बिजनेस स्टैंडर्ड - समूह में दो से ज्यादा सीआईसी नहीं
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समूह में दो से ज्यादा सीआईसी नहीं

रिजर्व बैंक की समिति ने कर्ज की समस्या घटाने के लिए दिया सुझाव
सुब्रत पांडा / मुंबई 11 06, 2019

मुख्य सिफारिशें

सभी सीआईसी में जोखिम प्रबंधन समिति होनी चाहिए
समूह में सीआईसी के दो से ज्यादा स्तर की अनुमति नहीं होगी
ऑडिट समिति गठित करना अनिवार्य होगा
सालाना सांविधिक ऑडिटर सर्टिफिकेट जमा कराना अनिवार्य
समय समय पर सीआईसी की ऑनसाइट जांच की जाएगी

बिजनेस स्टैंडर्ड समूह में दो से ज्यादा सीआईसी नहींभारतीय रिजर्व बैंक ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों (सीआईसी) की सीमा तय करने वाले नियमों की समीक्षा के मकसद से जो कार्यसमूह गठित किया था, उसने कहा है कि 2021 तक किसी भी समूह के भीतर इस तरह की कंपनियों के 2 से अधिक स्तर नहीं होने चाहिए। समूह की रिपोर्ट में कहा गया, 'किसी भी समूह में मौजूद सीआईसी को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों के दो से अधिक स्तरों के जरिये निवेश नहीं करना चाहिए और इन स्तरों में खुद वह कंपनी भी शामिल होनी चाहिए।' इन सिफारिशों पर अमल किया गया तो कंपनियों के लिए कर्ज लेने की गुंजाइश कम हो जाएगी। रिजर्व बैंक अपनी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में भी इस बात पर चिंता जता चुका है कि भारतीय कंपनियां बहुत अधिक शेयर गिरवी रखती हैं और विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के आपस में जुड़े होने से जोखिम बढ़ जाता है।

2013 के कंपनी अधिनियम में किसी भी समूह में कंपनियों के अधिक से अधिक तीन स्तर (शीर्ष या मुख्य कंपनी समेत) रखने की अनुमति दी गई है, लेकिन गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को अब तक छूट मिली है। इसी कारण 'किसी समूह में सीआईसी के कई स्तर (क्रॉस होल्डिंग समेत) बनते जा रहे हैं।' वर्तमान व्यवस्था में किसी भी समूह के भीतर सीआईसी की संख्या पर कोई बंदिश नहीं है इसीलिए एक ही पूंजी पर 'कई गुना कर्ज' भी लिया जा सकता है। इस कारण जरूरत से ज्यादा कर्ज हो सकता है।

मान लीजिए कि कोई सीआईसी अपनी समायोजित शुद्ध हैसियत का 2.5 गुना कर्ज ले सकती है। यदि किसी समूह में 2 सीआईसी हुईं तो 100 रुपये की पूंजी पर 11.25 गुना कर्ज लिया जा सकता है। यह एनबीएफसी के लिए स्वीकृत कर्ज सीमा से बहुत ज्यादा है। कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियां जितनी बढ़ती जाएंगी, समूह के स्तर पर कर्ज लेने की गुंजाइश भी उतने गुना बढ़ सकती है। परिचालन कंपनी अथवा एनबीएफसी समूह की सीआईसी से रकम हासिल करने के साथ ही बैंक और बाजार से खुद भी कर्ज ले सकती हैं।

रिपोर्ट कहती है, 'इस सूरत में समूह के स्तर पर कर्ज बहुत अधिक बढ़ जाएगा औ उस पर नजर रखना मुश्किल हो जाएगा।' कार्यसमूह ने सिफारिश की है कि समायोजित नेटवर्थ की गणना के लिए सीआईसी द्वारा अन्य सहायक सीआईसी (प्रत्यक्ष या परोक्ष) में किए गए पूंजी योगदान को उनकी निधि से 10 फीसदी तक घटाई जानी चाहिए। इसके साथ ही सहायक सीआईसी को किसी अन्य सीआईसी में निवेश की अनुमति नहीं होनी चाहिए। यह सिफारिश भी की गई है कि सीआईसी को नए नियमों के अनुपालन के लिए कुछ वर्ष की मोहलत देनी चाहिए।

इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज के धराशायी होने के बाद कार्यसमूह ने पाया कि एकल आधार पर सीआईसी का कर्ज तय सीमा के दायरे में रह सकता है लेकिन जब समेकित स्तर पर देखा गया तो इन कंपनियों का कर्ज वित्त वर्ष 2018 के अंत में काफी अधिक हो गया था। अगस्त 2019 तक आरबीआई के पास 63 सीआईसी पंजीकृत थीं और सीआईसी की कुल संपत्तियों का आकार 2.64 लाख करोड़ रुपये था और उन पर करीब 87,048 करोड़ रुपये की उधारी थी। शीर्ष 5 सीआईसी के पास कुल संपत्तियों का करीब 60 फीसदी और कुल उधारी का 69 फीसदी था।

सीआईसी वाले प्रत्येक कारोबारी समूहों के लिए समूह जोखिम प्रबंधन समिति बनाने का सुझाव दिया गया है, जो जोखिम प्रबंधन प्रारूप की समीक्षा करने के साथ ही कर्ज के स्तर की निगरानी कर सके। कार्यसमूह ने यह भी कहा है कि बेहतर कारोबारी संचालन मानदंड के लिए सीआईसी को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बाजार अनुशासन तथा संचालन मानदंड में सुधार आएगा।

इसके अलावा कार्यसमूह ने सुझाव दिया है कि अगर सीआईसी के निदेशक मंडल के चेयरमैन गैर-कार्यकारी हों तो एक-तिहाई सदस्य स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए या फिर बोर्ड के आधे सदस्य स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए। इसके अलावा बोर्ड में ऑडिट समिति बनाने की भी सिफारिश की गई है जिसके चेयरमैन स्वतंत्र निदेशक होंगे। वित्तीय विवरण, खुलासे, संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन की समीक्षा के लिए हर तीन महीने में समिति की बैठक होनी चाहिए। बेहतर पारदर्शिता के लिए सीआईसी को समूह की सभी कंपनियों जिनमें उनका निवेश है, का एकीकृत वित्तीय विवरण तैयार करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'समूह स्तर पर संचालन को सुदृढ़ बनाने के लिए सीआईसी के ऑडिटर और उस समूह के ऑडिटर एक ही नहीं होने चाहिए। सीआईसी के सांविधिक ऑडिटरों को उक्त समूह की सभी कंपनियों के खातों की सीमित समीक्षा करने की जरूरत होगी।'  कार्यसमूह ने यह भी कहा कि सीआईसी के पंजीकरण के लिए मौजूदा 100 करोड़ रुपये संपत्ति के आकार को बरकरार रखा जाना चाहिए। जिन सीआईसी में आम लोगों का पैसा लगा हो उसे आरबीआई के पास पंजीकृत कराना होगा और जिनमें आम लोगों का पैसा नहीं लगा होगा उन्हें आरबीआई के पास पंजीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी। 
Keyword: RBI, CIC, company, group,,
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