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टेक्सटाइल कंपनियों को कर्ज भुगतान में दो वर्ष की मोहलत!

दिलीप कुमार झा / मुंबई November 10, 2019

वित्तीय रूप से तंगहाली झेल रही टेक्सटाइल कंपनियों के लिए ऋण अदायगी के संदर्भ में सरकार उन्हें दो वर्ष की रियायत देने पर विचार कर रही है। सरकार के इस कदम से इन कंपनियों को जीएसटी और अन्य करों के रिफंड में विलंब की वजह से पैदा हो रहे मौजूदा संकट का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।

सूत्रों का कहना है कि स्मृति इरानी के नेतृत्व में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को यह सुझाव दिया है। वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव पर मंजूरी के शुरुआती चरण में है। क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा, 'मौजूदा समय में टेक्सटाइल उद्योग को मर्केंडाइज्ड एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस)  और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रिफंड में विलंब की वजह से नकदी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इससे व्यावसायिक धारणा प्रभावित हो रही है। उद्योग को व्यावसायिक धारणा में सुधार के लिए नकदी संकट को दूर करने की जरूरत है। बैंकों के कर्ज की अदायगी पर टेक्सटाइल कंपनियों को दो वर्ष की छूट से नकदी स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।'

इस बीच, टेक्सटाइल कंपनियों की आवाज प्रभावी ढंग से उठाने के लिए इस उद्योग ने टेक्सटाइल वैल्यू चेन में सभी उद्योग संगठनों के बैनर तले नैशनल कमेटी ऑन टेक्सटाइल्स एंड क्लोदिंग (एनसीटीसी) के तहत एक संचालन समिति गठित की है। इस समिति में टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग के सभी हितधारकों, जैसे टेक्सप्रोसिल, अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, सिंथेटिक्स ऐंड रेयॉन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, भारतीय वस्त्र उद्योग संघ, सीएमएआई को शामिल किया गया है। साथ ही इसमें सीआईटीआई के चेयरमैन टी राजकुमार के नेतृत्व में क्षेत्रीय स्तर के टेक्सटाइल और क्लोदिंग उद्योग संगठनों को भी शामिल किया गया है।

एनसीटीसी ने सरकार को भेजे अपने पहले सुझाव में रीसाइकल्ड पॉलिएस्टर स्टैपल फाइबर को जीएसटी की 5 प्रतिशत की दर में रखे जाने का अनुरोध किया है और कहा है कि कीमतें एमएसपी से नीचे  जाने पर खरीद की स्थिति में कॉन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) को किसानों और कपास वस्त्र उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों को ध्यान में रखना चाहिए। एनसीटीसी एक संयुक्त ज्ञापन भेजकर कार्यशील पूंजी के लिए मार्जिन रकम 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने और कर्ज-पूंजी अनुपात मानक में बदलाव लाए जाने का अनुरोध किया है।
Keyword: Clothing, Smriti Irani, CMAI, AIIS, GST, Taxtiles, Bank, Debt,
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