बिजनेस स्टैंडर्ड - 'भगवान भी नहीं बदल सकते इन्फी के आंकड़े'
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'भगवान भी नहीं बदल सकते इन्फी के आंकड़े'

देवाशिष महापात्र / बेंगलूरु 11 06, 2019

खुलकर सामने आए नंदन नीलेकणी

इन्फोसिस के चेयरमैन ने कंपनी प्रबंधन की रणनीति का किया समर्थन
इन्फोसिस के विकास का श्रेय पारेख को दिया

बिजनेस स्टैंडर्ड व्हिसलब्लोअर द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद इन्फोसिस के सह-संस्थापक और चेयरमैन नंदन नीलेकणी पहली बार कंपनी के मौजूदा प्रबंधन और कंपनी को लेकर उनकी विकास की रणनीति के क्रियान्वयन के पक्ष में खुलकर सामने आए। उन्होंने इन्फोसिस की सुदृढ़ प्रक्रिया पर मुहर लगाते हुए कहा कि भगवान भी इस आईटी सेवा फर्म के वित्तीय आंकड़ों को बदल नहीं सकते। विश्लेषकों के साथ बातचीत में नीलेकणी ने कहा, 'इन्फोसिस में कामकाज की प्रक्रिया काफी सुदृढ़ है। यहां तक की भगवान भी कंपनी के वित्तीय आंकड़ों को बदल नहीं सकते। हमारे पास शानदार वित्तीय टीम है और कर्मचारियों की निष्ठा उच्च स्तरीय है और वे इन आरोपों को लेकर अपमानित महसूस कर रहे हैं।'

हालांकि उन्होंने कहा, 'जब जांच चल रही हो तो मैं पक्षपाती नहीं होना चाहता। ऐसे में जांच की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।' 20 सितंबर को लिखे पत्र में एक अज्ञात समूह जो खुद को 'नैतिक कर्मचारी' कह रहा है, ने इन्फोसिस के मौजूदा प्रबंधन पर अल्पावधि में राजस्व और मुनाफे को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए अनैतिक कदम उठाने का आरोप लगाया था। आरोपों के मुताबिक करीब 5 करोड़ डॉलर का वीजा लागत को टाल दिया गया है, वहीं बड़े सौदों की राजस्व प्राप्ति में लेखा मानकों के हिसाब से अनुपालन नहीं किया गया है। फिलहाल इन्फोसिस की जांच समिति इस मामले की जांच कर रही है।

नीलेकणी ने कहा, 'हमारा लक्ष्य इस जांच को जल्द से जल्द पूरा करना है। मैंने इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है क्योंकि यह जांचकर्ताओं के लिए उचित नहीं होगा।'  व्हिसलब्लोअर के आरोपों की वजह से ध्यान भटकने के बावजूद बोर्ड के गैर-कार्यकारी चेयरमैन ने कहा कि कंपनी का कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है और ग्राहकों के मजबूत समर्थन की बदौलत बड़े सौदे का प्रवाह बना हुआ है।  नीलेकणी ने कहा, 'सौदे पहले की तरह ही आ रहे हैं और आज सुबह ही मैंने एक बड़े सौदे से जुड़ा ईमेल देखा है, जिसे सलिल (सलिल पारेख) ने मुझे फॉरवर्ड किया था। कुल मिलाकर हम ग्राहकों के साथ अच्छा कर रहे हैं।'

बड़े सौदे में शून्य मार्जिन के आरोपों पर कंपनी ने कहा कि प्रबंधन को विकास की रणनीति पर आगे बढऩे का अधिकार है और बोर्ड इसका पूरा समर्थन करता है। नीलेकणी ने कहा, 'मैं भरोसा दे सकता हूं कि बोर्ड और ऑडिट समिति बड़े सौदों से अच्छी तरह वाकिफ हैं और प्रबंधन अपने अधिकार के दायरे में ही बड़े सौदों कका चयन किया है। यह प्रबंधन का विशेषाधिकार है कि वह कितना मार्जिन चाहते हैं।' इन्फोसिस ने आज सुबह नियामकीय जानकारी में कहा कि व्हिसलब्लोअस की शिकायत में कंपनी के सह-संस्थापकों और पूर्व कर्मचारियों के शामिल होने की अटकलों वाली खबरें बेबुनियाद हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि इससे बेहद सम्मानित और प्रतिष्ठित शख्सियतों की छवि को खराब करने का प्रयास किया गया है।

कंपनी ने आश्वस्त किया है कि निष्पक्ष जांच की जा रही है और खामी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। कंपनी ने यह भी कहा कि व्हिसलब्लोअर की लगातार शिकायतों के बावजूद कंपनी अपने डेढ़ दशक पुरानी व्हिसलब्लोअर नीति में कोई बदलाव नहीं करेगी। नीलेकणी ने कहा, 'हम हर समय व्हिसलब्लोअर की शिकायतों को सुनते हैं। अगर कार्रवाई करने की जरूरत होती है तो हम ऐसा करते हैं। अधिकांश मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में हमने उन मामलों को बंद कर दिया। इसे मीडिया में जारी नहीं किया गया।'

डेढ़ साल के दौरान इन्फोसिस के विकास का श्रेय मुख्य कार्याधिकारी सलिल पारेख को देते हुए नीलेकणी ने कहा कि पारेख कंपनी को पुनर्जीवित करने और विकास को गति देने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। प्रबंधन की रणनीति को निदेशक मंडल का पूरा समर्थन हासिल है। विश्लेषकों के साथ बैठक में कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी और मुख्य वित्त अधिकारी ने अपनी पेशेवर निष्ठा पर जोर दिया। प्रस्तुतीकरण देने से पहले दोनों ने व्हिसलब्लोअर के आरोपों के संदर्भ में शुरुआती बयान दिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पूरे कॅरियर में उत्कृष्ट नैतिक मानदंडों को बरकरार रखा है। 

पारेख ने कहा, 'मैंने पिछले दो साल में बड़े और जटिल संगठन में कारोबार में व्यापक बदलाव के लिए पूरी प्रतिबद्घता एवं निष्ठा से काम किया है। जिन्होंने मेरे साथ काम किया है वे मुझे जानते हैं। मैं समावेशन में यकीन करता हूं और विभेदकारी चीजों को मेरे लिए जगह नहीं है।'  इसी तरह कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी नीलांजन रॉय ने कहा, '30 साल के अपने पेशेवर जीवन में मैंने हमेशा मूल्यों और निष्ठा के उच्च मानदंड का पालन किया है।'
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