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मित्तल के लिए खुले भारत के द्वार

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता November 15, 2019

उच्चतम न्यायालय ने कर्ज में फंसी एस्सार स्टील को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का आज पटाक्षेप कर दिया और इस्पात बनाने में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी आर्सेलरमित्तल के भारत आने का रास्ता साफ कर दिया। शीर्ष अदालत ने एक अहम फैसला दिया, जिसका असर ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संंहिता (आईबीसी) के तहत आने वाले तमाम मामलों पर पड़ेगा उसने राष्ट्रीय कंपनी लॉ अपील पंचाट (एनसीएलएटी) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें वित्तीय ऋणदाताओं और परिचालन ऋणदाताओं तथा सुरक्षित और असुरक्षित वित्तीय ऋणदाताओं को एकसमान माना गया था।
 
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने फंसी संपत्तियों के समाधान के लिए 330 दिन की संशोधित समयसीमा में भी ढील दी है। अदालत ने कहा कि इस मियाद के भीतर समाधान अनिवार्य नहीं है, जिससे प्राधिकरण या पंचाट को कुछ खास परिस्थितियों में मियाद बढ़ाने का मौका मिल जाएगा। अदालत ने आर्सेलरमित्तल को 23 अक्टूबर, 2019 की समाधान योजना के अनुसार 42,000 करोड़ रुपये की बोली राशि का भुगतान करने की इजाजत दे दी। इस समाधान योजना को ऋणदाताओं की समिति ने 27 मार्च को संशोधित और स्वीकार किया था। इसके तहत 1 करोड़ रुपये से से अधिक परिचालन ऋण देने वालों को 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने की व्यवस्था की गई थी। आर्सेलरमित्तल के प्रवक्ता ने कहा, 'अदालत के फैसले से हम बहुत खुश हैं। हम जल्द से जल्द इस अधिग्रहण को पूरा करेंगे।' 
 
इस अधिग्रहण से आर्सेलरमित्तल घरेलू बाजार में चौथी सबसे बड़ी स्टील कंपनी हो जाएगी। सूत्रों ने संकेत दिया कि वित्तीय ऋणदाताओं को भुगतान के लिए कोई समयसीमा नहीं है, लेकिन समझौता होने और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दो हफ्तों में भुगतान हो जाने की उम्मीद है।समाधान पेशेवर सतीश कुमार गुप्ता ने कहा कि अदालत के आदेश से एस्सार स्टील इंडिया के लिए आर्सेलरमित्तल की समाधान योजना पर आज मुहर लग गई। यह मामला निपटने से वित्तीय प्रणाली में 42,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी आएगी।एस्सार स्टील चूक करने वाली उन 12 बड़ी कंपनियों में से थी, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक ने आईबीसी के तहत समाधान के लिए चुना था। एस्सार पर वित्तीय ऋणदाताओं का करीब 49,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसमें 42,000 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसके कारण यह गैर-निष्पादित आस्तियों का सबसे बेहतर समाधान बन कहलाएगा।शीर्ष अदालत के फैसले से एस्सार के प्रवर्तक रुइया घराने और आर्सेलरमित्तल के बीच एक साल से चल रहे विवाद का भी निपटारा हो गया। एस्सार के प्रवक्ता ने कहा, 'हम आर्सेलरमित्तल और निप्पॉन स्टील के भारतीय बाजार में आगमन का स्वागत करते हैं। वे विश्व-स्तरीय प्रतिष्ठान अधिग्रहण करने जा रहे हैं, जिसमें दीर्घावधि में विस्तार की व्यापक संभावना है।'
 
गुप्ता ने बताया कि कॉरपोरेट ऋणशोधन समाधान प्रक्रिया के दौरान कीमत अधिक से अधिक रखने के लिए विभिन्न हितधारकों में सहमति बनाने, परिचालन  सुधारने तथा समाधान आवेदकों समेत विभिन्न प्रकार के मुकदमों से जूझने समेत कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।प्रवर्तक समूह ने एस्सार स्टील पर दोबारा कब्जा हासिल करने की कोशिश की थी। उसने 54,000 करोड़ रुपये की पेशकश की थी, जिसे एनसीएलटी ने खारिज कर दिया था। ऋणदाताओं की समिति का प्रतिनिधित्व करने वाले शार्दूल अरमचंद मंगलदास ऐंड कंपनी में पार्टनर एवं बैंकिंग तथा फाइनैंस के राष्ट्रीय प्रमुख सपन गुप्ता ने कहा कि यह आदेश तीन जजों के पीठ ने सुनाया है और पूर्व प्रवर्तकों समेत सभी हितधारकों को इसका पालन करना ही होगा।आर्सेलरमित्तल के लिए एस्सार स्टील के अधिग्रहण का रास्ता साफ करने के साथ ही इस आदेश से आईबीसी के तहत कई विवादास्पद मुद्दे भी निपटा दिए गए। सपन गुप्ता ने कहा कि अदालत ने ऋणदाताओं की समिति द्वारा प्राप्त रकम के वितरण की योजना स्वीकार कर ली है और और इस तरह वित्तीय ऋणदाताओं को वरीयता दी है। 
 
इस आदेश से एनसीएलटी और एनसीएलएटी में लंबित आईबीसी के सैकड़ों मामले निपट जाएंगे। एनसीएलएटी ने बोली की रकम को सभी लेनदारों के बीच समान अनुपात में बांटने का प्रस्ताव किया था। इसका मतलब यह था कि 42,000 करोड़ रुपये में से 91.99 फीसदी के बजाय केवल 60.7 फीसदी हिस्सा सुरक्षित लेनदारों को मिलता। एनसीएलएटी के आदेश की वजह से सरकार को आईबीसी में संशोधन करना पड़ा था ताकि वित्तीय ऋणदाताओं को वरीयता मिल सके। लेकिन इस संशोधन को एस्सार के परिचालन ऋणदाताओं ने इस संशोधन को अदालत में चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि समाधान योजना के तहत भुगतान के मामले में सुरक्षित और असुरक्षित वित्तीय ऋणदाताओं के बीच अंतर करना होगा।अदालत ने ऋणदाताओं की समिति को लेनदारों को वर्गीकृत करने और सुरक्षित ऋणदाताओं को उनकी सुरक्षित राशि के आधार पर भुगतान करने की पूरी स्वतंत्रता दी है।
Keyword: ArcelorMittal, court, steel, IBC, NCLT,
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