बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रदूषण: कार्य योजना जरूरी
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प्रदूषण: कार्य योजना जरूरी

संपादकीय /  November 05, 2019

दीवाली के दिन पटाखों के इस्तेमाल से हर वर्ष भयंकर प्रदूषण हो जाता है, फसल अवशेष जलाए जाने से हर वर्ष करीब एक महीने तक प्रदूषक तत्त्व उत्सर्जित होते हैं और परिवहन स्रोतों के माध्यम से तो दिल्ली में पूरा वर्ष भारी प्रदूषण फैलता है। न्यायपालिका जहां हर वर्ष दीवाली पर पटाखों के इस्तेमाल पर आंशिक रूप से अंकुश लगाने में कामयाब रही, वहीं फसल अवशेष जलाने पर उसका प्रतिबंध प्रभावी नहीं साबित हुआ। साल भर होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयास भी उतने प्रभावी नहीं दिखे। केंद्र सरकार ने जहां इस विषय पर खामोशी बरती है, वहीं दिल्ली और पंजाब की राज्य सरकारें एक दूसरे को दोषी ठहराने में व्यस्त हैं। स्पष्ट है कि सरकार के विभिन्न अंगों द्वारा तदर्थ उपाय अपनाए जाने के बजाय एक व्यापक और समन्वित कार्य योजना की आवश्यकता है। इसके लिए हवा की गुणवत्ता की निरंतर निगरानी करनी होगी और प्रदूषण के स्रोतों पर भी नजर रखनी होगी। इस दिशा में हालांकि व्यापक अकादमिक शोध किया गया है लेकिन परिणाम इसलिए अलग-अलग रहे क्योंकि हर शोध में अलग परिभाषा, मानकों और अवधि का प्रयोग किया गया।

 
व्यापक कार्य योजना में सरकार या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हवा की गुणवत्ता को लेकर एक आधिकारिक रिपोर्ट पेश करनी होगी जिसमें साल भर प्रदूषण फैलाने वाले प्रदूषक तत्त्वों की जानकारी हो। रिपोर्ट में हर स्रोत की जानकारी हो और सरकार इसे स्वीकृति प्रदान करे। हमारे आसपास की हवा ही हमारे स्वास्थ्य और जीवन को नुकसान पहुंचा रही है और प्रदूषण के स्रोत का पता लगाकर हम विशिष्ट कार्य योजना तैयार कर सकते हैं। आधिकारिक मंजूरी मिलने से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र साथ मिलकर काम कर सकेंगे। प्रदूषण को लेकर ऐसी आधिकारिक और समयबद्ध रिपोर्ट को आधार बनाकर व्यवस्थित कार्य योजना की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
 
इस योजना के तहत भी सरकार की विभिन्न शाखाओं और अलग-अलग चरणों में अलग-अलग कार्य आवंटित करने होंगे। उदाहरण के लिए दिल्ली सरकार को अपने दायरे में आने वाली 8,000 किलोमीटर सड़क के ऊपरी हिस्से का रखरखाव करना चाहिए, सार्वजनिक परिवहन में सुधार करना चाहिए, वाहनों से होने वाले प्रदूषण की जांच कड़ी करनी चाहिए और ईंट का प्रयोग बंद होना चाहिए। केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दिल्ली के आसपास के करीब 30 कोयला आधारित बिजली संयंत्र उत्सर्जन मानकों का पालन करें। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के किसानों को पानी की खपत और प्रदूषण बढ़ाने वाले धान की खेती से अन्य पर्यावरण के अनुकूल फसलों का रुख करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। किसानों की आर्थिकी में बदलाव लाना होगा ताकि फसल अवशेष को एकत्रित करना और उसका निपटान करना, जलाने की तुलना में अधिक बेहतर साबित हो। न्यूनतम कार्बन उत्र्सजन वाले वाहन मसलन ई-स्कूटर आदि की दिशा में तत्काल बढऩा होगा। दिल्ली के कई नगरीय विभागों को साथ आकर कचरा संग्रहण और निस्तारण की किफायती व्यवस्था कायम करनी चाहिए। विनिर्माण क्षेत्र तथा अन्य प्रदूषणकारी औद्योगिक क्षेत्रों में नियम तोडऩे वालों को दंडित किया जाना चाहिए। ऐसी कार्य योजना हकीकत के करीब होनी चाहिए और उसे समयबद्ध तरीके से अंजाम देना होगा। इसकी निगरानी सरकार और नागरिक समाज दोनों को करनी होगी।
 
यदि क्रियान्वयन कमजोर हुआ तो कोई कार्य योजना सफल नहीं होगी। प्रदूषक तत्त्वों का मापन नीतिगत दृष्टि से अहम है लेकिन प्रदूषण करने वालों को रोकना क्रियान्वयन की दृष्टि से कहीं अधिक महत्त्व रखता है। उपग्रहों के माध्यम से रियल टाइम रिमोट सेंसिंग तस्वीरें खींचना तथा ऐसे अन्य तरीकों को निगरानी विकल्पों में शामिल किया जाना चाहिए। तदर्थ तरीके से काम करने और एक दूसरे पर अंगुली उठाने का वक्त चला गया। 
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