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फर्मों की नई सूचीबद्धता बेहतर

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई November 12, 2019

पिछले तीन वित्त वर्ष में 40 कंपनियों ने सूचीबद्धता के दिन दो अंकों में रिटर्न अर्जित किया है और गैर-पीई समर्थित कंपनियों का प्रदर्शन पीई समर्थित कंपनियों के मुकाबले बेहतर रहा है। वित्त वर्ष 2017 से वित्त वर्ष 2019 के बीच बाजार में 85 आरंभिक सार्वजनिक निर्गम पेश हुए, जिसमेंं से 58 अपनी पेशकश कीमत के मुकाबले प्रीमियम पर बंद हुआ और इनमें 40 कंपनियों ने दो अंकों में रिटर्न अर्जित किया। यह जानकारी केपीएमजी के अध्ययन से मिली। कुल में से 26 कंपनियों ने नकारात्मक रिटर्न दर्ज किया, सात कंपनियों ने दो अंकों में नकारात्मक रिटर्न दर्ज किया। वित्त वर्ष 2019 में 18 कंपनियों मे से 10 ने सूचीबद्धता के दिन औसतन 9 फीसदी नकारात्मक रिटर्न दर्ज किया।
 
39 पीई समर्थित कंपनियों ने सूचीबद्धता के दिन औसतन 15 फीसदी रिटर्न अर्जित किया जबकि 35 गैर-पीई समर्थित कंपनियों ने 23.3 फीसदी रिटर्न दर्ज किया। इस अवधि में सूचीबद्ध 11 पीएसयू ने औसतन -0.1 फीसदी रिटर्न दर्ज किया। केपीएमजी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019 में पेश 18 आईपीओ ने 199 अरब रुपये जुटाए और आईपीओ का औसत आकार 11 अरब रुपये था। वित्त वर्ष 2017 और 2018 में जुटाई गई रकम क्रमश: 762 अरब रुपये और 284 अरब रुपये थी और आईपीओ का औसत आकार क्रमश: 18.6 अरब रुपये और 10.9 अरब रुपये था। वित्त वर्ष 2018 में आईपीओ का आकार वित्त वर्ष 2017 के मुकाबले 70 फीसदी बड़ा और वित्त वर्ष 2019 के मुकाबले 68 फीसदी बड़ा था।
 
वित्त वर्ष 2018 के 41 आईपीओ में से 13 ने 5-5 अरब रुपये से कम जुटाए, वहीं 14 आईपीओ ने 10-10 अरब रुपये जुटाए। वित्त वर्ष 2019 में 18 कंपनियों का सूचीबद्धता के दिन फायदा 2 फीसदी रहा जबकि वित्त वर्ष 2018 में सूचीबद्ध 41 कंपनियों का 21 फीसदी और वित्त वर्ष 2017 में सूचीबद्ध 26 फर्मों का 20 फीसदी रहा। तीन वित्त वर्षों में नौ क्षेत्रों ने दो से ज्यादा सूचीबद्धता देखी, व्यक्तिगत व घरेलू सामान वाले क्षेत्रों ने सूचीबद्धता के दिन सबसे ज्यादा 72.1 फीसदी बढ़त दर्ज की, जिसके बाद निर्माण क्षेत्र का स्थान रहा और यहां 18.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
 
78 फीसदी रकम ओएफएस के जरिए जुटाई गई और प्रवर्तकों और निवेशकों को निवेश निकासी का मौका दिया। ओएफएस में प्रवर्तक, पीी या वेंचर कैपिटल कंपनियों ने अपनी हिस्सेदारी बेची। केपीएमजी की रिपोर्ट में कहा गया है, वित्त वर्ष 2018 में आई तेजी की वजह ओएफएस के जरिए जुटाई गई खासी रकम हो सकती है। इसके तहत मौजूदा शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी का मुद्रीकरण और इच्छित स्तर पर मुनाफावसूली के लिए प्रोत्साहित हुए। नए शेयर जारी कर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल पूंजी आधार बढ़ाने में हुआ। पीएसयू ने तीन साल में एक चौथाई रकम जुटाई, लेकिन इश्यू से संबंधित खर्च 9 फीसदी कम चुकाया।
 
इस अवधि में एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स की सालाना चक्रवृद्धि रफ्तार 15.1 फीसदी थी, जो नैसडेक के बाद दूसरी सबसे बड़ी बढ़त है। इश्यू से संबंधित सबसे ज्यादा खर्च वाले आईपीओ वित्तीय सेवा क्षेत्र के थे और पांच कंपनियों ने एक-एक अरब रुपये से ज्यादा खर्च किए। एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों की राह में बाजार की कमजोरी आई। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूदा कैलेंडर वर्ष में 13 कंपनियों ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के लिए आवेदन किए हैं और यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 45 फीसदी कम है।
Keyword: company, firm, PE,,
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