बिजनेस स्टैंडर्ड - विहिप के पास मंदिर निर्माण का खाका तैयार
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विहिप के पास मंदिर निर्माण का खाका तैयार

वीरेंद्र सिंह रावत / अयोध्या 11 10, 2019

राम मंदिर

बिजनेस स्टैंडर्ड विहिप के पास मंदिर निर्माण का खाका तैयारउच्चतम न्यायालय के पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर राम मंदिर का रास्ता साफ कर दिया है, जिससे अब सभी की नजरें प्रस्तावित भव्य मंदिर पर टिक  गई हैं। राम मंदिर आंदोलन की अगुआई करने वाली विश्व हिंदू परिषद (विहिप) 1989 से कारसेवकपुरम में राम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में इस मंदिर के लिए गुलाबी संगमरमर को तराशने का काम कर रही है। 

इस परिसर के प्रवेश द्वार के करीब प्रस्तावित राम मंदिर का एक मॉडल रखा गया है। पिछले कई दशकों के दौरान यह जगह अयोध्या आने वाले श्रद्घालुओं के लिए तीर्थ बन गई है। वे यहां आकर पत्थरों को तराशने में लगे कारीगरों का हुनर देखते हैं। इनमें से अधिकांश कारीगर राजस्थान के हैं और पत्थर भी राजस्थान के भरतपुर से लाए जा रहे हैं। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि स्तंभों का तराशने का करीब 65 फीसदी काम पूरा हो चुका है। हालांकि उन्होंने मंदिर की अनुमानित लागत के बारे में नहीं बताया। 

उच्चतम न्यायालय ने मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर ट्रस्ट बनाने को कहा है। राम जन्मभूमि न्यास के प्रतिनिधियों को इसमें जगह मिलने की उम्मीद है। ऐसे में मंदिर निर्माण के लिए विहिप का बनाया खाका काम आ सकता है। अनाधिकारिक अनुमानों के मुताबिक 1990 के दशक के अंत में मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत 120 करोड़ रुपये आंकी गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष की मुद्रास्फीति के हिसाब से देखा जाए तो इस पर करीब 450 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। इसमें जमीन की कीमत शामिल नहीं है।

शर्मा के मुताबिक विहिप ने 1989 तक 275,000 गांवों से 3.50 करोड़ रुपये का चंदा एकत्र किया था। इसमें पहला चंदा सवा रुपये का था। हालांकि उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया कि 1990 के बाद से विहिप ने मंदिर निर्माण के लिए कितनी राशि जुटाई है। विहिप संघ परिवार का हिस्सा है। 

चंदे की राशि को बैंकों में रखा गया है और विहिप इन पैसों और उन पर मिले ब्याज का इस्तेमाल मंदिर के लिए पत्थर खरीदने पर करती है। 2014 में विहिप ने सारा पैसा खत्म होने का दावा किया। इसके बाद विहिप नेता अशोक सिंघल ने हिंदुओं से मंदिर निर्माण के लिए पत्थर के रूप में दान देने का आह्वान किया था। इससे करीब 30 ट्रक पत्थर अयोध्या पहुंचे थे।  

प्रस्तावित मंदिर के लिए पत्थरों को तराशने का काम 1989 में ही शुरू हो गया था लेकिन 6 दिसंबर, 1992 को एक भीड़ द्वारा विवादित स्थल पर बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद 1990 के दशक के मध्य में इसमें तेजी आई। शर्मा ने कहा कि मंदिर पर आने वाले कुल खर्च का अनुमान लगाना मुश्किल है और निर्माण कार्य शुरू होने तक फंड की जरूरत होगी। 

मंदिर का खाका नागर शैली के प्रस्तावित मंदिर के निर्माण के लिए करीब 175,000 घन फुट गुलाबी संगमरमर की जरूरत होगी। इसमें से 100,000 घन फुट पत्थरों को तराशने का काम पूरा हो चुका है। विहिप के प्रस्तावित दो मंजिला मंदिर में भूतल और पहली मंजिल पर 212 स्तंभ होंगे। इनमें से हर स्तंभ पर 16 छोटी मूर्तियां होंगी। मंदिर की लंबाई 268 फुट 5 इंच, चौड़ाई 140 फुट और ऊंचाई 128 फुट होगी। मंदिर का मंडप की माप 65 फुट 3 इंच होगी। विहिप की योजना के मुताबिक मंदिर के पांच हिस्से होंगे। इनमें अग्रभाग, सिंह द्वार, रंग मंडप, नृत्य मंडप और गर्भगृह शामिल हैं।

शर्मा ने कहा कि जब पत्थर तराशने का काम पूरे जोरशोर से चल रहा था तो कार्यशाला में करीब 100 कारीगर काम कर रहे थे। लेकिन अभी केवल 8 से 10 कारीगर काम में जुटे हैं। लेकिन उच्चतम न्यायालय के फैसले से राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो चुका है, इसलिए आने वाले दिनों में कार्यशाला में कारीगरों की संख्या बढऩे की उम्मीद है। शर्मा ने कहा, 'कार्यशाला लोगों के दिए गए चंदे पर काम करती है और यह विहिप का पैसा नहीं है। हमें पूरा विश्वास है कि जब मंदिर निर्माण का काम शुरू होगा तो उसमें कारसेवकपुरम में तराशे गए पत्थरों का इस्तेमाल होगा।' इस बीच निर्मोही अखाड़े के महंत रामदास ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का प्रशंसा की जिसने इस मुद्दे का हमेशा के लिए समाधान कर दिया। उन्होंने कहा, 'अखाड़ा ट्रस्ट में रचनात्मक भूमिका निभाएगा।' न्यायालय ने निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में शामिल करने का आदेश दिया है।

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