बिजनेस स्टैंडर्ड - समर्पित कोष बनाने से आएगी छोटे व मझोले उद्योगों में तेजी
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समर्पित कोष बनाने से आएगी छोटे व मझोले उद्योगों में तेजी

बीएस बातचीत
शुभायन चक्रवर्ती /  November 10, 2019

पीएचडी चैंबर आफ कॉमर्स के अध्यक्ष डीके अग्रवाल का कहना है कि धन की कमी और वित्तीय पहुंच न होना सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों की राह में बड़ा रोड़ा है। शुभायन चक्रवर्ती से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि कारोबार सुगमता निचले स्तर तक ले जाने की जरूरत है। प्रमुख अंश... 

किन क्षेत्रों में बड़े नियामकीय सुधार की जरूरत है? 

क्षेत्र की आर्थिक स्थिति और मौजूदा नकदी संकट को देखते हुए सरकार को इस क्षेत्र के लिए समर्पित कोष बनाना चाहिए, जैसे अटकी आवासीय परियोजनाओं के लिए बनाया गया है। 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये के एक ऐसे कोष की जरूरत है, जो सिर्फ एमएसएमई क्षेत्र के लिए हो और  इसके लिए कोई जमानत न मांगी जाए। एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इनकी वृद्धि बहाल करने के लिए उनकी वित्तीय पहुंच बढ़ाई जानी चाहिए। इस समय ऐसे प्रावधान हैं, जिसमें सरकार द्वारा एमएसएमई को तेजी से भुगतान करने की वव्यवस्था की गई है। इसके बावजूद छोटे कारोबारियों का भुगतान बड़े पैमाने पर अटका है। पिछले कुछ महीने में कई घोषणाएं की गई हैं, उसके बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भुगतान में देरी कर रही हैं। सरकार के खरीद पोर्टल की वजह से सुविधा हुई है, लेकिन अटके भुगतान की निगरानी की जरूरत है। यह सुझाव वित्त मंत्रालय को जल्द भेजे जाएंगे, जिससे बजट बनाने की प्रक्रिया शुरू होने के पहले इस पर विचार हो सके।  

क्या आपको लगता है कि कारोबार सुगमता का जमीनी स्तर पर कोई असर है? 

विश्व बैंक की रैंकिंग में हमारे राष्ट्रीय प्रदर्शन में सुधार हुआ है, लेकिन इसे तत्काल जिला स्तर तक बढ़ाए जाने की जरूरत है। हम इस मामले में अब देरी सहने की स्थिति में नहीं हैं। यह अच्छा है कि अब राज्य सरकारें बहुत सक्रिय हो रही हैं, क्योंकि नीति आयोग 350 से ज्यादा मानकों के मुताबिक उनकी रेटिंग कर रहा है। लेकिन कारोबार चलाना आसान करने व कारोबार चलाने की लागत पर भी विचार किए जाने की जरूरत है। 

क्या आपको लगता है कि भारत में कारोबार की लागत अभी ज्यादा है? 

एक बार फिर एमएसएमई पर आते हैं। सरकार ने कॉर्पोरेट कर पहले की कम कर दिया है, जबकि एमएसएमई इस श्रेणी में नहीं आते हैं। ज्यादातर एमएसएमई या तो पूरे कारोबार के प्रोपराइटर हैं या साझेदारी में कारोबार हैं। ऐसे कारोबार पर कर कम होना चाहिए। इस श्रेणी में आने वाले व्यक्तियोंं के लिए कर ढांचा बदलकर 5 लाख तक की आमदनी पर पूरी तरह से कर छूट दिया जाना चाहिए। वहीं 5 से 10 लाख रुपये पर 5 प्रतिशत और 10 से 20 लाख रुपये आमदनी पर 10 प्रतिशत कर लगाया जाना चाहिए। इसके अलावा कर्ज पर ब्याज बहुत ज्यादा है। महंगाई काबू में है, इसलिए ब्याज दरों में 100-200 आधार अंक और कमी किए जाने की जरूरत है।  

आपको आर्थिक मंदी में सुधार की शुरुआत कब होने की उम्मीद है? 

निश्चित रूप से वैश्विक वजहों से ऐसा है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती है। इसकी वजह से निर्यात पर दबाव पड़ा है। इसके अलावा चुनाव का अर्थव्यवस्था पर असर भी देखे जाने की जरूरत है। चुनाव के पहले लोगों का खर्च कम हो जाता है और चुनाव के बाद इसके गति पकडऩे में वक्त लगता है। मेरा मानना है कि बैंकों में पूंजी डालने, कॉर्पोरेट टैक्स कम करने, जीएसटी रिफंड में तेजी, आवास क्षेत्र के लिए आकस्मिक निधि जैसे सभी कदमों का असर होगा। हमें इनका परिणाम देखने के लिए 3-4 महीने इंतजार करना होगा। इसलिए अभी भी मेरा विचार है कि वृद्धि सुस्त रहने का मौजूदा दौर कम अवधि के लिए है। नया कैलेंडर साल शुरू होने पर हम अर्थव्यवस्था में तेजी देखेंगे।  

आरसेप सौदे पर पीएचडी चैंबर की क्या राय है? 

अगर हमारी चिंता का समाधान नहीं होता तो हम हस्ताक्षर नहीं करेंगे। सरकार ने यह साफ संकेत दिया है और वह इस पर चल रही है। इसके अलावा आसियान और भारत के बीच दीर्घावधि संबंध है और यह सिर्फ आरसेप पर निर्भर नहीं है। भारत और आसियान में कारोबार लगातार बढ़ रहा है। हम कारोबारी सम्मेलन कराने जा रहे हैं, जिसमें आसियान के तमाम कारोबारी प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली आ रहे हैं।
Keyword: PHD Chamber, Dedicated Fund, Economy, Cash Crunch, Housing Project, Niti Aayog,
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