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बेमौसम बारिश में फिसली दलहन की फसल

सुशील मिश्र / मुंबई November 13, 2019

चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई देर से शुरू होने के कारण पिछले साल की अपेक्षा इसमें कमी आई है। बेमौसम बारिश के कारण खरीफ सीजन की दलहन फसल को तो नुकसान पहुंचा ही है, साथ ही रबी सीजन की दलहन फसल की बुआई भी पिछड़ गई है। मौसम में बदलाव के मद्देनजर दलहन उत्पादन में भारत के लिए आत्मनिर्भरता बरकरार रख पाना मुश्किल होगा और देश में दलहन आयात की मात्रा बढ़ेगी। दलहन फसल को प्रोत्साहित करने वाली सरकारी नीतियों के कारण दलहन उत्पादन में देश ने महज एक साल पहले ही आत्मनिर्भरता हासिल की थी जो इस बार की बारिश में फिसलती नजर आ रही है। दरअसल अक्टूबर और नवंबर महीने में हुई बेमौसम बारिश ने फसलों को दोहरा नुकसान पहुंचाया है। एक तरफ खरीफ सीजन की तैयार फसल बरबाद हुई है तो दूसरी तरफ रबी सीजन की फसलों की बुआई देर से शुरू हो सकी है। इसका असर बुआई के आंकड़ों मेंं दिखाई दे रहा है। 
 
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक चालू रबी सीजन में दलहन फसलों की बुआई पिछले साल की अपेक्षा करीब 12 फीसदी कम है। 6 नवंबर तक देश भर में 27.845 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुआई हो सकी है, जबकि पिछले साल इस अवधि में 39.926 लाख हेक्टेयर, 2017-18 में 54.338 लाख हेक्टेयर, 2016-17 में 45.452 लाख हेक्टेयर और 2015-16 में 37.272 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुआई हुई थी। पिछले पांच सालों (2013-14 से 2017-18) में इस समय तक देशभर में दलहन फसलों का औसत रकबा 41.285 लाख हेक्टेयर रहा है। इस औसत के मुकाबले चालू रबी सीजन में अभी तक दलहन फसलों की बुआई 13.44 फीसदी कम रही है।
 
प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में भी दलहन फसलों की बुआई पिछड़ी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक मध्य प्रदेश में महज 1.58 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुआई हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक यहां 12.26 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। मध्य प्रदेश में रबी सीजन की दलहन फसलों का कुल रकबा 43.384 लाख हेक्टेयर है। महराष्ट्र में पिछले साल अब तक 2.44 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुआई हो चुकी थी, जबकि इस साल रकबा केवल 0.23 लाख हेक्टेयर ही रहा है। उत्तर प्रदेश में भी पिछले साल के 5.511 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस बार 4.372 लाख हेक्टेयर में ही दलहन फसलों की बुआई हुई है। हालांकि कर्नाटक और राजस्थान में दलहन की बुआई पिछले साल की अपेक्षा अधिक हुई है। राजस्थान में नवंबर के पहले सप्ताह तक 8.368 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन फसलों की बुआई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 5.293 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। कर्नाटक में इस साल अब तक 6.460 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुआई हुई है, जबकि पिछले साल 4.64 लाख हेक्टेयर में बुआई हो पाई थी।
 
वित्त वर्ष 2018-19 में देश का कुल दहन आयात 23.7 लाख टन रहा, जबकि 2017-18 में 53.7 लाख टन और 2016-17 मेंं 63.4 लाख टन दलहन आयात किया गया था। चालू वर्ष में अप्रैल से अगस्त के बीच देश में 11.2 लाख टन दलहन आयात किया गया है। वर्ष 2019-20 में देश में तकरीबन 2.6 करोड़ टन दलहन की मांग रहेगी जिसे पूरा करने के लिए आयात बढ़ाना होगा। दलहन आयातक प्रवीण डोंगरे के मुताबिक पिछले साल देश में जितना बफर स्टॉक था, करीब उतना ही आयात किया गया था लेकिन इस साल दलहन फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसे देखते हुए आयात बढऩा तय है। हालांकि इसका असर कीमतों पर कैसा रहेगा, यह वैश्विक कीमतों के आधार पर ही तय हो सकेगा। 
 
चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई भले ही पिछड़ी हुई है, लेकिन कृषि मंत्रालय के अधिकारियों को भरोसा है कि अगले एक-दो सप्ताह में रकबा सही हो जाएगा क्योंकि देर से शुरू हुई बारिश के कारण खेतों को तैयार करने में समय लगा है। अब बुआई ने रफ्तार पकड़ी है इसीलिए मौजूदा आंकड़ों को देखकर पूरे सीजन का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। चालू रबी सीजन की बुआई के आंकड़ों के मुताबिक अब तक देश में कुल 95.35 लाख हेक्टेयर में रबी की बुआई हुई है जो पिछले साल की अपेक्षा 16.89 फीसदी कम है। पिछले साल नवंबर के पहले सप्ताह के आखिरी तक देश में रबी का रकबा 112.24 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका था। रबी सत्र की फसलों का कुल औसत रकबा 633.94 लाख हेक्टेयर है। कृषि मंत्रालय ने फसल वर्ष 2019-20 (जुलाई-जून) में रिकॉर्ड 29.11 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। खरीफ सत्र में 14.79 करोड़ टन और रबी सत्र में 14.32 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान शामिल है।
Keyword: agri, farmer, crop, pulses,,
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