बिजनेस स्टैंडर्ड - औद्योगिक उत्पादन में तेज गिरावट
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औद्योगिक उत्पादन में तेज गिरावट

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 11 11, 2019

8 साल के निचले स्तर पर आया आईआईपी

बिजनेस स्टैंडर्ड औद्योगिक उत्पादन में तेज गिरावटसितंबर में औद्योगिक उत्पादन 4.3 फीसदी गिरावट के साथ आठ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है जो आर्थिक नरमी गहराने का संकेत है। विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन और पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में कमी से औद्योगिक उत्पादन में तेज गिरावट आई है। अगस्त में औद्योगिक उत्पादन 1.4 फीसदी घटा था। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में लगातार दूसरे महीने गिरावट आई है लेकिन सितंबर 2019 में अक्टूबर 2011 के बाद सबसे तेज गिरावट देखी गई।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ताजा आंकड़े अनुमान से ज्यादा खराब रहे हैं जो अर्थव्यवस्था में सुस्ती गहराने का संकेत है। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'चालू वित्त वर्ष में अब तक आईआईपी की कुल वृद्धि 1.3 फीसदी रही जबकि पिछले वित्त वर्ष में इस दौरान उत्पादन में 5.2 फीसदी की वृद्धि देखी गई थी।' 

औद्योगिक उत्पादन अगस्त में ही ऋणात्मक हो गया था और यह 81 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था। आईआईपी के सभी क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन से औद्योगिक उत्पादन 1.4 फीसदी तक घट गया था। अर्थशास्त्रियों ने आगे उत्पादन में और गिरावट आने की चेतावनी दी थी। जुलाई में औद्योगिक उत्पादन 4.6 फीसदी बढ़ने के बाद इसमें गिरावट का रुख बना हुआ है। उद्योग एवं कृषि क्षेत्र से कम मांग की वजह से खनन गतिविधियों और बिजली उत्पादन में भी सितंबर में गिरावट आई है।

आईआईपी में करीब 78 फीसदी भारांश वाले विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में सितंबर के दौरान तेज गिरावट देखी गई। सितंबर में उत्पादन 3.9 फीसदी गिर गया जो अगस्त में 1.6 फीसदी घटा था। विनिर्माण के तहत 23 उप-क्षेत्रों में 17 क्षेत्रों के उत्पादन में पिछले साल की तुलना में गिरावट आई है जबकि पिछले 15 क्षेत्रों के उत्पादन में गिरावट आई थी। आईआईपी के आंकड़ों से पता चलता है कि वाहन क्षेत्र के सभी खंडों में उत्पादन गिरा है। 

सितंबर में वाहन उत्पादन में 25 फीसदी की गिरावट आई है। मशीनरी उत्पादन भी 18.2 फीसदी घटा है और इलेक्ट्रानिक वस्तुओं के उत्पादन में भी गिरावट आई है। सरकार द्वारा विनिर्माण क्षेत्र को लगातार बढ़ावा दिए जाने के बावजूद इस क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट का रुख बना हुआ है। पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में सितंबर में 20 फीसदी की गिरावट आई जबकि इस क्षेत्र में निवेश की काफी जरूरत होती है। अगस्त में इसका उत्पादन 21 फीसदी घटा था। कई क्षेत्रों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आसान बनाए जाने के बावजूद लगातार आठ महीने से इस क्षेत्र का उत्पादन ऋणात्मक बना हुआ है।

औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि उपभोक्ता मांग कमजोर बनी हुई है। त्योहारों से एक माह पहले कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। पिछले चार महीने से इस क्षेत्र का उत्पादन घट रहा है। इस क्षेत्र की ऋणात्मक वृद्धि से वे अर्थशास्त्री भी चकित हैं जो अक्टूबर में ई-कॉमर्स की भारी-भरकम बिक्री को इस क्षेत्र में वृद्धि का संकेत बता रहे थे। चालू वित्त वर्ष में गैर-कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में पहली बार गिरावट आई है। इस क्षेत्र का उत्पादन सितंबर में 0.4 फीसदी घटा है। 

इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के प्रदर्शन लगातार गिरावट और सितंबर में गैर-ड्यूरेबल्स का उत्पादन घटने से त्योहारों से पहले इन्वेंटरी घटने की आस भी धूमिल हो गई।'इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि मॉनसून की देर से वापसी की वजह से विभिन्न राज्यों में निर्माण गतिविधियों पर भी प्र्रतिकूल असर पड़ा है। इससे निर्माण और बुनियादी ढांचा वस्तुओं के उत्पादन में गिरावट आई है।इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा, 'भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में संरचनात्मक सुस्ती का सामना कर रहा है, जो परिवारों की बचत दर घटने और कृषि विकास में नरमी की वजह से है। कृषि क्षेत्र में कमजोर वृद्धि से ग्रामीण इलाकों में कृषि एवं गैर-कृषि पारिश्रमिक की वृद्धि भी कम रही जिससे ग्रामीण मांग पर प्रतिकूल असर पड़ा है।' सितंबर में 5.2 फीसदी गिरावट के बाद चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में असर का अनुमान था।
Keyword: IIP, WPI, economy, care rating,,
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