बिजनेस स्टैंडर्ड - इन्फोसिस खुलासा मामले में नारायण मूर्ति की चुप्पी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, November 22, 2019 05:46 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

इन्फोसिस खुलासा मामले में नारायण मूर्ति की चुप्पी

इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  November 05, 2019

इन्फोसिस के बोर्ड से आर शेषशायी और विशाल सिक्का की विदाई के कुछ ही दिन बाद 28 अगस्त, 2017 को एन आर नारायण मूर्ति ने कंपनी के शेयरधारकों के नाम एक लंबा पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने लिखा था, 'जब संगठन के संचालन के तौर-तरीकों को लेकर बादल घिरे हों तो हमें बोलना चाहिए।' उन्होंने कंपनी प्रबंधन को यह सलाह भी दी थी कि 'जब भी संदेह में हों तो बिना किसी हिचक के अपनी बात रखें क्योंकि इन्फोसिस सभी शेयरधारकों की नजरों में सर्वाधिक सम्मानित कंपनी बने रहना चाहती है।'

 
कंपनी जगत में भारत की सर्वाधिक सम्मानित शख्सियतों में शामिल व्यक्ति ने यह सही सलाह दी थी। लेकिन निश्चित रूप से इस पर बहस हो सकती है कि मूर्ति क्या खुद अपनी बात पर बने रहे हैं? अक्टूबर में इन्फोसिस ने कंपनी के भीतर अनैतिक गतिविधियों के आरोप लगाने वाले दो व्हिसल ब्लोअर के बारे में शेयरधारकों को सूचित करने में तीन हफ्ते का वक्त लगा दिया। मूर्ति पुराने निदेशक मंडल और उसके मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) के बारे में अपनी आलोचना को लेकर काफी सख्त थे, वहीं इस बार की उनकी चुप्पी बहरा करने वाली है। इसकी उलटी दलील यह है कि मूर्ति इस बार समय से पहले इसलिए नहीं बोल रहे हैं क्योंकि इन्फोसिस का एक गैर-कार्यकारी चेयरमैन मौजूद है। लेकिन इस दलील में ज्यादा दम नहीं है क्योंकि पिछली बार भी इन्फोसिस के चेयरमैन के तौर पर शेषशायी पदासीन थे। लेकिन वह भी मूर्ति को सार्वजनिक रूप से आलोचनात्मक बयान देने से नहीं रोक पाया।
 
पिछली बार एक व्हिसल ब्लोअर ने इजरायली ऑटोमेशन कंपनी पनाया के 20 करोड़ डॉलर में किए गए अधिग्रहण में अनियमितता के आरोप लगाए थे। मूर्ति ने उस सौदे को मंजूरी देने के बोर्ड के फैसले पर सवाल उठाने के साथ ही पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी राजीव बंसल को दिए गए बहुत अधिक सेवरेंस पैकेज की तुलना 'हश मनी' (मुंह बंद रखने के लिए दी गई रिश्वत) से भी की थी। उन्होंने व्हिसल ब्लोअर के पत्र का हवाला भी दिया था जिसमें बंसल को दिए पैकेज के बारे में शेयरधारकों से झूठ बोलने का शेषशायी पर आरोप भी लगाया था। इसके अलावा उन्होंने सिक्का के कामकाज के तरीकों को लेकर भी खुले सवाल उठाए थे।
 
यह बिल्कुल अलग बात है कि अंदरूनी एवं बाहरी जांचों में सिक्का को कदाचार के आरोपों से सर्वसम्मति से बरी कर दिया गया। इसके पहले कानूनी फर्म गिब्सन, डन ऐंड क्रचर ने यह नतीजा निकाला था कि कोई भी ऐसा सबूत नहीं है जो वर्ष 2015 में हुए पनाया के अधिग्रहण में सिक्का या किसी भी अन्य इन्फोसिस कर्मचारी के लाभान्वित होने का उल्लेख करे। इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने भी कहा है कि कंपनी को पनाया के विवादित सौदे में गड़बड़ी का कोई भी सबूत नहीं मिला है। यह बयान एक तरह से सिक्का और तत्कालीन बोर्ड को क्लीन चिट देता है। इसने पनाया को लेकर उपजे विवाद के बाद कंपनी के तत्कालीन शीर्ष प्रबंधन एवं बोर्ड में किए गए व्यापक फेरबदल को लेकर सवाल खड़ा कर दिया। यह अहम है कि कंपनी बोर्ड ने गिब्सन की पूरी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मूर्ति की मांग नहीं मानी।
 
हालात इस बार भी कुछ खास अलग नहीं हैं। खुद को 'एथिकल इम्प्लॉइज' बताने वाले कुछ कर्मचारियों ने इन्फोसिस के बोर्ड एवं अमेरिका के बाजार नियामक को लिखे पत्र में यह आरोप लगाया है कि मौजूदा सीईओ सलिल पारेख मुनाफे को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए लेखा-कार्य में गड़बड़ी कर रहे हैं। इस बारे में मीडिया में खबरें आने के बाद ही मौजूदा चेयरमैन ने यह माना कि बोर्ड के एक सदस्य के पास सितंबर में दो अनाम पत्र आए थे जिनमें कुछ 'सामान्य तरह के आरोप' लगाए गए हैं और इन दोनों पत्रों को ऑडिट समिति के समक्ष 10 अक्टूबर को रखा भी गया था।
 
इसमें इसका जिक्र नहीं किया गया कि शिकायती पत्र मिलने और इसे ऑडिट समिति को सौंपे जाने के बीच एक लंबा फासला रहा है। स्टॉक एक्सचेंजों को तो काफी बाद में इसकी जानकारी दी गई जबकि यह स्पष्ट था कि इन्फोसिस के शेयरों के बाजार मूल्य को प्रभावित करने की पूरी क्षमता इस सूचना में थी। यह सच है कि इन्फोसिस ने कानूनी प्रावधानों का पालन किया है और शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में इसका जिक्र भी किया है। लेकिन सर्वोत्तम कॉर्पोरेट गवर्नेंस की कंपनी की बहुचर्चित परंपराएं नदारद थीं। खासकर उस समय जब कंपनी की अपनी 'खुलासे के लायक' नीति ही कह रही थी कि किसी व्हिसल ब्लोअर से मिली शिकायत अगर बाहरी एजेंसी से जांच के लायक पाई जाती है तो उसके बारे में शेयरधारकों को भी जानकारी दी जानी चाहिए।
 
शेयर बाजार में ऐसी अफवाहें हैं कि बाजार में कुछ समूह ऐसे हो सकते हैं जिन्हें व्हिसलब्लोअर के पत्रों में लिखी बातों की जानकारी पहले से रही हो। भले ही इस अटकल पर बहुत अंदाजा नहीं लगाना चाहिए लेकिन यह एक पहेली ही है कि 11 अक्टूबर को तिमाही नतीजे घोषित करने वाले इन्फोसिस बोर्ड ने इन पत्रों के बारे में खुलासा क्यों नहीं किया? अगर इन पत्रों के बारे में न बताने की वजह यह थी कि प्रबंधन अपने अच्छे प्रदर्शन से ध्यान बंटाने वाली कोई भी बात नहीं लाना चाहता था तो वह एक अपरिपक्व निर्णय ही था। 
 
वैसे जांच जारी होने के समय गड़बड़ी का कोई भी निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है लेकिन यह सच है कि इन्फोसिस के बोर्ड ने अपने संस्थापक नारायण मूर्ति की 'बिना हिचक के खुलासा करने' की सलाह नहीं मानी है। इस बात को एक हद तक समझा जा सकता है लेकिन मूर्ति की चुप्पी परेशान करने वाली है। 
Keyword: whistleblower, infosys, IT, share, market,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या व्यावसायिक खनन के लिए खदान आवंटन करना उचित कदम है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.