बिजनेस स्टैंडर्ड - घोष को सर्वश्रेष्ठ बैंकर का सम्मान
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घोष को सर्वश्रेष्ठ बैंकर का सम्मान

बीएस संवाददाता / मुंबई 11 13, 2019

बीएस बैंकर ऑफ द इयर - 2018-19

बिजनेस स्टैंडर्ड घोष को सर्वश्रेष्ठ बैंकर का सम्मानबंधन बैंक के संस्थापक, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी चंद्र शेखर घोष को 'बिज़नेस स्टैंडर्ड बैंकर ऑफ द इयर फॉर 2018-19' चुना गया है। महज चार साल पहले कोलकाता का उनका लघु वित्त संस्थान अधिसूचित वाणिज्यिक बैंक बना था और आज वह बैंकिंग क्षेत्र में सफलता के नए आयाम गढ़ रहा है। इस शानदार प्रदर्शन के लिए घोष को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एस एस मूंदड़ा की अगुआई वाले पांच सदस्यीय निर्णायक मंडल ने सर्वसम्मति से घोष के नाम पर मुहर लगाई। जूरी के अन्य सदस्यों में भारतीय स्टेट बैंक की पूर्व चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉरपोरेशन के वाइस चेयरमैन और मुख्य कार्याधिकारी केकी मिस्त्री, आईकैन इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के चेयरमैन अनिल सिंघवी और मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी थे। 

निर्णायक मंडल का मानना था कि 59 साल के घोष सही मायनों में इस पुरस्कार के हकदार हैं क्योंकि उनके बैंक ने सभी क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया है। बैंक के अनुपात उद्योग में सबसे बेहतर हैं, परिसंपत्तियों पर रिटर्न (4.25 फीसदी) सबसे अधिक है और लागत ढांचा बैंकिंग उद्योग में सबसे कम (लागत और आय अनुपात 0.32) है। निर्णायक मंडल ने इस पुरस्कार के लिए उन बैंकों को शामिल किया जिनकी परिसंपत्तियों का कुल आकार मार्च 2019 तक 50 हजार करोड़ रुपये और उससे अधिक था और जिनके मुनाफे में पिछले तीन वर्षों में प्रावधान पूर्व बढ़ोतरी हुई थी। इस तरह केवल 14 बैंक ही होड़ में रह गए थे। वित्त क्षेत्र के लिए बीता साल उथलपुथल भरा रहा और इसलिए पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अंतिम तीन उम्मीदवारों को छांटना पिछले मौकों की तुलना में आसान था।

निर्णायक मंडल के एक सदस्य ने कहा कि शुरू से ही बंधन के आंकड़े बहुत दमदार थे और निर्णायक मंडल को आशंका थी कि कहीं यह एक ही घोड़े की दौड़ बनकर न रह जाए। लेकिन निजी क्षेत्र के एक अन्य बैंक के मुख्य कार्याधिकारी कड़े प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे। ऐसा इसलिए था क्योंकि उन्होंने धीमी गति से बढ़ रहे बैंक को दमदार स्थिति में पहुंचा दिया। निर्णायक मंडल ने दोनों बैंकों और बैंकरों के गुणदोषों, उनकी नेतृत्व और प्रबंधन शैली पर विस्तार से चर्चा की। जिस खास पहलू पर ध्यान केंद्रित किया गया था, वह मुश्किल माहौल था जहां ये बैंक काम कर रहे थे।

इसमें बंधन बैंक और घोष बाजी मार गए। बैंक की शाखाओं की लागत कम है लेकिन अपने'हाई टच' मॉडल के साथ वे सफल हैं। बंधन के अधिकांश ग्राहक ऐसे हैं जो बार-बार आते हैं लेकिन पिछले तीन साल में उसका ऋण 42 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा और इस दौरान जमाओं में 53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसमें कोई दोराय नहीं है कि कम आधार के कारण वृद्धि दर में फायदा हुआ लेकिन शुद्ध गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) का अनुपात 0.58 फीसदी रहा। वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में बैंक का सकल एनसीए अनुपात 2.04 फीसदी था। वित्त वर्ष के अंत में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन 8.96 फीसदी रहा। बंधन बैंक के आंकड़ों के इतर घोष की इस बात के लिए भी तारीफ की गई कि उन्हें उधारी परिचालन के बारे में गहरी जानकारी है, उनके पास उधारी परिचालन पर आधारित प्रौद्योगिकी है, वह कठिन वार्ताकार हैं और वह बैंकिंग कामकाज में कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के साथ व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

निर्णायक मंडल के प्रमुख मूंदड़ा ने कहा, 'जूरी ने पुरस्कार की दौड़ में शामिल विभिन्न प्रत्याशियों के कामकाज की शैली पर विचार किया और आखिरकार बंधन बैंक और चंद्र शेखर घोष भारी पड़े क्योंकि सभी अनुपातों में बैंक की वृद्धि दर बहुत मजबूत थी। घोष की दावेदारी दूसरे बैंकरों पर बहुत भारी थी।'उन्होंने कहा, 'बंधन बैंक ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया था और उसने अपने पोर्टफोलियो को बढ़ाने तथा अपना कारोबार फैलाने के लिए दूसरे संस्थानों को भी अपने साथ जोड़ा। बैंक आपूर्ति के लिए कम लागत वाला मॉडल बनाए रखने में सफल रहा, परिसंपत्ति गुणवत्ता पर उसका अच्छा नियंत्रण रहा और उसने  अपने एनआईएम को बचाए रखा जबकि साथ ही कम लागत वाले ढांचे को भी बरकरार रखा।'मार्च 2019 के अंत में पूरे वर्ष के लिए बैंक का शुद्ध मुनाफा 1,952 करोड़ रुपये रहा जो एक साल पहले की तुलना में 45 फीसदी अधिक था। 
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Comments
 
Vinod
14-Nov-19
 
चंद्र शेखर घोष को बहुत बधाई।
  आपका मत
 क्या बैंकों की तरह सख्त नियम से एनबीएफसी में बढ़ेगी जवाबदेही?
हां नहीं  
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