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सुस्त पड़ रहे सार्वजनिक उपक्रमों के शेयर

सुंदर सेतुरामन / मुंबई November 11, 2019

पिछले दो महीने में सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों में निवेशकों की काफी दिलचस्पी बनी हुई थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है क्योंकि निवेशक अब इन शेयरों को लेकर अपने अनुमानों का दोबारा आकलन करते नजर आ रहे हैं। 31 अक्टूबर को समाप्त दो महीने की अवधि में निफ्टी पीएसई (पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज) इंडेक्स में 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी और यह बेंचमार्क निफ्टी से आगे निकल गया था क्योंकि निफ्टी में  7.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। कुछ वैयक्तिक पीएसयू मसलन जीआईसी आरई, न्यू इंडिया एश्योरेंस और भारत पेट्रोलियम कॉर्प में 50-50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।
 
बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि निजीकरण की खबर, कर कटौती के बाद भारी लाभांश की उम्मीद और पुनर्खरीद के आर्बिट्रेज लाभ ने कई पीएसयू शेयरों को उफान पर रखा था। साथ ही ऐतिहासिक तौर पर पिछले तीन महीने से भारी गिरावट के कारण कम मूल्यांकन के चलते निवेशकों को खरीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि ज्यादातर पीएसयू इस महीने काफी नीचे आए हैं जबकि बेंचमार्क सेंसेक्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस महीने अब तक निफ्टी पीएसई इंडेक्स 3.2 फीसदी नीचे है, वहीं निफ्टी ने 0.3 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की है।
 
आईआईएफएल के शोध प्रमुख अभिमन्यु सोफत ने कहा, कई पीएसयू में निजीकरण की उम्मीद में तेजी दर्ज हुई थी। चूंकि अब तक कुछ ठोस नहीं हुआ है, लिहाजा उनमें गिरावट आई है। हम दोबारा खरीदारी की उम्मीद कर सकते हैं, अगर इस मोर्चे पर कुछ ठोस देखने को मिलता है। बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि भारत की क्रेडिट रेटिंग में कमी के मूडीज के फैसले का भी पीएसयू शेयरों पर असर पड़ा है। सोफत ने कहा, अगर आप रेटिंग में कमी की संभावना का सामना करते हैं तो इसका मतलब यह है कि आप पर राजकोषीय दबाव है। इसलिए कुछ पीएसयू को मिलने वाली सरकारी नकदी घट सकती है।
 
इसके अलावा बाजार के प्रतिभागियोंं ने कहा कि रेटिंग परिदृश्य में बदलाव से सरकार को विनिवेश पर आक्रामक तरीके से आगे बढऩे के लिए बाध्य करेगा। एक विश्लेषक ने कहा, शेयर बिक्री की तलवार एक बार फिर कुछ पीएसयू पर लटकनी शुरू होगी। वित्त वर्ष के बाकी चार महीने में हम कुछ बड़ी पीएसयू में सरकारी विनिवेश देख सकते हैं। इससे प्रतिभूति की आपूर्ति बढ़ेगी और यह शेयर कीमतों को नीचे रखेगी। पीएसयू पर हालांकि शेयर बिक्री की तलवार हमेशा लटकी रहती है, लेकिन तत्काल बिक्री या निजीकरण की बात आई तो शेयर कीमतें मजबूत हुई। बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि अगर इन्हें क्रियान्वित किया जाता है तो यह अवधारणा को मजबूत बनाएगा।
 
30 सितंबर को सचिवों के अहम समूह ने पांच सरकारी कंपनियोंं के विनिवेश को मंजूरी दी थी, जिनमें बीपीसीएल शामिल हैं। इसके बाद खबरों में कयास लगाए गए कि सऊदी अरामको और रोसनेफ्ट समेत कई विदेशी कंपनियां बीपीसीएल मेंं सरकारी हिस्सेदारी के लिए बोली लगाने की खातिर बातचीत कर रही है। सितंबर व अक्टूबर में बीपीसीएल की कीमतें 48 फीसदी चढ़ी, लेकिन नवंबर की शुरुआत में यह 1.7 फीसदी फिसल गया। विश्लेषकों ने कहा, हालिया बढ़ोतरी के बावजूद पीएसयू शेयर मूल्यांकन के लिहाज से आकर्षक दिख रहे हैं। निफ्टी पीएसई अभी 12 महीने पहले के 8.64 गुने पीई पर कारोबार कर रहे हैं जबकि निफ्टी के लिए यह 25 गुना है। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा, जब तक उनका कारोबारी मॉडल मजबूत रहेगा, कर्ज कम रहेगा, नकदी का ठीक-ठाक भंडार रहेगा और एकल पीई पर उपलब्ध होगा, इस क्षेत्र के शेयरों में मौके होंगे।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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