बिजनेस स्टैंडर्ड - अब भारतीय मूल्यों का क्या होगा!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 14, 2020 05:00 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

अब भारतीय मूल्यों का क्या होगा!

आदिति फडणीस /  November 11, 2019

शिखा त्रिवेदी, शैल मरियम, आशिष नंदी और अच्युत याज्ञिक द्वारा संपादित एक पुस्तक 'क्रिएटिंग ए नैशनैलिटी' में प्रत्यक्षदर्शी अयोध्या में 6 दिसंबर,1992 के घटनाक्रम को याद करते हुए बताते हैं, 'शुरुआत में माइक पर कारसेवकों से अनुशासन बनाए रखने की अपील की जाती है। इसके बाद उनकी सुरक्षा की चिंता जाहिर की गई क्योंकि 500 साल पुरानी मस्जिद धीरे-धीरे ढहने लगी थी। कुछ समय बाद कारसेवकों को भाजपा नेताओं और राम कथा कुंज में एकत्रित विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के मार्ग दर्शक मंडल के संतों से केवल निर्देश और प्रोत्साहन मिलने लगा। सिंघल ने घोषणा की कि हिंदू विद्रोह की शुरुआत हो चुकी है। वहीं विजया राजे सिंधिया ने घोषणा की कि अब वह बिना किसी पछतावे के मर सकेंगी क्योंकि उनका सपना साकार हो गया है।'

 
इस पुस्तक में उमा भारती और  साध्वी  ऋतंभरा के बारे में कहा गया है कि माइक अपनी अपनी कई बारियों में उमा भारती ने भीड़ को दो नारे दिए- 'राम नाम सत्य है, बाबरी मस्जिद ध्वस्त है' और 'एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो'।  हालांकि बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच करने के लिए गठित लिब्रहान आयोग के समक्ष भारती ने कहा कि वह केवल दर्शक थीं और उनकी इस मामले में कोई रुचि नहीं थी। हालांकि उन्होंने भाषणों और बयानों से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि वहां इतनी भीड़ थी कि वह चीजों को वास्तव में याद नहीं कर सकती हैं। 
 
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में विवादित स्थल का स्वामित्व हिंदुओं के हाथ में दे दिया गया है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि 1992 में बाबरी विध्वंस साफ तौर पर कानून का उल्लंघन था क्योंकि मुस्लिमों को मस्जिद पर अधिकार से वंचित किया गया। यह सरकार के लिए पेचीदा मसला है। अगर वह फैसले को स्वीकार करती है, मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाती है और अंत में इसका निर्माण करती है तो उसे उन नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई करनी होगी, जो आज भले ही अप्रासंगिक हो गए हों, लेकिन 1980 और 1990 के दशक में हिंदू एकजुटता आंदोलन के अगुआ थे। लाल कृष्ण आडवाणी और अन्य के खिलाफ एक मामला कई वर्षों से चल रहा है, जिन पर पूजा के एक स्थल को नष्ट करने का षडयंत्र रचने के आरोप हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2017 में सत्र न्यायालय से कहा था कि वह उन पर पर आरोप तय करे, जो सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में आरोपी हैं। इन एफआईआर में विनय कटियार, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और लाल कृष्ण आडवाणी आदि के नाम शामिल हैं। 
 
इसके जवाब में आडवाणी और अन्य ने लखनऊ की सत्र अदालत में रिहाई की अर्जी दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत को फैसला सुनाने के लिए अप्रैल 2020 तक का समय दिया था। अब एक अलग मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया है कि बाबरी विध्वंस असंवैधानिक था, इसलिए इस मामले की जल्द सुनवाई होने के आसार हैं। हिंदुओं के लिए राम मंदिर का निर्माण कितना अहम है, इसका अनुमान हिंदू विचारक गोविंदाचार्य के जवाब से लगाया जा सकता है। जब उनसे पूछा गया कि राम मंदिर इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है, विशेष रूप से उस स्थिति में जब इसने समाज को बांटा है तो उन्होंने  कहा, 'यह सवाल बहुत तकलीफ पहुंचाता है। यह राम की जन्मभूमि है और वह भारतीय मूल्यों के प्रतीक हैं।' 
 
किसी भी देश में उसके मूल्यों और मूल्यों के प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो वह सभ्यता आगे नहीं बढ़ पाती है। अब राम की जन्मभूमि हिंदुओं को लौटा दी गई है। लेकिन 'मूल्यों' का क्या? इन्हें कैसे परिभाषित किया जाएगा और क्या वे भी राम मंदिर मसले जितने विभाजनकारी साबित होंगे?  क्या वे रियल एस्टेट के मसले से आगे जाएंगे? विध्वंस के बाद का घटनाक्रम भयावह रहा। इसके कुछ दिनों बाद मुंबई बम धमाकों और दंगों से सहम गया, जिसमें 700 से अधिक लोगों की जान गई। अगर सरकार अयोध्या में नाकाम रही तो वह मुंबई में भी नाकाम रही। इसके विपरीत इस बार सभी दलों ने परिपक्वता दिखाते हुए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर प्रतिक्रिया दी है। लेकिन यह शुरुआत है। मंदिर बनाने के लिए ढांचे का शेष हिस्सा ढहाना होगा। क्या इसे शांतिपूर्वक स्वीकार किया जाएगा? अब तक 'भारतीयता' को खाने-पीने की आदतों, आपको वैध रूप से भारतीय ठहराने वाले एक कागज से टुकड़े और धार्मिक-राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति वफादारी से परिभाषित किया जाता है। क्या इस फेहरिस्त में उन अलग विशेषताओं को शामिल किया जाएगा, जो साफ तौर पर हिंदू हैं। 
Keyword: ram mandir, ayodhya, court, security,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या गूगल के निवेश से डिजिटलीकरण में आएगी तेजी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.