बिजनेस स्टैंडर्ड - लोगों की जिंदगी-मौत का सवाल
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लोगों की जिंदगी-मौत का सवाल

एजेंसियां /  November 06, 2019

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका वायु प्रदूषण दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में रह रहे करोड़ों लोगों के लिए जिंदगी-मौत का सवाल बन गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वायु प्रदूषण पर अंकुश लगा पाने में विफल रहने के लिए प्राधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना होगा। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता के पीठ ने सवाल किया, क्या आप लोगों को प्रदूषण की वजह से इसी तरह मरने देंगे। क्या आप देश को सौ साल पीछे जाने दे सकते हैं? पीठ ने कहा, हमें इसके लिए सरकार को जवाबदेह बनाना होगा। पीठ ने सवाल किया कि सरकारी मशीनरी पराली जलाए जाने को रोक क्यों नहीं सकती? 
 
न्यायालय ने केंद्र के साथ ही पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को निर्देश दिया कि पर्यावरण से संबंधित मुद्दों का ध्यान रखने के लिए 3 महीने के भीतर विस्तृत योजना तैयार की जाए। न्यायालय ने कहा कि कृषि हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों के हितों की देखभाल करना शासन का कर्तव्य है। न्यायालय ने कहा कि पराली जलाने की रोकथाम के लिए जरूरी है कि छोटे और सीमांत किसानों को आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराई जाए। न्यायालय ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वे पराली नहीं जलाने वाले लघु और सीमांत किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल का सहयोग प्रदान करें। न्यायालय ने निर्देश दिया की इन तीनों राज्यों में छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सहयोग 7 दिन के भीतर दिया जाए। न्यायाधीशों ने राज्य सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि यदि उन्हें लोगों की परवाह नहीं है तो उन्हें सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा, आप (राज्य) कल्याणकारी सरकार की अवधारणा भूल गए हैं। आप गरीब लोगों के बारे में चिंतित ही नहीं हैं। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। शीर्ष अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या सरकार किसानों से पराली एकत्र करके उसे खरीद नहीं सकती? 
 
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा, 'हम पराली जलाने और प्रदूषण पर नियंत्रण के मामले में देश की लोकतांत्रिक सरकार से और अधिक अपेक्षा करते हैं। यह करोड़ों लोगों की जिंदगी और मौत से जुड़ा सवाल है। हमें इसके लिए सरकार को जवाबदेह बनाना होगा।' गंभीर स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण में किसानों द्वारा पराली जलाए जाने की भागीदारी पर शीर्ष अदालत ने सोमवार को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्य सचिवों को 6 नवंबर को न्यायालय में पेश होने का निर्देश दिया था। दिल्ली और इससे लगे इलाकों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने मंगलवार को इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए अलग से नया मामला दर्ज किया। इस मामले में अन्य मामले के साथ ही बुधवार को सुनवाई हुई। 
 
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को भयावह करार दिया था। साथ ही, क्षेत्र में निर्माण एवं तोडफ़ोड़ की सभी गतिविधियों तथा कूड़ा-करकट जलाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। न्यायालय ने कहा कि उसके आदेश के बावजूद निर्माण कार्य एवं तोडफ़ोड़ की गतिविधियां करने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए। पीठ ने कहा था कि इलाके में यदि कोई कूड़ा-करकट जलाते पाया गया तो उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए और इस आदेश का किसी तरह का उल्लंघन होने पर स्थानीय प्रशासन तथा क्षेत्र के अधिकारी जिम्मेदार ठहराए जाएं। पीठ ने कहा था कि वैज्ञानिक आंकड़ों से पता चलता है कि क्षेत्र में रहने वालों की आयु इसके कारण घट गई है। 
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