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कौशल के आधार पर पेशे के वर्गीकरण का प्रस्ताव

सोमेश झा / नई दिल्ली November 04, 2019

केंद्र सरकार ने पहली बार पेशों का कौशल के आधार पर वर्गीकरण का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद विभिन्न प्रकार के कामों के लिए न्यूनतम वेतन का स्तर तय करने में विसंगतियां खत्म करना है। वेतन (केंद्रीय) नियम 2019 के मसौदे में कौशल वाले विभिन्न पेशों को अर्धकुशल, कुशल, अकुशल और बहुत ज्यादा कुशल की श्रेणियों में विभाजित किया गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस मसौदे को सलाह के लिए सार्वजनिक किया है। सरकार द्वारा वेतन तय करने के मौजूदा मानकों से यह अलग होगा, जिसमें कौशल और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर वेतन की दरें तय की जाती हैं, लेकिन इसमें यह नहीं स्पष्ट होता है कि कौन सा काम कुशल और कौन सा अकुशल की श्रेणी में आता है। इसकी वजह से कानून में एक अस्पष्ट स्थिति बनी हुई है। 
 
मसौदा नियमों के मुताबिक अकुशल पेशों का मतलब ऐसी नौकरियों से है, जहां साधारण रूप से परिचालन अनुभव लागू होता है और उसमें अतिरिक्त कौशल की जरूरत नहीं होती है। वहीं कुशल पेशों में वे पेशे आते हैं, जिसमें कौशल और नौकरी करने के अनुभव के साथ प्रदर्शन करने में सुघड़ता या तकनीकी या व्यावसायिक संस्थानों में प्रशिक्षण के माध्मय से कुशलता हासिल की गई हो और जिसमें पहल करने व निर्णय करने की योग्यता हो। ऐसे पेशे, जिसमें तकनीकी या पेशेवर प्रशिक्षण या एक निश्चित अवधि तक प्रायोगिक पेशेगत अनुभव के माध्यम हासिल किया गया कौशल हो, उसे उच्च कुशल की श्रेणी में रखा गया है। 
 
श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'नियोक्ता यह कहकर कर्मचारियों का शोषण करते हैं कि उनका काम अकुशल या अर्धकुशल है, भले ही उनके पेशे में एक निश्चित कौशल की जरूरत होती है। इस तरह से उन्हें कम वेतन वाले ढांचे में रखा जाता है। मंत्रालय ने अब कौशल के मुताबिक पेशोंं की सूची तैयार की है, जो गतिशील प्रकृति की होगी।' मसौदा नियम के 681 सूचीबद्ध पेशों में सशस्त्र सुरक्षा गार्ड, सुपरवाइजर, सर्वेयर, कार्पेंटर (क्लास-1) को उच्च कौशल ाले पेशेवरों में रखा गया है। वहीं इलेक्ट्रीशियन, दर्जी, और चालकों को कुशल, खानसामा और मोडी को अर्धकुशल और डेयरी कुली, कार्यालय के चपरासी व सफाई कर्मी को अकुशल की श्रेणी में रखा गया है। 
 
आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ के महासचिव वृजेश उपाध्याय ने कहा, 'यह साफ होना अहम है कि किसे कुशल और किसे अकुशल माना जाएगा। लेकिन केंद्र द्वारा जिस तरीके का इस्तेमाल किया जाता है, वह त्रुटिपूर्ण है। अगर एक व्यक्ति, जिसे अकुशल के रूप मेंं वर्गीकृत किया गया है और वह लंबे समय से एक ही पेशे में काम कर रहा है तो उसे हमेशा के लिए अकुशल कर्मचारी नहीं माना जा सकता है क्योंकि वह अपने अनुभव के साथ कुछ कौशल हासिल कर लेता है।'  केंद्र सरकार ने मुख्य श्रम आयुक्त की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति के गठन का प्रस्ताव किया है। यह समिति नैशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क या पेशों के राष्ट्रीय वर्गीकरण को ध्यान में रखकर कौशल के श्रेणीकरण की सलाह देगी। 
 
मराठा चैंबर आफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज ऐंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष प्रदीप भार्गव ने कहा, 'अगर कोई काम खतरनाक की श्रेणी में न हो तो सरकार कौशल की श्रेणी पेशे के आधार पर परिभाषित नहींं कर सकती। एक ही पेशे में काम करने वाला व्यक्ति अर्धकुशल हो सकता है, जबकि दूसरा व्यक्ति कुशल हो सकता है। लोगों को उनके कौशल के आधार पर भुगतान मिलता है और इसका फैसला नियोक्ता को करना चाहिए। सरकार को सिर्फ अकुशल कर्मचारियोंं न्यूनतम वेतन तय करना चाहिए।' 
Keyword: skill, wages, jobs,,
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