बिजनेस स्टैंडर्ड - स्वाभाविक है मकानों की कीमतों में कमी आना
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, December 15, 2019 05:34 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

स्वाभाविक है मकानों की कीमतों में कमी आना

नीति नियम
मिहिर शर्मा /  November 14, 2019

यह राहत की बात है कि केंद्र सरकार यह स्वीकार करती दिख रही है कि देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से गिरावट आ रही है। यह गिरावट तमाम क्षेत्रों में आ रही है। इसके लिए तमाम चक्रीय और ढांचागत कारक मौजूद हैं। दिक्कत यह है कि समस्या को गलत समझा जा रहा है और समस्या के बारे में हमारी समझ भी कम है। इसके लिए उच्च स्तर पर आर्थिक विशेषज्ञता की कमी उत्तरदायी है। इससे हुआ यह कि ढेर सारे निर्णय गलत दिशा में उठाए गए। केंद्रीय मंत्रिमंडल के 7 नवंबर के उस निर्णय को देखिए जिसमें उसने 25,000 करोड़ रुपये का वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) बनाने की बात कही है ताकि अचल संपत्ति क्षेत्र की लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके। यहां मसला एकदम स्पष्ट है। इस क्षेत्र में 1,500 से अधिक लंबित परियोजनाएं हैं। इसके चलते करीब 5 लाख आवासीय इकाइयां प्रभावित हो रही हैं। 

 
इनमें से दो तिहाई से अधिक ग्रेटर मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हैं। इन परियोजनाओं के डेवलपरों ने परियोजना विकास के लिए ऋण ले रखा है। वे पैसे के अभाव में परियोजना को पूरा नहीं कर सकते। बैंक पहले ही फंसे कर्ज की समस्या से दो चार हैं। वे और पैसा फंसाना नहीं चाहते। एआईएफ के माध्यम से इस गतिरोध को तोडऩे का प्रयास है ताकि कुछ परियोजनाएं पूरी हो सकें और बाजार अपना सामान्य कामकाज शुरू कर सके। इसके कुछ सकारात्मक पहलू हैं। पहली बात, निजी पूंजी में तनावग्रस्त परिसंपत्ति को लेकर उस स्थिति में लगाव नजर आ रहा है जबकि सरकार इसमें स्पष्ट साझेदार हो। दूसरा, एआईएफ अपेक्षाकृत अधिक लागत वाली योजनाओं में रुचि लेगा जिनके कारण यह क्षेत्र अवरुद्घ है। मुंबई और दिल्ली में ऐसे आवास क्रमश: दो करोड़ रुपये और 1.5 करोड़ रुपये के हैं। धारणा यह है कि यह चक्रीय मुद्दा है जिससे प्रति चक्रीय नीति से निपटा जा सकता है। अमेरिका में अचल संपत्ति क्षेत्र को दिए प्रोत्साहन से तुलना की जा रही है। 
 
परंतु कुछ सवालों के जवाब जरूरी हैं। सबसे बुनियादी सवाल यह है कि क्या 25,000 करोड़ रुपये पर्याप्त होंगे? यह राशि बमुश्किल 16 फीसदी लंबित परियोजनाओं के लिए पर्याप्त रहेगी। बाजार में विश्वास बहाली के लिए बहुत बड़े पैमाने पर राशि की जरूरत होगी। नकदी की किल्लत झेल रही सरकार इतना पैसा नहीं जुटा पाएगी। उम्मीद है कि जीवन बीमा निगम, राष्ट्रीयकृत बैंकों और निजी पूंजी आदि की मदद से यह काम आगे बढ़ेगा। दूसरा सवाल यह है कि क्या निजी पूंजी इस कार्यक्रम में पैसा लगाना सुरक्षित समझेगी? एआईएफ को ऐसे बनाया गया है कि उसमें वे परियोजनाएं भी शामिल हों जो राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट में जा सकती हैं। परंतु हाल में हमने देखा कि ऐसे मामले किसी न किसी कानूनी चुनौती के शिकार हो सकते हैं। वित्तीय जगत में ऐसी प्रक्रिया में शामिल होने की अनिच्छा नजर आती है जहां तमाम कानूनी पहलू हल न हुए हों। 
 
ज्यादा व्यापक तौर पर देखें तो यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि क्या समस्या की सही पहचान की गई है? सरकार का कहना है कि निवेश प्रबंधक चाहें तो परियोजना के डेवलपरों को बदलने पर विचार कर सकते हैं। परंतु ऐसा तो ज्यादातर मामलों में आवश्यक होगा। इसके बावजूद यदि प्रवर्तकों को बदला जाता है तो बने हुए आवासों के निर्माण और वितरण का काम कौन करेगा? एआईएफ या ऋणदाता? या फिर क्या सरकार को एक ऐसा मंच बनाने पर विचार करना चाहिए जो ऐसे बने हुए मकानों की नीलामी की इजाजत दे ताकि सही मूल्य सामने आ सके? दिक्कत यह है कि इनमें से बहुत कम परियोजनाएं उस मूल्य तक पहुंचेंगी जो शुरुआत में इनके लिए तय की गई थी। 
 
ऐसा अर्थव्यवस्था में मांग में कमी आने के कारण हुआ है। इसकी एक वजह यह भी है कि बीते एक दशक में अचल संपत्ति क्षेत्र ने कीमतों में कमी करने से लगातार इनकार किया है। बड़े शहरों में मांग 4 से 5 फीसदी की दर से बढ़ रही है जबकि आपूर्ति में इजाफा दो अंकों में बल्कि 20 फीसदी के आसपास की गति से हो रहा है। करीब 10 लाख मकान अनबिके पड़े हैं। जब मामला इतना विसंगतिपूर्ण हो तो कीमतों में गिरावट के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। परंतु कीमतों में कमी से प्रवर्तक और ऋणदाता दोनों प्रभावित हो सकते हैं जो कोई नहीं चाहता। सरकार को इस समस्या को हल करना होगा। वह मांग में इजाफा नहीं कर सकती। परंतु वह ऋणदाताओं को प्रोत्साहित कर सकती है कि वे स्पष्ट बताएं कि कीमत कम होने और बाजार के सुचारु रूप से काम करने पर उन्हें क्या नुकसान होगा?
 
हमें ऋणदाताओं, परियोजनाओं, मकान मालिकों और डेवलपर के मुताबिक सोचने के बजाय यह देखना होगा कि आवास बाजार की स्थिति कैसे ठीक की जाए? पूरी अर्थव्यवस्था में सफाई की जरूरत है लेकिन यह तमाम वजह से टलती रही और निवेश तथा वृद्घि अपने स्वाभाविक स्तर तक वापस नहीं आ सके। अचल संपत्ति क्षेत्र पूरी समस्या का केवल एक उदाहरण भर है। सरकार को यह स्वीकार करना होगा कि उसे एक स्पष्ट ढांचागत सुधार की आवश्यकता है, बजाय कि इसे चक्रीय समस्या के रूप में देखने की। इसके साथ ही यह सोच भी त्यागनी होगी कि बतौर चक्रीय समस्या इसे अपेक्षाकृत कम धन खर्च करके निपटाया जा सकेगा। 
 
व्यापक अर्थव्यवस्था में अचल संपत्ति क्षेत्र की अहम भूमिका है। केवल इसलिए नहीं कि इससे सीमेंट और इस्पात समेत तमाम क्षेत्र जुड़े हुए हैं। बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह अकुशल श्रमिकों का बहुत बड़ा नियोक्ता और मध्य वर्ग के लिए एक निवेश परिसंपत्ति है। दुनिया के तमाम अन्य मध्यवर्ग की तरह भारतीय मध्य वर्ग को यह सीखना होगा कि आवास कीमतों में गिरावट आ सकती है। आवास किसी व्यक्ति के लिए निवेश परिसंपत्ति नहीं है। इन्हें रहने के लिए खरीदा जाता है।
Keyword: real estate, property, flat, metro city,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बैंकों की तरह सख्त नियम से एनबीएफसी में बढ़ेगी जवाबदेही?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.