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जीवन, स्वास्थ्य और यात्रा बीमा में आएगी ज्यादा पारदर्शिता

संजय कुमार सिंह /  November 10, 2019

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) ने हाल में ही स्वास्थ्य, जीवन एवं यात्रा बीमा के संबंध में नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। आईआरडीए इन संबंधित बीमा खंडों में कुछ उन मामलों में अधिक पारदर्शिता लाना चाहता है, जहां स्थिति साफ नहीं होने की वजह से अक्सर बीमा कंपनियों और बीमाधारकों के बीच विवाद की नौबत आ जाती है।

स्वास्थ्य बीमा

बीमा नियामक ने कुछ बीमारियों की एक सूची तैयार की है, जो स्थायी रूप से बीमा लाभ के दायरे से बाहर रखी गई हैं। आइए, इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। किसी व्यक्ति को कुछ समय के लिए पर्किंसन बीमारी थी और अब वह स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेना चाहता है। इस मामले में बीमा कंपनी के पास एक विकल्प यह है कि वह इसे पहले से मौजूद बीमारी मान कर चार वर्षों की प्रतीक्षा अवधि (वेटिंग पीरियड) की शर्त लगाकर पॉलिसी जारी कर सकती है। बीमा कंपनियों को उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों को वेटिंग पीरियड में रखकर पॉलिसी जारी करने से गुरेज नहीं था, लेकिन पर्किंसन जैसी गंभीर बीमारियों के मामले में वे ऐसा करने से हिचकती थीं। उन्हें लगता था कि एक बार प्रतीक्षा अवधि खत्म होने के बाद उन्हें ऐसे ग्राहकों से तगड़ा नुकसान हो सकता है। लिहाजा बीमा कंपनियां ऐसे ग्राहकों को पॉलिसी नहीं देती थीं। अब बीमा नियामक ने कहा है कि बीमा कंपनियां कुछ बीमारियों को स्थायी रूप से बीमा लाभ से बाहर रख सकती हैं। इसका सीधा मतलब हुआ इस सूची में शामिल बीमारियों को कभी बीमा लाभ नहीं मिलेगा।

एडिलवाइस जनरल इंश्योरेंस की मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) नामित शनाई घोष कहती हैं, 'अब स्थिति स्पष्ट होने के बाद बीमा कंपनियां इन बीमारियों से पीडि़त लोगों के बीमा आवदेनों पर विचार कर सकती हैं। ऐसे ग्राहकों को पॉलिसी लेते वक्त यह बात स्पष्टï रूप से समझ लेनी चाहिए कि सूची में शामिल 16 बीमारियां बीमा सुरक्षा के दायरे में नहीं आएंगी।' 

शनाई के अनुसार नियामक के दिशानिर्देश के बाद स्वास्थ्य बीमा अधिक समावेशी हो गया है। बीमा नियामक ने यह तो स्पष्टï कर ही दिया है कि कौन सी बीमारियां स्थायी रूप से बीमा सुरक्षा के दायरे में से बाहर रह सकती हैं, साथ ही भी कह दिया है कि कौन सी बीमारियां स्थायी रूप से बीमा से बाहर नहीं रखी जा सकती हैं। इस तरह, अब बीमा कंपनियां स्वयं यह नहीं तय कर पाएंगी कि किस बीमारी को स्थायी रूप से बाहर रखना हैं। 

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के सीईओ एवं सह-संस्थापक याशिष दहिया कहते हैं, 'अगर कोई व्यक्ति किसी खतरनाक  या अधिक जोखिम वाले उद्योग में काम करता है तो बीमा कंपनियां पहले ऐसे व्यक्ति को पॉलिसी नहीं देती थीं। अब आईआरडीए ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे व्यक्तियों को बीमा पॉलिसी से वंचित नहीं रखा सकता है। इसी तरह, मानसिक बीमारी मनोवैज्ञानिक असंतुलन से पीडि़त व्यक्ति को बीमा पॉलिसी देने से बीमा कंपनियां मना नहीं कर सकती हैं।' 

पहले से मौजूदा बीमारियां

एक अन्य बदलाव पहले से मौजूदा बीमारियों के संदर्भ में किया गया है। उदाहरण के लिए पॉलिसी खरीदने के तीन महीने के भीतर कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ता है तो इस मामले में नियामक ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि अमुक बीमारी पहले से मौजूद मानी जाएगी और बीमा कंपनियां प्रतीक्षा अवधि के दायरे में इसे डाल सकेंगी। दहिया कहते हैं, 'इस लिहाज से ग्राहकों को अब पहले से मौजूद किसी बीमारी का जिक्र पूरी ईमानदारी से करना होगा।'

आईआरडीए ने यह भी कहा है कि अस्थायी बीमारियों की प्रतीक्षा अवधि 48 महीने से अधिक नहीं हो सकती है। मिसाल के तौर पर कोई पॉलिसीधारक एक बीमा कंपनी से निकलकर दूसरी बीमा कंपनी से पॉलिसी खरीद रहा है। इस मामले में अगर कुल 48 महीने की प्रतीक्षा अवधि में पॉलिसीधारक ने 24 महीने पूरे कर लिए हैं तो नई बीमा कंपनी संबंधित बीमारी के लिए 24 महीने से अधिक प्रतीक्षा अवधि नहीं रख सकती। 

जीवन बीमा

बीमा कंपनियों को अब पॉलिसी बेचते समय संबद्ध लाभ विवरण देना होगा। इस विवरण दस्तावेज पर पॉलिसी खरीदार और एजेंट/मध्यस्थ दोनों हस्ताक्षर करेंगे और यह पॉलिसी दस्तावेज का हिस्सा होगा। भविष्य में सभी विवरणों पर सीईओ की मंजूरी जरूरी होगी और इस पर नियुक्त एक्चुअरी का हस्ताक्षर होगा। नियामक ने वह ढांचा भी तय कर दिया है, जिसमें विभिन्न उत्पाद श्रेणियों के लिए लाभ विवरण दर्शाए जाएंगे। विवरण में इस बात का स्पष्ट जिक्र होना चाहिए कि पॉलिसी के साथ दिखाए गए लाभ में कौन से पॉलिसीधारक को अनिवार्य रूप से मिलेंगेे और कौन से लाभ नहीं भी मिल सकते हैं। परिवर्तनीय लाभों के लिए 4 एवं 8 प्रतिशत की दो दरें माननी होंगी और यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि ये प्रतिफल सुनिश्चित नहीं है और न ही ये दरें संभावित प्रतिफल का ऊपरी एवं निचला दायरा है।

फ्यूचर जनराली इंडिया लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य विपणन एवं ग्राहक अधिकारी राकेश वाधवा कहते हैं,'सारी शर्तों को सरल बनाकर एवं इनका मानकीकरण कर नियामक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ग्राहक इन लाभों को अच्छी तरह समझ लें और जान लें कि उन्हें कोई बीमा पॉलिसी लेने पर कितना लाभ होगा।' 

सटीक पॉलिसी

कोई बीमा उत्पाद बेचने के लिए किसी एजेंट या वितरक को वित्तीय विश्लेषण की जरूरत के लिहाज से मंजूरी की एक वृहद प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पॉलिसी ग्राहक  के हित के अनुरूप है। ग्राहकों को उनकी जरूरत से इतर पॉलिसी की बिक्री रोकने के लिए यह एक और कदम उठाया गया है।  

यात्रा बीमा

यात्रा पोर्टल अक्सर डिफॉल्ट ऑप्शन (पहले से तैयार) के तौर पर बीमा योजनाएं दिखाते हैं। जब तक ग्राहक इसे अपनी तरफ से पड़ताल करने के बाद इसे लेने से इनकार नहीं करता है तब तक टिकट के साथ उसे यही बीमा योजना थमा दी जाती है, भले ही ग्राहक ने इसकी मांग की हो या नहीं। अब आईआरडीए ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रैवल पोर्टल को अपने मन से बीमा योजना ग्राहकों को नहीं थमानी चाहिए। 

प्रोबस इंश्योरेंस ब्रोकर में निदेशक राकेश गोयल कहते हैं, 'अब ग्राहक तभी बीमा लेना चाहेंगे जब उनकी इच्छा होगी।' घरेलू यात्रा के मामले में नियामक ने स्पष्टï कर दिया है कि ग्राहक यात्रा की तिथि से 90 दिन पहले यात्रा बीमा नहीं खरीद सकते हैं। गोयल कहते हैं,'कभी-कभी पॉलिसी लाभ बदल जाते हैं। जिन लोगों ने काफी पहले पॉलिसी खरीदी होती है, उन्हें बदलाव का पता नहीं चलता है, जिस वजह से उन्हें दूसरी पॉलिसी खरीदनी पड़ती है।'

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