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देश में मेडिकल उपकरण व बल्क दवा विनिर्माण के 8 पार्क बनाने की तैयारी

सोहिनी दास / मुंबई November 04, 2019

सरकार ने 8 विनिर्माण पार्क बनाने की इजाजत दी है, जिसमें से 4 में बल्क दवाओं और 4 में मेडिकल उपकरणों का विनिर्माण होगा। इसका मकसद स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात में कमी लाना है। इसके लिए विशेष उद्देश्य इकाई (एसपीवी) जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करेगी और इन पार्कों के लिए मंजूरियां लेगी, जहां कंपनियां आसानी से आकर काम कर सकेंगी। इस मामले से नजदीकी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पिछले महीने सरकार ने इन पार्कों को बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। बल्क दवाओं के पार्क आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और असम में बनाए जाएंगे, जबकि मेडिकल उपकरण पार्क आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में बनाए जाएंगे। 
 
हाल ही में उद्योग के साझेदारों ने औद्योगिक नीत और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने यह कहा कि स्थानीय विनिर्माण बढ़ाए जाने व आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। बल्क दवाएं और मेडिकल उपकरण दो ऐसी श्रेणियां हैं, जिनमें भारत आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। भारत बल्क दवाओं की अपनी जरूरतों का 65-70 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें सबसे ज्यादा चीन से आयात होता है। मेडिकल उपकरणों का आयात इससे कहीं ज्यादा 85-90 प्रतिशत तक होता है। अधिकारी ने कहा, 'सरकार मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश कर रही है, जिससे कि अगले 5 महीने में जमीनी स्तर पर काम शुरू किया जा सके। संबंधित राज्य सरकारें बुनियादी ढांचा सुविधाएं जैसे कॉमन इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट, परीक्षण के लिए प्रयोगशालाएं व अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराएंगी। एसपीवी जरूरी मंजूरियां लेगा, जिसमें पर्यावरण मंजूरी भी शामिल है।' अधिकारी ने कहा कि बल्क दवा इकाइयों के लिए पर्याïवरण संबंधी मंजूरी लेना सबसे कठिन है और एसपीवी यह सुनिश्चित करेगी। 
 
सरकार प्रत्येक बल्क दवा पार्क के लिए परियोजना लागत का 70 प्रतिशत या 100 करोड़ रुपये (जो भी कम हो) एकमुश्त अनुदान मुहैया कराएगी। वहीं मेडिकल उपकरण पार्कों के लिए 25 करोड़ रुपये मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा दवा विभाग फॉम्र्युलेशन (मेडिसिन) विनिर्माताओं के लिए ब्याज छूट योजना भी बना रहा है। अधिकारी ने कहा, 'दवा क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने का विचार है और उनके उन्नयन के लिए कुछ सहयोग की जरूरत है। हम एक योजना बना रहे हैं, जहां सरकार इन इकाइयों द्वारा लिए गए किसी कर्ज पर 6 प्रतिशत ब्याज छूट देगी, जिससे इकाइयां डब्ल्यूएचओ जीएमपी अनुपालन के लिए अपना बुनियादी ढांचा दुरुस्त कर सकें।' 
 
उन्होंने कहा, 'सरकार की योजना सार्वजनिक क्षेत्र के एक वित्तीय संस्थान को अंतिम रूप देने की है, जिसे ब्याज छूट योजना लागू की जा सके। बैंक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करेंगे और कर्ज देने के पहले सरकार को सूचित करेंगे।' इस बैठक में शामिल रहे एक मेडिकल उपकरण क्षेत्र के प्रतिनिधि ने कहा कि कि सरकार यह जानने को इच्छुक थी कि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के  लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।  एसोसिएशन आप इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) के फोरम कोऑर्डिनेटर और हिंदुस्तान सिरिंज ऐंड मेडिकल डिवाइस के प्रबंध निदेशक राजीव नाथ ने कहा कि मेडिकल उपकरणोंं का आयात वित्त वर्ष 2015 मेंं 23,169 करोड़ रुपये का था, जो वित्त वर्ष 19 में बढ़कर 38,837 करोड़ रुपये का हो गया है। उन्होंने कहा कि  आयातित उपकरणों पर शुल्क और कर जोडऩे के बाद भारत में मेडिकल उपकरणों का खुदरा कारोबार करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये का होने का अनुमान है, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 10,000 करोड़ रुपये का है। 
 
भारत में सबसे ज्यादा मेडिकल उपकरणों का आयात अमेरिका से होता है। नाथ ने कहा कि अगर नीतियों पर नए सिरे से विचार किया जाए और कारोबारियों को भारत में विनिर्माण करने को प्रोत्साहित किया जाए तो इस क्षेत्र में कम से कम 50,000 करोड़ रुपये निवेश की संभावना है। 
Keyword: medial, equipment, pharma, medicine,,
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