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एस्सार फैसला अन्य समाधान मामलों के लिए होगा मिसाल

निधि राय / मुंबई November 15, 2019

बैंकरों का कहना है कि एस्सार स्टील-आर्सेलर मित्तल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के बहुप्रतीक्षित फैसले ने लेनदारों की समिति (सीओसी) की श्रेष्ठïता साबित की है और इससे अन्य लंबित समाधान मामलों के लिए एक उपयुक्त मिसाल कायम हुई है। सर्वोच्च न्यायालय ने नैशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के उस निर्णय को रद्द कर दिया है जिसमें वित्तीय और परिचालन लेनदारों के बीच रकम के समान वितरण की बात कही गई थी। इसका मतलब है कि 25 अक्टूबर 2018 की समाधान योजना के अनुसार वितरण प्रक्रिया को सीओसी द्वारा मंजूर किया जाएगा। इसलिए अब सुरक्षित या वित्तीय लेनदारों को दावे की 92 प्रतिशत रकम (लगभग 42,000 करोड़ रुपये) मिलेगी। 
 
इस अदालती निर्णय का सबसे बड़ा लाभार्थी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) होगा, जिसका 13,226 करोड़ रुपये का निवेश फंसा हुआ है और इस निर्णय के बाद 92 प्रतिशत तक कवर होने की संभावना है। एसबीआई के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार खारा ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, 'यह एक स्वागत योग्य पहल है। इससे अन्य मामलों के लिए भी उदाहरण पेश होगा।' एक बैंकर ने नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, '11,000-12,000 करोड़ रुपये की कुल रकम प्रत्यक्ष रूप से मुनाफे में जुड़ेगी और इससे टियर-1 पूंजी में इजाफा होगा।'
 
सिंडिकेट बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी मृत्युंजय महापात्र का मानना है कि प्राप्त संसाधनों का इस्तेमाल उत्पादक गतिविधियों के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हमारा 1,000 करोड़ रुपये का निवेश है और हमने इसके लिए पूरी तरह से प्रावधान किया है। हमें 80 प्रतिशत रकम प्राप्त होने की संभावना है। इससे हमारे पूंजी संसाधन मजबूत होंगे और प्रावधान के तहत शामिल रकम का इस्तेमाल अन्य गतिविधियों में किया जाएगा। यह अदालती निर्णय एक शानदार मिसाल कायम करेगा।'
 
परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियां (एआरसी) भी इस फैसले से लाभान्वित होंगी। फंसी परिसंपत्तियों की पुन: बिक्री के लिए बाजार बढ़ेगा और बैंकों को भविष्य में ऋण के मूल्य निर्धारण के संदर्भ में बेहतर स्पष्टïता हासिल होगी।  एडलवाइस एआरसी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी आर के बंसल ने कहा, 'इस निर्णय ने बकाएदारों की समिति की श्रेष्ठïता साबित की है और उसे ताकत प्रदान की है। इस अन्य मामलों के तेज निपटारे में भी मदद मिलेगी। यह फंसी परिसंपत्तियों की श्रेणी में आगामी निवेश के लिए भी मददगार साबित होगा।'
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