बिजनेस स्टैंडर्ड - ऐक्टिव फंड हारा तो लें पैसिव फंड का सहारा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, November 13, 2019 05:54 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

ऐक्टिव फंड हारा तो लें पैसिव फंड का सहारा

संजय कुमार सिंह /  November 03, 2019

भारतीय निवेशकों का आम तौर पर ऐक्टिव फंडों में निवेश का रुझान रहा है। इसमें अचंभा भी नहीं होना चाहिए क्योंकि लंबी अवधि में कुछ ऐक्टिव फंडों का अच्छा रिकॉर्ड रहा है और इनमें निवेश करने वालों को तगड़ा मुनाफा भी हुआ है। मगर यह समय निवेशकों के लिए अपनी पसंद बदलने का उचित समय कहा जा सकता है। अगर वे अपनी पसंद पूरी तरह बदलना नहीं चाहते तो भी उन्हें इसमें कुछ फेरबदल तो करना ही चाहिए। इस तरह उन्हें अपने पोर्टफोलियो में पैसिव फंडों को भी थोड़ी जगह देनी चाहिए।  

भारतीय निवेशक ऐक्टिव फंडों को तरजीह क्यों देते हैं यह बताना भी मुश्किल नहीं है। सेबी ने फंडों की श्रेणियों में जो फेरबदल किया है, उसके बाद इस समय 135 यूनीक डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड हैं। इनमें से 88 का कम से कम 10 साल का रिकॉर्ड मौजूद है। उनमें 32 फंडों ने 15 फीसदी से अधिक प्रतिफल दिया है और कुछ का प्रतिफल तो 24.4 फीसदी तक गया है।

मगर हाल के वर्षों में यह बात सामने आने लगी है कि ऐक्टिव फंडों के प्रबंधक प्रतिफल के मामले में बेंचमार्कों को मात नहीं दे पा रहे हैं, विशेष रूप से बाजार के लार्ज-कैप खंड में। लार्ज-कैप फंडों में से केवल 26.7 फीसदी ने पिछले एक साल के दौरान और केवल 6.9 फीसदी ने पिछले तीन साल के दौरान अपने बेंचमार्कों से अधिक प्रतिफल दिया है। लार्ज कैप फंड बाजार पूंजीकरण के हिसाब से शीर्ष 100 शेयरों में निवेश कर सकते हैं।

फंड प्रबंधक इसकी वजह यह बताते हैं कि निफ्टी में महज 5 से 10 शेयरों ने पिछले कुछ वर्षों में अच्छा प्रदर्शन किया है और बाकी शेयर कमजोर रहे हैं। ऐसे में जब महज कुछ शेयर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तो डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो रखने वाले ऐक्टिव फंड प्रबंधकों के लिए बेंचमार्कों से बेहतर प्रदर्शन करना बहुत मुश्किल है। जब कंपनियों की आमदनी में सुधार आएगा और पूरा बाजार अच्छा प्रदर्शन करना शुरू करेगा तो ऐक्टिव फंड प्रबंधकों के प्रदर्शन में सुधार आएगा। अब बेंचमार्कों के रूप में कुल प्रतिफल सूचकांकों (जिनमें लाभांश भी शामिल है) को अपनाए जाने से ऐक्टिव फंड प्रबंधकों की चुनौती और बढ़ गई है। 

हालांकि ऐसे कुछ अन्य सबूत भी हैं, जो यह दर्शाते हैं कि पिछले कुछ समय से लार्ज-कैप श्रेणी के फंडों का प्रदर्शन कमजोर पड़ता जा रहा है। एडलवाइस म्युचअल फंड के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2000 और 2007 के बीच लार्ज कैप फंडों का तीन साल का औसत प्रतिफल निफ्टी50 सूचकांक के कुल प्रतिफल के मुकाबले 4 फीसदी अधिक रहा। लेकिन यह वर्ष 2008 से 2017 के बीच घटकर महज 1 फीसदी पर आ गया। 

एसऐंडपी सूचकांक बनाम ऐक्टिव फंड्स (एसपीआईवीए) की रिपोर्ट (2018 के अंत) में दिखाया गया है कि बीते 10 वर्षों के दौरान 64.23 फीसदी फंडों से बेहतर प्रदर्शन उनके सूचकांकों ने किया यानी केवल 35.77 फीसदी फंडों ने अपने सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। मिड और स्मॉल कैप श्रेणी में 55.26 फीसदी फंडों ने अपने सूचकांकों से कमजोर प्रदर्शन किया। केवल 44.74 फीसदी फंडों ने अपने सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। इस तरह अगर लंबी अवधि में आधे से कम ऐक्टिव फंड अपने बेंचमार्क से अधिक प्रतिफल दे पाते हैं तो निवेशकों को कम लागत के पैसिव फंडों में कुछ निवेश कर अपने निवेश की हेजिंग करनी चाहिए। उन्हें पैसिव फंडों में बाजार के बराबर सुनिश्चित प्रतिफल मिलेगा। 

आपको क्या करना चाहिए? ऐक्टिव फंडों को पूरी तरह छोड़कर पैसिव फंडों में जाना भी बुद्धिमानी का फैसला नहीं होगा। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स मुख्य वित्त योजनाकार विशाल धवन ने कहा, 'आपको अपने लार्ज-कैप निवेश में से करीब 50 फीसदी पैसिव फंडों में निवेश करना चाहिए।' मिड और स्मॉल कैप श्रेणियों में ऐक्टिव फंड प्रबंधकों के पास इन श्रेणियों से बेहतर प्रदर्शन करने की गुंजाइश है क्योंकि इन श्रेणियों पर कम नजर रखी जाती है और फंड प्रबंधकों के पास छिपे हुए नगीनों यानी वाजिब कीमत से कम पर मिल रहे शेयरों को चुनने का मौका होता है। इसके अलावा इस श्रेणी में पैसिव फंडों के बहुत अधिक विकल्प भी मौजूद नहीं हैं। इसलिए अब लार्ज कैप श्रेणी से शुरुआत करें और भविष्य में ऐक्टिव फंड कितना बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उसके आधार पर फैसला लें।  

पैसिव फंडों की कम लागत का उठाएं फायदा 

रिलायंस निप्पॉन लाइफ एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और सीईओ संदीप सिक्का ने कहा कि निवेशकों को पैसिव फंडों की कम लागत का फायदा उठाना चाहिए। निवेशकों के लिए पैसिव फंडों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उनकी लागत कम है। आम तौर पर निफ्टी आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में खर्च का अनुपात 0.05 -0.10 फीसदी प्रति वर्ष होता है, जो ऐक्टिव लार्ज कैप फंडों के डायरेक्ट प्लान में 1 फीसदी है। निवेशक को 10 साल की निवेश अवधि के दौरान लागत में 9 फीसदी से अधिक बचत होगी, जिससे निवेशक का ज्यादा पैसा उसके लिए काम करेगा। आम तौर पर इक्विटी निवेश लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए होते हैं, इसलिए कम लागत के पैसिव निवेश निवेशक के लिए कारगर साबित हो सकते हैं। पैसिव निवेश से शेयरों और फंड प्रबंधक के चयन के जोखिम खत्म हो जाते हैं। 

कोर-सैटेलाइट मिश्रण के जरिये पैसिव फंडों और ऐक्टिव फंड को संयुक्त रूप से भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आम तौर पर पोर्टफोलियो के मुख्य हिस्से से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए और इसमें एक निर्धारित समय पर फिर से संतुलन या आवंटन में बदलाव के लिए फेरबदल किया जाना चाहिए। इन फंडों को बेहतर प्रदर्शन के फेर में अनावश्यक जोखिम लेने के बजाय कम लागत और व्यापक डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके लिए पैसिव फंड सबसे बेहतर हैं। 

एक सैटेलाइट हिस्से में निवेशक उन रणनीतियों के बारे में विचार कर सकते हैं, जिनसे उन्हें भारी प्रतिफल मिलने की उम्मीद है। इसमें निवेशक उन योजनाओं में कुछ पैसा लगा सकते हैं, जिनमें उन्हें बेहतर प्रतिफल मिलने की उम्मीद है।

डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के अध्यक्ष कल्पेन पारेख ने कहा कि एक पूरे चक्र में अपनी शैली को बरकरार रखने वाले ऐक्टिव फंड मैनेजर बेहतर प्रदर्शन करेंगे। पिछले साल अगस्त में आपने लार्ज कैप शेयरों में देखा होगा कि सभी एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) का भारित औसत प्रदर्शन बीएसई 100 कुल प्रतिफल सूचकांक (टीआरआई) की तुलना में -5 फीसदी था। बेंचमार्क ने बेहतर प्रदर्शन किया था। यह वह समय था, जब ज्यादातर प्रतिफल शीर्ष 7 शेयरों ने दिया था। फंड प्रबंधक केवल इन 7 शेयरों  में ही निवेश नहीं कर सकते थे। 

इस समय ऐक्टिव फंडों का एक साल का प्रतिफल बेंचमार्क से -0.3 फीसदी कम है। इस तरह कमजोर प्रदर्शन की ज्यादातर भरपाई हो गई है। इस तरह हालात बदल रहे हैं। मल्टी कैप श्रेणी में निफ्टी 500 शामिल है। इसमें पिछले साल एक साल की अवधि का प्रतिफल -4 फीसदी था। अब यह धनात्मक 1.26 फीसदी पर आ गया है। इस तरह पिछले एक साल में प्रतिफल के रुझान में अहम सुधार आया है क्योंकि प्रदर्शन में एक तरफ झुकाव कम हो रहा है। 

प्रत्येक फंड प्रबंधक को बेंचमार्क से अधिक प्रतिफल अर्जित करने के लिए शेयरों को खरीदने का एक निश्चित खाका रखना चाहिए। बाजार में ऐसे कई दौर आएंगे, जब उनके खाके से जुड़े शेयर अच्छा प्रदर्शन नहीं करेंगे। लेकिन 5 से 7 साल की लंबी अवधि में अपने खाके से जुड़े रहने पर वह बेंचमार्क से बेहतर प्रतिफल अर्जित कर पाएगा।
Keyword: Fund, Active Fund, Passive Fund, Benchmark, Investment, Share, Market,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दूरसंचार क्षेत्र को राहत देने के उपाय करे सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.