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पेशेवर पर लगेगा वाजिब कर!

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 11 07, 2019

राजस्व भरपाई के लिए कई विकल्पों पर विचार

अधिक मार्जिन कमाने वाले पेशेवरों और कारोबारियों को अनुमानित कराधान योजना का फायदा उठाने से रोकेगी सरकार
योजना का बेजा फायदा उठा रहे इन उद्यमियों से वसूला जाएगा सही दर से कर
व्यक्तिगत आयकर के स्लैब में बदलाव हुआ तो फिलहाल मिल रही कुछ रियायतें और कटौती की सुविधा हो सकती हैं खत्म

बिजनेस स्टैंडर्ड पेशेवर पर लगेगा वाजिब कर!तगड़ा मार्जिन यानी मुनाफा कमा रहे मगर अनुमानित कराधान योजना के तहत मामूली कर दे रहे पेशेवरों और उद्यमियों को भविष्य में एकदम उचित कर चुकाना पड़ सकता है। राजस्व संग्रह में कमी और वेतनभोगी वर्ग के लिए आयकर में कटौती की बढ़ती मांग के बीच सरकार की नजर पेशेवरों के ऐसे वर्ग पर टिक गई है। अगले आम बजट में यदि व्यक्तिगत आयकर का स्लैब बढ़ाया जाता है और रियायतें दी जाती हैं तो राजस्व में उससे आने वाली कमी पूरी करने के लिए सरकार इसी तरह के विकल्पों पर विचार कर रही है। कर अनुपालन में सुधार के लिए प्रशासनिक और आकलन व्यवस्था में बदलाव के तहत पिछले कुछ वर्षों में अतिरिक्त आय की घोषणा को सहज बनाए जाने पर भी विचार किया गया है। आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बचत से संबंधित मदों में कर छूट खत्म करने के विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं।

यदि प्रत्यक्ष कर संहिता की सिफारिशों के मुताबिक आयकर स्लैब को बड़ा कर कर की दर कम की जाती है तो खजाने 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये की चपत लगेगी। आयकर अधिनियम का मूल्यांकन करने वाले कार्यबल ने यह अनुमान लगाया है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'खपत को बढ़ावा देने के लिए बजट में वेतनभोगी वर्ग के लिए कर स्लैब में रियायत की घोषणा हो सकती है। लेकिन इससे राजस्व को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए राजस्व बढ़ाने के उपायों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। प्रत्यक्ष कर पर गठित कार्यबल के सुझावों सहित विभिन्न उपायों पर विचार किया जा रहा है।'

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सदस्य अखिलेश रंजन की अध्यक्षता वाली समिति ने मौजूदा 2.5 लाख रुपये के बजाय 5 लाख रुपये सालाना तक की आय को पूरी तरह करमुक्त करने की सिफारिश की है। साथ ही 2 करोड़ रुपये और इससे अधिक सालाना आय वालों के लिए 35 फीसदी का नया कर स्लैब बनाने की सिफारिश भी की गई है।

आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आयकर अधिनियम की धारा 44एडी के तहत अनुमानित कराधान योजना की वजह से राजस्व की बड़ी हानि हो रही है क्योंकि बड़ी संख्या में करदाता अपने पेशे या कारोबार में बहुत अधिक मार्जिन कमाते हैं, लेकिन बेहद कम कर चुकाकर निकल जाते हैं। कानून के अनुसार वित्त वर्ष में 2 करोड़ रुपये से कम का कारोबार करने वाले उद्यमी या पेशेवर अनुमानित कराधान योजना के तहत कर चुका सकते हैं। इसके तहत उनकी आय कुल कारोबारी की केवल 8 फीसदी मानी जाती है और उसी के अनुसार उन्हें कर चुकाना होता है। साथ ही उन्हें बहीखाते भी नहीं रखने होते। इसका मतलब यह है कि अगर कोई पेशेवर या उद्यमी साल में 1 करोड़ रुपये का कारोबार करता है तो उसकी आय केवल 8 लाख रुपये मान ली जाएगी और उसी पर उसे कर देना होगा।

एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, 'ब्यूटी पार्लर और इवेंट मैनेजमेंट जैसे कई उद्यमों में 50 फीसदी से भी ज्यादा मार्जिन होता है। कायदे से यह योजना ज्यादा पूंजी निवेश वाले कारोबार के लिए ही होनी चाहिए। अधिक मार्जिन वाले कारोबार को ऊंचे कर दायरे में लाना चाहिए।' प्रत्यक्ष कर कार्यबल ने अनुुमान लगाया है कि इन उपायों से 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है। क्लियरटैक्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा, 'खास तरह के कारोबार के लिए इस योजना को नए सिरे से तैयार करने या उनके लिए अलग योजना लाने से कर अनुपालन में सुधार होगा और ज्यादा कर की प्राप्ति हो सकती है।'

आयकर में कटौती से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए सरकार विभिन्न रियायतों को खत्म करने पर भी विचार कर रही है। एक अधिकारी ने कहा, 'व्यक्तिगत करदाताओं के लिए केवल बचत, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास पर आयकर कटौती जारी रखी जा सकती है और दूसरी रियायतें खत्म हो सकती हैं।'

मकान के किराये, बचत खाते पर ब्याज आदि में छूट से सरकार को 2018-19 में करीब 97,344 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्रत्यक्ष कर समिति ने अनुपालन में सुधार के लिए पिछले साल की आय में संशोधन को आसान बनाने का भी सुझाव दिया है। समिति का अनुमान है कि इन उपायों को लागू करने से पहले साल में 50,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'कई लोग पिछले साल के लिए अधिक आय की घोषणा करना चाहते हैं लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाते हैं क्योंकि उन्हें इसकी समीक्षा, जांच तथा जुर्माने का डर होता है।' समिति ने सुझाव दिया है कि पिछले साल के लिए अतिरिक्त आय की घोषणा की अनुमति देनी चाहिए और उसके लिए जुर्माना तथा अभियोजन की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। गुप्ता ने कहा, 'बचत खाते पर ब्याज, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर कर कटौती दी जाती है और इसके दायरे में बड़ा वर्ग शामिल होता है। हालांकि कई ऐसी रियायतें भी हैं जैसे कि दिव्यांग या दिव्यांग आश्रितों की देखभाल करने वालों को भी कुछ छूट मिलती है जो काफी महत्त्वपूर्ण हैं और उन्हें जारी रखा जाना चाहिए।'

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