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अचल संपत्ति क्षेत्र में सुधार

संपादकीय /  November 07, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सितंबर में घोषणा की थी कि तनावग्रस्त आवासीय परियोजनाओं को धन मुहैया कराया जाएगा। इस क्रम में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 25,000 करोड़ रुपये मूल्य का वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) गठित करने को मंजूरी दे दी। योजना के मुताबिक सरकार इस कोष में 10,000 करोड़ रुपये की राशि देगी जबकि भारतीय स्टेट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) मिलकर शेष 15,000 करोड़ रुपये का प्रबंध करेंगे। कोष का प्रबंधन एसबीआईकैप वेंचर्स लिमिटेड करेगी। विभिन्न अंशधारकों की मांग के अनुसार सरकार ने उन परियोजनाओं को भी इसमें शामिल किया है जिन्हें गैर निष्पादित परिसंपत्ति घोषित कर दिया गया था और जो राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट (एनसीएलटी) में ऋणशोधन की प्रक्रिया से गुजर रही थीं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कोष विभिन्न शहरों की 1,600 परियोजनाओं के 458,000 अधबने आवासों को ध्यान में रखकर काम करेगा।

 
यकीनन सरकार ने एआईएफ का गठन कर अच्छा किया है। इससे इन संकटग्रस्त परियोजनाओं को पूरा करने की सीधी जवाबदेही लेने के बजाय इनकी सहायता की जा सकेगी। निवेश की इस नई व्यवस्था में नियामकीय लचीलापन एसबीआई या एलआईसी के खुद के लचीलेपन की तुलना में अधिक होगा। प्रथमदृष्ट्या तो यही प्रतीत होता है कि यह तरीका कई तरह से मददगार साबित होगा। पहला, यह उन मकान खरीदारों को राहत देगा जिनकी बचत लंबित परियोजनाओं में फंसी है। तमाम लोग ऐसे भी हैं जिनको मकान का किराया भी देना पड़ रहा है और वे भारी-भरकम मासिक किस्त भी जमा कर रहे हैं। दूसरा, इससे अचल संपत्ति क्षेत्र में गतिविधियां शुरू होंगी। यह क्षेत्र नकदी के संकट और कोष की अनुपलब्धता के कारण दिक्कतों से दो-चार है। चूंकि अचल संपत्ति क्षेत्र कई अन्य क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है इसलिए कुलमिलाकर आर्थिक गतिविधियों को मदद मिलेगी और सीमेंट तथा उद्योग आदि क्षेत्रों को सीधी सहायता प्राप्त होगी। हाल के महीनों में इन क्षेत्रों की मांग में तेजी से कमी आई है।
 
यह सारी बात कागज पर तो बेहतर है लेकिन चीजें इतनी सीधी सपाट भी नहीं हैं। उदाहरण के लिए कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह कोष जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की दृष्टि से नाकाफी साबित हो सकता है। जेफ्रीज के मुताबिक यह कोष कुल लंबित परियोजनाओं के महज 16 फीसदी के लिए ही पर्याप्त होगा। वह भी तब जबकि ये परियोजनाएं 50 फीसदी तक पूरी हों। अन्य के आंकड़े इससे अधिक हैं। व्यापक तौर पर देखा जाए तो वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर होगा कि एसबीआईकैप इस कोष का इस्तेमाल कैसे करती है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि आखिर इस कोष को किस प्रकार के प्रतिफल का अनुमान है। इसके अतिरिक्त कोष को उन मामलों में जटिलता का सामना करना पड़ सकता है जहां अचल संपत्ति कंपनियां या परियोजनाएं ऋणशोधन प्रक्रिया से गुजर रही हों या एनसीएलटी के पास हों। यदि कोष कानूनी बाधाओं में फंस गया और अपना निवेश नहीं निकाल सका तो कोई मदद नहीं मिलेगी। यह ध्यान देना होगा कि ऐसे कोष में भविष्य का निवेश शुरुआती अनुभव पर निर्भर करेगा। यदि कोष आरंभ में बेहतर प्रतिफल हासिल नहीं कर पाया तो यह अचल संपत्ति क्षेत्र को एक और झटका होगा।
 
व्यापक स्तर पर देखा जाए तो यह क्षेत्र कई दिक्कतों से दो-चार है। नकदी संकट के अलावा धीमी आर्थिक वृद्धि के चलते मांग में कमी ने भी अनबिके मकानों की लंबी फेहरिस्त तैयार कर दी है। इसके चलते कई जगह कीमतों में भारी गिरावट आई है। एक अनुमान के अनुसार करीब देश भर में 12.5 लाख मकान बिकने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में व्यापक स्तर पर अचल संपत्ति क्षेत्र का सुधार, अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार पर निर्भर करेगा।
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