5 लाख रुपये अगले 20 वर्षों में 48.23 लाख रुपये हो सकते हैं।

 
हालांकि प्रत्येक वित्तीय योजना अलग-अलग नियामकों के दायरे में आती है, इसलिए उपहार देने से जुड़े नियम भी अलग-अलग होते हैं। बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के मामले में आप एक अपने नाम पर और संयुक्त रूप से एक खाता रिसीवर के नाम पर खोल सकते हैं। आपको दोनों खाताधारकों के लिए नो योर कस्टमर (केवाईसी) प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अगर रिसीवर नाबालिग है तो उसके पास संभवत: केवाईसी संबंधी कोई प्रमाण नहीं होगा। लिहाजा इस मामले में आप अभिभावक हो सकते हैं। जब एफडी परिपक्व होगी तो बैंक स्रोत पर कर कटौती कर शेष रकम प्राप्तकर्ता को दे देगा। अगर रिसीवर वयस्क है तो रकम उसकी आय में जोड़ कर कर लगेगा। नाबालिग के मामले में आयकर अधिनियम के तहत आय जोडऩे के प्रावधान लागू होंगे।
 
म्युचुअल फंड के मामले में चीजें थोड़ी पेचीदा होती हैं। ज्यादातर मामलों में म्युचुअल फंड दो वयस्क लोगों के बीच यूनिट उपहार में देने की अनुमति नहीं देते हैं। क्वांटम म्युचुअल फंड में कस्टमर डिलाइट के प्रमुख हर्षद चेतनवाला कहते हैं, 'पति और पत्नी के मामले में भी दोनों के लिए प्राथमिक एवं द्वितीयक खाताधारक होना जरूरी है। अगर पति प्राथमिक खाताधारक है तो चेक पति के खाते से या संयुक्त खाते का होना चाहिए। पत्नी के खाते से हस्तातंरण की इजाजत नहीं दी जाएगी क्योंकि वह द्वितीयक फोलियो होल्डर है।' 
 
चेतनवाला के अनुसार मित्र एक दूसरे को म्युचुअल फंड के यूनिट उपहार में नहीं दे सकते हैं। निकट संबंधी एक दूसरे को उपहार दे सकते हैं, लेकिन उनका संयुक्त खाता होना चाहिए और उनका संयुक्त फोलियो धारक होना भी जरूरी है। दाता को प्राथमिक फोलियो धारक होना चाहिए। नाबालिग को म्युचुअल फंड के यूनिट उपहार में देना अपेक्षाकृत आसान है। अगर दादा/चाचा अपने पोते/भतीजे को यूनिट उपहार में देना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें थर्ड-पार्टी डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा, जिस पर माता-पिता और दाता को हस्ताक्षर करने होंगे। प्रत्येक लेनदेन की सीमा 50,000 रुपये तक सीमित है। शेयर का आदान-प्रदान सबसे आसान होता है। दाता इन्हें सीधे रिसीवर के डीमैट खाते में हस्तांरित कर सकते हैं। जीवन बीमा के मामले में बीमा कंपनियां सबसे पहले यह देखती हैं कि पॉलिसी दान देने वाले के बीमा हित हैं या नहीं। इसका मतलब यह हुआ कि बीमित व्यक्ति की मौत की स्थिति में उसके पास संभावित आर्थिक नुकसान का पुख्ता सबूत होना चाहिए। मित्र या दूरस्थ संबंधियों के बीमा हित नहीं होते हैं। लिहाजा वे जीवन बीमा पॉलिसियां उपहार में नहीं दे सकते हैं। 
 
बीमा कंपनियां निकट संबंधियों को जैसे दादा अपने पोते को जीवन बीमा पॉलिसियां उपहार में देने की छूट देती हैं। लेकिन अगर चाचा अपने भतीजे या भतीजी के लिए पॉलिसी खरीद रहा है तो बीमा कंपनियां उससे बीमा से जुड़े हित के संबंध में अतिरिक्त सवाल पूछते हैं और उसके बाद ही किसी तरह की इजाजत देती हैं। बजाज लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में प्रमुख (लीगल ऐंड कम्प्लायंस) अनिल पीएम कहते हैं,'इसमें नैतिक खतरे से जुड़ा सिद्धांत भी काम करता है। इस कारण दादा-दादी या माता-पिता अपनी अगली पीढ़ी को जीवन बीमा पॉलिसी उपहार में दे सकते हैं, लेकिन किसी दूसरे रूप में नहीं। बच्चे अपने माता-पिता या नाती-पोते अपने दादा-नाना के लिए पॉलिसियां नहीं खरीदे सकते हैं।'
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