बिजनेस स्टैंडर्ड - 'राष्ट्रहित' में आरसेप को 'ना'
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'राष्ट्रहित' में आरसेप को 'ना'

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 11 04, 2019

भारत नहीं बनेगा आरसेप समझौते का हिस्सा

बिजनेस स्टैंडर्ड सरकार ने राष्ट्रहित का हवाला देते हुए क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी (आरसेप) समझौते में शामिल होने से आज इनकार कर दिया। सरकार ने एकाएक फैसला करते हुए कहा कि इस प्रस्तावित समझौते से राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचता, इसीलिए भारत इसका हिस्सा नहीं बनेगा। देसी उद्योग और किसान इस समझौते का विरोध कर रहे थे क्योंकि उन्हें फिक्र थी कि इसके जरिये चीन देसी बाजार को अपने माल से पाट देगा। समझौते में शामिल नहीं होने का फैसला कर सरकार ने उनकी चिंता दूर कर दी।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने बैंकॉक में कहा, 'भारत ने शिखर बैठक में शामिल नहीं होने का अपना फैसला सुना दिया। इसमें भारत के हित से जुड़ी कई समस्याएं थीं और संवेदनशील वर्गों की आजीविका पर इसका प्रभाव पड़ा होता। भारत ने सद्भाव दिखाते हुए आरसेप की वार्ता में हिस्सा  लिया था और अपने हितों को ध्यान में रखते हुए सख्ती से अपनी बात रखी थी।' उन्होंने कहा कि भारत को लगता है कि वर्तमान परिस्थितियों में समझौते का हिस्सा नहीं बनना ही सही फैसला है

मगर बाकी 15 देशों ने नेताओं की शिखर बैठक में बातचीत खत्म करने के बाद समझौता करने का फैसला किया। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे। आरसेप नेताओं की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया, 'हमने देखा कि आरसेप में भाग लेने वाले 15 देशों ने सभी 20 भागों के लिए मसौदे पर आधारित बातचीत पूरी कर ली है तथा बाजार के इस्तेमाल से जुड़े सभी मुद्दों पर भी बात हो गई है। साथ ही 2020 में समझौते पर हस्ताक्षर से पहले की कानूनी समीक्षा भी हो गई।'

इस समझौते पर बातचीत 2012 में शुरू हुई थी और अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर 2020 तक कर दिए जाएंगे। अलबत्ता इन देशों ने भारत के लिए दरवाजा खुला छोड़ दिया है। इस समूह में भारत ही वह सबसे बड़ा बाजार है, जहां इन देशों की ज्यादा पैठ नहीं है। संयुक्त बयान में कहा गया, 'भारत को कई समस्याएं हैं, जो सुलझ नहीं पाईं। आरसेप के सभी देश एक दूसरे को संतुष्ट करते हुए इन समस्याओं को सुलझाएंगे। भारत का अंतिम निर्णय इन समस्याओं के संतोषजनक समाधान पर निर्भर करेगा।'

सूत्रों के मुताबिक मोदी ने सम्मेलन में शामिल दूसरे नेताओं को बताया कि समझौते के मौजूदा प्रारूप में आरसेप की मूल भावना और वे मार्गदर्शन सिद्घांत पूरी तरह परिलक्षित नहीं होते हैं जिन पर सहमति बनी थी। साथ ही इसमें भारत की चिंताओं को भी दूर नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'आज हम देखते हैं कि सात साल तक चली आरसेप वार्ता के दौरान वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक परिदृश्य सहित कई चीजें बदल चुकी हैं। हमें इन बदलावों को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। समझौते के मौजूदा प्रारूप में आरसेप की मूल भावना और सम्मत मार्गदर्शन सिद्घांत पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं होते हैं।'

इस महत्त्वाकांक्षी करार में अब 10 आसियान देश और पांच अन्य देश न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल होंगे। इन देशों के साथ आसियान देशों ने मुक्त व्यापार समझौता किया है। इस बारे में अब तक 28 दौर की वार्ता हो चुकी है। इसके अलावा कई मंत्री स्तरीय बैठकें और तकनीकी दौर की कई वार्ताएं हुई हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक घरेलू उद्योग के भारी दबाव के कारण यह फैसला किया गया होगा। 
Keyword: RCEP, commerce, narendra modi,,
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