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पैकेज से रियल्टी की अटकी परियोजनाएं होंगी बहाल

राघवेंद्र कामत / मुंबई November 07, 2019

रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए घोषित बहुप्रतीक्षित पैकेज से मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अटकी परियोजनाएं बहाल होने की उम्मीद है। विश्लेषकों ने कहा, इसकी वजह प्रस्ताव में हुआ थोड़ा बदलाव है। 25,000 करोड़ रुपये के फंड का इस्तेमाल घोषित हो चुकी गैर-निष्पादित आस्तियों और एनसीएलटी में समाधान के जा चुकी कंपनियों में भी हो सकेगा। मुंबई नगरपालिका क्षेत्र और एनसीआर सबसे ज्यादा प्रभावित देश के दो प्रॉपर्टी बाजार हैं और यहां क्रमश: 95,000 करोड़ रुपये और 1,95,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अटकी हुई हैं। टियर-2 शहरों में करीब 55,000 इकाइयां फंसी हुई हैं। प्रॉपइक्विटी के संस्थापक समीर जसूजा ने कहा, एनसीआर और मुंबई नगरपालिका क्षेत्र की करीब 80 फीसदी परियोजनाओं में जान आ जाएगी। बेंगलूरु की डेवलपर शोभा के वाइस चेयरमैन जे सी शर्मा ने कहा, इस फंड से घर खरीदारों के हितों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी और व्यावहारिक परियोजनाओं को नकदी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा संभावित खरीदारों के सेंटिमेंट में भी सुधार आएगा।
 
प्रभुदास लीलाधर के मुख्य कार्याधिकारी और मुख्य पोर्टफोलियो मैनेजर अजय बोडके ने कहा, इस फंड में अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बहाल करने की क्षमता है। एनपीए और एनसीएलटी मामलों समेत अन्य मांगे पूरी हो गई हैं, लेकिन डेवलपर ने कई अन्य मांगें सामने रखी हैं। वे वस्तु एवं सेवा कर में सुधार, अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में बदलाव और आयकर कानून में परिवर्तन चाहते हैं। हीरानंदानी कम्युनिटीज के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा, न सिर्फ रियल एस्टेट क्षेत्र में मांग अपर्याप्त है बल्कि सभी संबंधित व असंबंधित क्षेत्रों में भी। ऐसे में सरकार को अगले छह महीने के लिए जीएसटी की दर घटानी चाहिए। तैयार हाउसिंग इकाइयों पर जीएसटी नहीं लगता। निर्माणाधीन अफोर्डेबल घरों पर यह एक फीसदी है जबकि जो अफोर्डेबल श्रेणी में नहीं हैं उन पर यह 5 फीसदी है।
 
डीएलएफ के मुख्य कार्याधिकारी राजीव तलवार ने कहा, इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति तब मिलनी चाहिए जब डेवलपर वाणिज्यिक परिसंपत्तियां पट्टे पर देते हैं। संपत्तियों को पट्टे पर देने के मामले में जीएसटी 18 फीसदी है। ऐसे में इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति कच्चे माल के उपभोग के लिए मिलनी चाहिए। दूसरा, डेवलपर व निवेशकों का मानना है कि हाउसिंग की बिक्री बढ़ाने के लिए सरकार को अफोर्डेबल हाउसिंग में सीमा 45 लाख रुपये करनी चाहिए। शोभा डेवलपर्स के शर्मा ने कहा, अफोर्डेबल हाउसिंग के मामले में सरकार को इसकी सीमा बढ़ाकर 75 लाख रुपये या एक करोड़ रुपये करनी चाहिए।
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