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सोशल मीडिया और डिजिटल मार्केटिंग पर जोर

स्नेहा भट्टाचार्य /  11 12, 2019

नए-नए तरीके अपना रहे राजनीतिक दल

बिजनेस स्टैंडर्ड सोशल मीडिया और डिजिटल मार्केटिंग पर जोरउत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले 25 साल के रेहान मोहम्मद दिल्ली की तंग गलियों और आलीशान इलाकों में बिना किसी परेशानी के समान गति से ऑटो चलाते हैं। हरे और पीले रंग के उनके तिपहिया वाहन के पीछे मोटे अक्षरों में 'आई लव केजरीवाल' लिखा है। दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में इसी जुमले के साथ चुनावी वैतरणी पार करने की उम्मीद कर रही है।

रेहान की तरह सैकड़ों ऑटो चालक दिल्ली की सड़कों पर इसी तरह आप का प्रचार कर रहे हैं। ऑटो चालक अगले साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनावों में आप की चुनावी मशीनरी का अहम हिस्सा हैं। इन चुनावों में पार्टी के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तुरुप का इक्का हैं और उनकी उपलब्धियों के प्रचार के लिए होर्डिंग, सामुदायिक सम्मेलनों और सोशल मीडिया हैंडलों का जोरशोर से इस्तेमाल किया जा रहा है।

आप के उलट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन पार्टी दिल्ली प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मनोज तिवारी पर दांव लगा रही है। आप का प्रचार जहां पूरी तरह केजरीवाल पर केंद्रित है वहीं भाजपा उनकी नाकामियों को निशाना बना रही है। अब तक भाजपा की दिल्ली इकाई ने विधानसभा चुनावों के लिए कोई खास नारा या ऑनलाइन अभियान शुरू नहीं किया है लेकिन उसका पूरा जोर केजरीवाल के दावों की हवा निकालने पर है।

कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पार्टियों का जोर डिजिटल मार्केटिंग पर है। भाजपा और आप की सोशल मीडिया टीमों ने अपने टाइमलाइन पर खास मौकों को भुनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनके फेसबुक पन्ने और ट्विटर हैंडल दीवाली, गोवर्धन पूजा, करवा चौथ और अन्य त्योहारों के दौरान पोस्टरों से अटे पड़े थे। भाजपा के नमो ऐप की तरह आप ने भी इस साल मई में हुए आम चुनावों से पहले अरविंद केजरीवाल ऐप शुरू किया था। 

आप अपने प्रचार अभियान में घर-घर पर्चे भी बांट रही है जिसमें दिल्ली सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया जा रहा है। इसमें एक टेलीफोन नंबर दिया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि आप इससे सीधे मुख्यमंत्री से बात कर सकते हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि वह व्यक्तिगत तौर पर सभी शिकायतों को दर्ज करेंगे। इन सब तरकीबों के घालमेल से एक ऐसा ब्रांड बनता है जो लोगों को अपील करता है। आप के एक प्रवक्ता ने हाल में मीडिया से कहा, 'टीवी और अखबार जैसे माध्यम तो अधिकांश समय केंद्र सरकार के विज्ञापन चलाते हैं। हमारे पास प्रचार के लिए केवल आउटडोर मीडियम ही बचता है जिसके जरिये हम सीधे तौर पर आम लोगों तक पहुंच सकते हैं।'

मोगी मीडिया के संस्थापक संदीप गोयल कहते हैं कि इस तरह के प्रचार की शुरुआत अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनावों से हुई थी। उन्होंने कहा, 'प्रत्याशी रेल से यात्रा करते हैं और हर रेल स्टॉप पर मतदाताओं को संबोधित करते हैं। वे ट्रेन की सीटी बजने तक ऐसा करते हैं, यही वजह है कि इसे व्हिसल स्टॉप कहते हैं। इस तरह आम लोगों के बीच प्रचार से प्रत्याशियों की पहचान बढ़ती है।'

इसके उलट भाजपा ने आप के आक्रामक प्रचार की काट के लिए नारों का सहारा लिया है। ट्रस्ट रिसर्च एडवाइजरी के संस्थापक एन चंद्रमौलि के मुताबिक यह तरकीब पहले भी पार्टी के लिए सफल रही है। लेकिन उनका मानना है कि इस बार पार्टी को अपनी रणनीति बदलनी चाहिए क्योंकि दिल्ली सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर आम लोगों के बीच चर्चा शुरू करने में सफल रही है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आप का अभियान मतदाताओं के बीच ज्यादा कारगर होगा क्योंकि उन्होंने दिल्ली सरकार की नीतियों में व्यापक बदलाव देखा है।'

चंद्रमौलि ने कहा कि आप का प्रचार इस मायने में अनोखा है कि इसमें हिंदीभाषी मतदाताओं को लुभाने के लिए अंग्रेजी जुमले (आई लव केजरीवाल) का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही इसमें कोई वादा नहीं किया गया है। इसके बजाय यह आप की उपलब्धियों का प्रभाव दिखाता है। यह आप के कार्यक्रमों पर जनता की मुहर की तरह है।

गोयल ने कहा कि यह मतदाताओं की परिपक्वता का संकेत है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के मतदाताओं के साथ जुडऩे के तरीके में बदलाव आ रहा है। उदाहरण के लिए हाल में महाराष्ट्र और हरियाणा में संपन्न विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों और राजनेताओं ने लोगों के साथ जुडऩे के लिए ट्विटर का इस्तेमाल किया। ट्विटर के मुताबिक इन राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान करीब 32 लाख ट्वीट हुए। नेताओं ने जहां अपनी योजनाओं के समर्थन में ट्वीट किया वहीं मतदाताओं ने चुनाव लड़ रहे नेताओं के साथ विकास के मुद्दे पर बात की। 
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